इंदौर, 21 जनवरी,2017/
इंदौर सहित रीवा और छतरपुर जिले में खेतों में फसल हानि करने वाले रोजड़ो (नील गाय) को पकड़ने के लिये वन विभाग द्वारा दल बनाये जायेंगे। यह दल मंदसौर जिले में सफल हुयी एराकेप्चर तकनीक (बोमा पद्धति) से रोजडो (नील गाय) को पकडेंगे और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करेंगे। नील गाय को गांधी सागर, इंदिरा सागर, औंकारेश्वर परियोजना आदि वन अभ्यारण सहित अन्य क्षेत्रों की संभावनाओं का पता लगा कर फैंसिंग कर रखे जायेंगे। यह जानकारी आज यहां वन मंत्री डॉ. गौरीशंकर शैजवार ने वनविभाग द्वारा आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में दी।
इस अवसर पर प्रमुख वन संरक्षक वन्यप्राणी श्री जितेन्द्र अग्रवाल, मुख्य वन सरंक्षक श्री पुरषोत्तम धीमान तथा श्री बी.एस.अन्नागेरी विशेष रूप से मौजूद थे। बैठक में वन मंत्री डॉ.गौरीशंकर शैजवार ने संबोधित करते हुए कहा कि मंदसौर जिले के ऐरा ग्राम में बोना तकनीक से नील गाय को पकड़ने का सफल अभियान चलाया गया। इस अभियान की सफलता को देखते हुए अब प्रदेश के इंदौर सहित रीवा, छतरपुर और मंदसौर जिले में बोमा तकनीक से नील गाय को पकड़ने के लिये दल बनाये जायेंगे। पकडी गयी नील गाय को फैसिंग कर अभ्यारण में रखने की कार्रवाई की जायेगी। उन्होंने कहा कि मंदसौर जिले के ऐरा ग्राम में अच्छा प्रयोग हुआ है। नील गाय को पकड़ने का एक अच्छा हल निकला है। तकनीकी विशेषज्ञों से विचार विमर्श कर इस तकनीक को और अधिक उपयोगी बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि फसलों की रक्षा के साथ ही वन्य जीवों की रक्षा का दायित्व भी हमारा है। हम ऐसा रास्ता निकलेंगे जिससे कि फसलों का नुकसान न हो और वन्य जीवों की रक्षा भी हो। उन्होंने कहा कि प्रदेश में वन्य जीवों से फसलों के नुकसान को बचाने के लिये दीर्घकालीन योजना बनायी जाएगी। हमारा प्रयास होगा कि इस योजना के क्रियान्वयन में ग्रामीणों की सक्रिय सहभागीता भी ली जाए। उन्होंने कहा कि फसलों की रक्षा कर हम ग्रामीणों का विश्वास अर्जित करना चाहते हैं। उन्होंने इस तरह की कार्यशाला अन्य जगहों पर भी आयोजित करने के निर्देश दिये जिससे कि वन्य जीवों से फसलों के नुकसानी बचाने के लिये उपयोगी हल निकाले जा सके।
कार्यशाला में मंत्री डॉ.गौरीशंकर शैजवार ने मंदसौर जिले की सीतामऊ तहसील के ग्राम ऐरा में रोजडो (नील गाय) को पकड़ने में उल्लेखनीय सहयोग देने वाले सरपंच, अन्य ग्रामीण और वन विभाग के अधिकारियों को सम्मानित किया। इस अवसर पर सरपंच श्री नंदकिशोर धाकड़ ने अपने अनुभव सुनाये।
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महिपाल/श्रीकांत