Thursday, 15 March 2018


इंदौर के 5 विद्यालयों में विधिक साक्षरता क्लबों की स्थापना
इंदौर 15 मार्च,2018
       शासकीय स्कूलों के विद्यार्थियों को कानून की जानकारी देने के लिये जिले के 5 शासकीय उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालयों में विधिक साक्षरता क्लबों का गठन किया गया है।
       मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरणजबलपुर द्वारा दिये गये निर्देशानुसार जिला मुख्यालय स्तर पर एक तथा शेष 4 विधिक साक्षरता क्लब तहसील/ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित किये गये है। जिन स्कूलों में विधिक साक्षरता क्लब स्थापित किये गये हैउनमें शासकीय स्वामी विवेकानंद उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय शासकीय कन्या उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय सांवेरशासकीय कन्या उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय डॉ. अम्बेडकर नगर (महू)शासकीय कन्या उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय देपालपुर तथा शासकीय कन्या उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय कम्पेल शामिल है।
      विधिक साक्षरता कल्ब से विद्यार्थियों को नि:शुल्क जानकारी प्रदान कि जायेगी। साथ विधि से संबंधित पुस्तकों का पुस्तकालय बनाया जायेगा। इससे विद्यार्थियों को स्कूली शिक्षा के साथ-साथ कानून की शिक्षा प्राप्त हो सकेंगी।
क्रमांक 145/368/महिपाल/अभिषेक



पिपल्याहाना में निर्मित होने वाले जिला न्यायालय भवन में अधिवक्ताओं को चेम्बर आवंटित होंगे



इंदौर 15 मार्च,2018
       उच्च न्यायालय की भवन निर्माण एवं अनुरक्षण समिति द्वारा लिये गये निर्णय के पालन में  पिपल्याहानाइंदौर में प्रस्तावित नवीन जिला न्यायालय भवन परिसर में निर्मित होने वाले अभिभाषक चेम्बर के आवंटन की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। इच्छुक अभिभाषकों से आवेदन पत्र आमंत्रित किये जा रहे है।
  इच्छुक उम्मीदवार जो इंदौर अभिभाषक संघ के सदस्य होकर नियमित व्यवसायी हैंवे एकल अथवा 1+4 के समूह में अभिभाषक रजिस्ट्रेशन हेतु कार्यालय अधीक्षकजिला न्यायालयइंदौर के समक्ष 20 मार्च,2018 तक आवेदन सादे कागज पर हस्तलिखित या टाईप कॉपी में जिला एवं सत्र न्यायाधीशइंदौर के नाम से प्रस्तुत करना होगा।
 प्रत्येक चेम्बर की रजिस्ट्रेशन फीस 10 हजार रूपये नियत की गई है जो ओवदन के साथ जिला एवं सत्र न्यायाधीशइंदौर के नाम से जारी डी.डी./बैंकर्स चेक के माध्यम से देय होगी।
क्रमांक 144/367/महिपाल/अभिषेक


आपदाओं से निपटने के लिये पूर्व तैयारियाँ अत्यन्त जरूरी
आपदा प्रबंधन पर एक दिवसीय जिला स्तरीय कार्यशाला संपन्न
इंदौर 15 मार्च 2018
      आपदा प्रबंधन संस्थान भोपाल तथा जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वाधान में कलेक्टर कार्यालय के सभाकक्ष में गुरूवार को आपदा प्रबंधन पर एक दिवसीय जिला स्तरीय कार्यशाला संपन्न हुई। कार्यशाला में नगर निगम, जल संसाधन, लोक निर्माण विभाग, होमगार्ड, पुलिस, राजस्व, पीएचई, स्वास्थ्य, शिक्षा व अन्य विभागों के अधिकारीगण मौजूद थे।
      कार्यशाला में बताया गया कि आपदा प्राकृतिक व मानव निर्मित हो सकती है। आपदाएं आकस्मिक रूप से आती है। ऐसे वक्त में आपदाओं से निपटने के लिये जरूरी है कि सभी संसाधनों की व्यवस्थाएँ और अन्य तैयारियाँ पहले से ही कर ली जायें। विभागीय अधिकारी अपने संसाधनों को हर समय क्रियाशील स्थिति में रखें। आपदा से निपटने हेतु जिला स्तर पर समन्वित कार्ययोजना तैयार रहना चाहिए। हर विभाग को आपदा से निपटने के संबंध में अपनी भूमिका की जानकारी रहे। कार्यशाला में बताया गया कि आपदा प्रबंधन के संबंध में वर्ष 2005 में एक अधिनियम बनाया गया है जिसके तहत जिला स्तर पर आपदा प्रबंधन हेतु कलेक्टर की अध्यक्षता में एक समिति गठित हैं। यह समिति आपदाओं से निपटने हेतु जिले में योजना बनाने, विभागों के बीच समन्वय व मॉनिटरिंग के लिए जिम्मेदार हैं।
      कार्यशाला में बताया गया कि आपदाओं में सूखा, बाढ़, औद्योगिक व रसायनिक दुर्घटनाएं, सड़क व रेल दुर्घटनाएं, भूकंप, अग्नि दुर्घटनाएं आदि शामिल हैं। कार्यशाला में सभी संबंधित विभागों को आपदा से निपटने के लिए सभी जरूरी तैयारियां पहले से ही कर लेने के निर्देश दिए। अधिक वर्षा के कारण बाढ़ की स्थिति में नाले-नालियों  की सफाई वर्षा से पूर्व करने, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की पहले से ही पहचान कर रखने, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की सूची संबंधित विभागों को भेजने, बाढ़ के दौरान राहत संबंधी कार्य आदि की कार्य योजना पहले से ही बनाकर तैयार रखने के लिए अवगत कराया गया। आपदा के दौरान सूचनाओं के आदान प्रदान पर विशेष रूप से ध्यान देने व कंट्रोल रूम की स्थापना के लिए कहा गया। भूकंप जैसी आपदा से निपटने हेतु भवन निर्माण की अनुमति के दौरान सावधानियां का पालन कराने हेतु नगर निगम को कहा गया। भूकंप की स्थिति में भवन के अंदर लोग कैसे अपने आप को सुरक्षित रख सकते है के संबंध में विस्तार से बताया गया।
      कार्यशाला में अग्नि दुर्घटना की रोकथाम व नियंत्रण के संबंध में विस्तार से अवगत कराया गया और बताया गया कि अग्नि के प्रकार के अनुसार उसे बुझाने के लिए उपाय किये जाने चाहिए। कार्यशाला में औद्योगिक आपदा, रसायनिक आपदा, के अलावा सड़क व रेल दुर्घटनाओं के समय आपदा प्रबंधन हेतु विस्तार से समझाइश दी गई तथा आपदा प्रबंधन में विभागों की भूमिका से भी अवगत कराया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे सजग रहें और आपदा से नियंत्रण के लिए अपने संसाधनों को हमेशा तैयार रखे।
क्रमांक 142/365/भदौरिया/जी 


शिक्षण सत्र 2018-19 में 960 सरकारी स्कूलों का होगा उन्नयन


शिक्षण सत्र 2018-19 में 960 सरकारी स्कूलों का होगा उन्नयन
जिला-स्तरीय उत्कृष्ट विद्यालयों में होगी छात्रावास सुविधा 
इंदौर : 15 मार्च 2018

प्रदेश में स्कूल शिक्षा के लोकव्यापीकरण के लिये शिक्षण सत्र 2018-19 से 960 सरकारी स्कूलों का उन्नयन किया जा रहा है। इस शिक्षण सत्र में 340 सरकारी हाई स्कूलों का हाई सेकेण्डरी स्कूल में और 620 सरकारी मिडिल स्कूलों का हाई स्कूल में उन्नयन किया जायेगा।
स्कूल शिक्षा विभाग ने संबंधित जिला शिक्षा अधिकारियों को राज्य शासन के निर्णय के कार्यान्वयन के लिये सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ सुनिश्चित करने के निर्देश दिये हैं। उन्नयित स्कूलों में बेहतर शिक्षण व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
प्रदेश में 41 जिलों में जिला-स्तरीय उत्कृष्ट विद्यालयों में भोजन एवं आवासीय व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने 385 करोड़ रूपये की योजना स्वीकृत की है। छात्रावास सुविधा होने से जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थी भी उत्कृष्ट विद्यालयों में पढ़ाई कर सकेंगे।
क्रमांक 143/366/भदौरिया/वटके



उपभोक्ता अपने अधिकारों के प्रति सजग रहें तथा वस्तु खरीदते समय विक्रेता से बिल अवश्य लें - एडीजे श्री अवनीश वर्मा


उपभोक्ता अपने अधिकारों के प्रति सजग रहें तथा वस्तु खरीदते समय विक्रेता से बिल अवश्य लें - एडीजे श्री अवनीश वर्मा
विश्व उपभोक्ता संरक्षण दिवस पर कलेक्टर कार्यालय में कार्यशाला संपन्न
इंदौर 15 मार्च 2018
      विश्व उपभोक्ता संरक्षण दिवस 15 मार्च 2018 के उपलक्ष्य में खाद्य नागरिक आपूर्ति, उपभोक्ता संरक्षण विभाग के तत्वाधान में गुरूवार को कलेक्टर कार्यालय के सभाकक्ष में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री अवनीश कुमार वर्मा के मुख्य आतिथ्य तथा एडीएम श्री कैलाश वानखेड़े की अध्यक्षता में जिला स्तरीय कार्यशाला संपन्न हुई। कार्यशाला में उपभोक्ता फोरम के सदस्य श्री कुंदन सिंह चौहान तथा जिला आपूर्ति नियंत्रक श्री एल मुजालदा विशिष्ठ अतिथि के रूप में उपस्थित थे।
      कार्यशाला में अपने संबोधन में मुख्य अतिथि व अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री अवनीश कुमार वर्मा ने कहा कि उपभोक्ताओं को बाजार में धोखाधड़ी व ठगी से बचने के लिए अपने अधिकारों के प्रति सजग रहना जरूरी हैं। उन्होने कहा कि सरकारी तंत्र अपने स्तर से जन जागरूकता हेतु हर संभव प्रयास करता है, किन्तु स्वैच्छिक संगठन की पैठ समाज के हर वर्ग में व नीचे स्तर तक हैं जिससे वे उपभोक्ताओं को जागरूक करने में महती भूमिका निभा सकते हैं। उन्होने कहा कि यदि हम समर्पण भाव से उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक कर पाने में सफल हुए और हमारे प्रयासों से कोई एक व्यक्ति भी ठगी से बचने में सफल हो पाया तो निश्चित रूप से हमारा प्रयास सार्थक ही कहा जायेगा। उन्होने कहा कि जागरूकता के अभाव में ही उपभोक्ता ठगा जाता हैं। यदि उपभोक्ता जागरूक होगें तो निश्चित रूप से वस्तुएं खरीदते समय सजग ही रहेंगें। उन्होने कहा कि उपभोक्ता कोई भी चीज खरीदे तो उसका बिल जरूर लें। बिल होने पर ही उपभोक्ता विक्रेता के विरूद्ध उपभोक्ता फोरम में दावा कर सकता है।
      कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए एडीएम श्री कैलाश वानखेड़े ने कहा कि समाज में लोग संबंध व व्यवहार बनाने में जाँच-परख करते है वहीं वस्तुओं व सेवाओं की खरीदी में समयाभाव के कारण अनदेखी कर देते हैं। उन्होंने कहा कि वस्तुओं की खरीदी करते समय पूर्ण सावधानी बरतनी चाहिए और जाँच-परख कर ही वस्तुएँ खरीदनी चाहिये। वस्तु की गुणवत्ता, कीमत, एक्सपायरी डेट, बिल आदि का ध्यान आवश्यक रूप से रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि उपभोक्ता जागरूक होगें तो उपभोक्ता फोरम में जाकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकेगें । 
      विशिष्ठ अतिथि व सदस्य उपभोक्ता फोरम श्री कुन्दन सिंह चौहान ने कहा कि उपभोक्ता कोई भी वस्तु खरीदते समय पूरी सावधानी बरतेगें और वस्तु की कीमत, क्वालिटी, एक्सपायरी डेट आदि देखेगें तो विक्रेता किसी प्रकार की धोखाधड़ी नहीं कर पायेगा। उन्होंने कहा कि उपभोक्ता कोई भी चीज खरीदें तो बिल अवश्य लें। बिल होने पर यदि उपभोक्ता के साथ कोई ठगी होती है तो उपभोक्ता फोरम में जाकर शिकायत दर्ज करा सकता हैं। जहां से उसे न्याय मिल सकता हैं।
          कार्यशाला में खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग से सुश्री वैशाली सिंह, नापतौल विभाग से उप नियंत्रक श्री आर.के. द्विवेदी, बैंकिग सेवा से श्री मिश्रा ने उपस्थित समुदाय को अपने-अपने विभागों के कार्यों एवं गतिविधियों की जानकारी दी तथा उपभोक्ताओं के संरक्षण के लिए शासकीय प्रावधानों की जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि ‍वस्तुएं खरीदते समय प्रिंट कीमत अवश्य देखे प्रिंट कीमत से अधिक कीमत पर यदि कोई वस्तु खरीदता है तो उसकी शिकायत करें। बैंक अधिकारियों ने बताया कि किसी को भी एटीएम नंबर, पिन नंबर, ओटीपी नंबर आदि कभी नहीं बतायें। कोई भी बैंक इनकी जानकारी नहीं मांगता हैं। कार्यशाला में स्वैच्छिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखें। कार्यक्रम के प्रारंभ में जिला आपूर्ति नियंत्रक श्री एल.मुजालदा ने कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।
      विश्व उपभोक्ता संरक्षण दिवस के अवसर पर उपभोक्ताओं को जागरूक करने के लि विभिन्न विभागों द्वारा प्रदर्शनी भी आयोजित की गई। इस प्रदर्शनी में खाद्य, नगर निगम, नापतौल, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, लघु उद्योग निगम, पेट्रोलियम कंपनियां (इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम, हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कंपनी) एलपीजी एवं अन्य विभागों द्वारा स्टॉल लगाये गये। उपभोक्ताओं को विभिन्न विषयों पर उनके अधिकारों के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी देते हुए प्रचार सामग्री भी उपलब्ध कराई गई।
क्रमांक 141/364/भदौरिया/जी

एड्स के संबंध में जन जागरूकता हेतु सभी विभागों के समन्वित प्रयास जरूरी



जिला स्तर पर अंतर्विभागीय समन्वय हेतु कार्यशाला संपन्न
इंदौर 15 मार्च, 2018
      जिला एडस रोकथाम एवं नियंत्रण इकाई इंदौर द्वारा कलेक्टर कार्यालय के सभाकक्ष क्रमांक 210 में जिला स्तर पर अंतर्विभागीय समन्वय के संबंध में कार्यशाला सम्पन्न हुई। इस अवसर पर एचआईव्ही/एडस के संबंध में जनजागरूकता पर आधारित लघु फिल्म का भी प्रदर्शन किया गया। कार्यशाला में वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. रचना दुबे ने विस्तार से प्रजेंटेशन प्रस्तुत किया तथा विभागों से एचआईव्ही/एडस नियंत्रण कार्यक्रम में सहयोग से संबंधित अपेक्षाएं भी व्यक्त की। कार्यशाला कलेक्टर श्री निशांत बरवडे की अध्यक्षता, एडीएम श्रीमती रूचिका चौहान, एडीएम श्री कैलाश वानखेड़े, एडीएम श्री अजय शर्मा, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नायक की विशेष उपस्थिति में आयोजित की गयी।
      कार्यशाला में वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. रचना दुबे ने बताया कि एडस की बीमारी एक एचआईव्ही (ह्युमन इम्युनो डिफिसिएनसी) वायरस द्वारा होती है। यह वायरस व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता समाप्त कर देता है तथा इसके कारण व्यक्ति को कई बीमारियां एक साथ हो जाती हैं। उन्होंने बताया कि विश्व में एचआईव्ही/एडस ग्रस्त व्यक्तियों में भारत तीसरा बड़ा देश है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश देश के मध्य में स्थित है और यहां से देश के कई बड़े राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरते हैं,जिससे बड़ी संख्या में लोगों का आवागमन होता है। ग्रसित व्यक्तियों के आने से संक्रमण के फैलने की संभावना बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि एचआईव्ही/एडस चार माध्यमों अर्थात असुरक्षित यौन संबंध से, संक्रमित सुईयों का उपयोग, गर्भवती माता से बच्चे में संक्रमण तथा संक्रमित खून चढ़ाने से फैलता है। उन्होंने कहा कि जागरूकता व सावधानियां बरतने से एचआईव्ही/एडस के संक्रमण से बचा जा सकता है। उन्होंने एचआईव्ही/एडस  रोग के लक्षण, जाँच, बीमारी से निपटने हेतु चुनौतियों आदि के संबंध में विस्तार से जानकारी दी।
      कार्यशाला में डॉ. रचना दुबे ने कहा कि जन जागरूकता हेतु सभी विभागों के समन्वित प्रयास किया जाना जरूरी हैं। जागरूकता बढ़ने से बीमारी से बचा जा सकता हैं। उनहोने कार्यशाला में विभिन्न विभागों से सहयोग हेतु अपेक्षाएं भी व्यक्त की और बताया गया कि विभागीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों में एचआईव्ही/एडस विषय का समावेश किया जाये,जिनमें विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को एचआईव्ही/एडस के बारे में संवेदनशील किया जाये। एचआईव्ही/एडस रोकथाम संदेशों को विभागीय प्रचार-प्रसार सामग्रियों में प्रिंट किया जाये वहीं शिक्षण संस्थानों रेड रिबन क्लब की स्थापना की जाये। स्वैच्छिक रूप से रक्तदान शिविरों का आयोजन किया जाये। सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को एचआईव्ही/एडस संक्रमित व्यक्तियों के हित में संचालित करने का भी सुझाव दिया गया।
क्रमांक 140/363/भदौरिया/जी

एफआईआर दर्ज करने के निर्देश



इंदौर 15 मार्च 2018 
       उपसंचालक कृषि श्री विजय कुमार चौरसिया ने कीटनाशक औषधि, नमूना अमानक पाये जाने पर मैसर्स जेएस ट्रेडर्स कमदपुर महू के खिलाफ स्थानीय थाने में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने के लिए कीटनाशी निरीक्षक और वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी महू को निर्देश दिए हैं।  उक्त फर्म के कीटनाशक औषधि नमूने को जांच हेतु केन्द्रीय कीटनाशी प्रयोगशाला फरीदाबाद भेजा गया था। जांच उपरांत कीटनाशक नमूना अमानक स्तर का पाया गया। संबंधित फर्म के खिलाफ कीटनाशी अधिनियम 1968 और 1971 के तहत कानूनी कार्यवाही की जा रही हैं।
क्रमांक137/360/सिंह/जी

वृक्षारोपण से जैव विविधता लेती है मूर्तरूप



स्वच्छ भारत अभियान - हर घर में इज्जत घर जरूरी
…………………….
प्रधानमंत्री आवास योजना - हर गरीब के सिर पर छत आवश्यक
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संभागायुक्त ने ग्रामीण विकास कार्यक्रमों की समीक्षा की
इंदौर 15 मार्च 2018
      कमिश्नर श्री संजय दुबे की अध्यक्षता में गत दिवस कमिश्नर कार्यालय सभाकक्ष में इंदौर संभाग के वन मण्डलाधिकारियों और जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों की बैठक आयोजित की गई। इस अवसर पर कमिश्नर श्री दुबे ने कहा कि इंदौर संभाग में व्यापक पैमाने पर आगामी जुलाई माह में पौधारोपण करने के लिए आज से ही तैयारी करना जरूरी हैं, तभी लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा। इस वर्ष जुलाई माह में विशेष मुहिम चलाकर एक करोड़ से अधिक पौधे लगाये जाये। यह पौधे शासकीय भूमि, निजी भूमि, खेत की मेड़, सड़क के किनारे और नहर के किनारे लगाये जाये। उन्होने कहा कि पौधों को बड़ा करने के लिए पौधा 3 फिट से अधिक बड़ा होना चाहिए। पौध रक्षक की नियुक्त होना चाहिए और सिचांई के साधन होना चाहिए तभी पौधे जीवित रहेगें।
      उन्होने  कहा कि बड़े पौधे लगाने पर उनकी जीवित रहने की संभावनाएं ज्यादा रहती हैं। गर्मियों में पहले से ही गड्डा खोद देने से उसके अनावश्यक कीटाणु मर जाते हैं। जंगली व विदेशी पौध लगाने की बजाय छायादार और फलदार पौधे लगाना जरूरी हैं। आम, नीम, महुआ, जामुन और चिरौंजी के पौधे लगाये जाय। और उनकी देखभाल के लिए पौध रक्षक की नियुक्ति की जाये। मनरेगा योजना से गड्डे खोदे जा सकते हैं और पौध रक्षक की नियुक्ति की जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि धार और इंदौर जिले में 30-30 लाख पौधे लगाये जाये। पीपल, बरगद तथा गूलर जैसे धार्मिक वृक्ष भी लगाये जाये। अगर ठीक ढंग से वायर फेंसिंग कर दी जाये तो जंगल अपने आप उग आयेगा। पौध रक्षक का काम निकाई, गुड़ाई, खाद और सिंचाई की व्यवस्था करना हैं। पौधों के मर जाने पर उनकी जगह दूसरे पौधे लगाये जाय। जुलाई माह के बाद अगर पौधे लगाये गये तो उनका जीवित रहना मुश्किल हैं।
      उन्होने कहा कि बिना पौध रक्षक में पौधे जीवित नहीं रह सकते। जिलों में पौध रक्षक के अभाव में अधिकांश पौधे मर जाते हैं। धार, झाबुआ, अलीराजपुर में जैव विविधता के लिए संघन वनीकरण जरूरी हैं। पौधे ऐसे लगाये जाये जिनसे फूल-फल और लकड़ी काम आ सके और विविध प्रकार के पक्षियों का आश्रय बन सके।

संभाग को खुले में शौच से मुक्ति जरूरी
कमिश्नर श्री दुबे ने कहा कि इंदौर संभाग को किसी भी स्थिति में आगामी 31 मई 2018 से पूर्व खुले में शौच से मुक्ति जरूरी हैं। इंदौर जैसी व्यवस्था हर जिले में लागू की जाये। अन्यथा संविदा के आधार पर काम कर रहे कर्मचारियों को सेवा से पृथक कर दिया जायेगा। काम ही उनकी नौकरी का मूल आधार है। बनाये गये शौचालयों का उपयोग भी जरूरी हैं। खुले में शौच से मुक्ति के लिए जनता का मानसिक रूप से तैयार करना जरूरी हैं। यह काम सरपंच, सचिव, सहायक विकास विस्तार अधिकारी, रोजगार सहायक, सहायक परियोजना अधिकारी और परियोजना अधिकारी टीम भावना से मिलजुल कर करें। 31 मई तक विकास खण्ड शौच से मुक्त न होने पर संबंधित जनपद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्यवाही की जायेगी। धार, झाबुआ, अलीराजपुर, खण्डवा और खरगोन की स्थिति बहुत चिंताजनक हैं। किसी भी योजना की सफलता के लिए जनता का सहयोग जरूरी हैं। इन जिलो का प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर की टीम मई माह में निरीक्षण करेगी। 
सभी गरीबों को प्रधानमंत्री आवास मिलना जरूरी
      कमिश्नर श्री दुबे ने प्रधानमंत्री आवास योजना की समीक्षा करते हुए कहा कि इंदौर जिले को छोड़कर संभाग के सभी जिलों की स्थिति चिंताजनक हैं। धार, झाबुआ, अलीराजपुर, खण्डवा, खरगोन, बडवानी, बुरहानपुर में अभीतक 60 प्रतिशत लक्ष्य भी हासिल नहीं हो पाया हैं। काम न करने वाले हितग्राहियों से प्रथम किस्त की राशि वापस जमा कराई जाये। प्रधानमंत्री आवास के हितग्राहियों को पानी, बिजली, सड़क, गैस कनेश्क्शन, शौचालय आदि की सुविधा भी यथासंभव मुहिया कराई जाये। 30 अप्रैल तक शत-प्रतिशत लक्ष्य पूरा न होने पर जिला पंचायत के सहायक परियोजना अधिकारी या परियोजना अधिकारी को सेवा से पृथक कर दिया जायेगा। इंदौर जिले ने प्रधानमंत्री आवास योजना में अभीतक 95 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया हैं।
      बैठक में इंदौर के मुख्य वन संरक्षक श्री पुरूषोत्तम धीमान, संयुक्त आयुक्त श्रीमती चेतना फौजदार, जिला पंचायत के सहायक परियोजना अधिकारी, परियोजना अधिकारी और उद्यानिकी विभाग के अधिकारी मौजूद थे।
क्रमांक 139/362 /सिंह/जी