राधेश्याम के गेंदा फूल से महक रहा है इंदौर राधेश्याम ने दी किसानों को नगदी फसल करने की सलाह
इंदौर जिले के तहसील साँवेर ग्राम बसान्द्रा निवासी राधेश्याम राठौर वर्षो से परंपरागत खेती करते आ रहे थे। एक दिन उनकी मुलाकात उद्यान विकास अधिकारी विकासखण्ड साँवेर से हुई। उद्यान विकास अधिकारी ने उन्हें फूलों की खेती करने की सलाह दी। राधेश्याम ने अपने खेत के साढ़े चार हेक्टेयर रकबे में बड़े पैमाने पर गेंदा फूल के पौधे रोपे। उसने मिश्रित खेती करते हुए गेंदा फूल के साथ प्याज, लहसुन और मटर की भी मिश्रित खेती शुरू की। उसने आधुनिक तकनीक अपनाते हुए सीड्रिल से बोआई की और मेड़ बनाकर पौधे लगाये। उसने प्लाटिक ट्रेम में पॉली हाऊस में पहले पौधे तैयार किये।
राधेश्याम ने बताया कि उसके खेत से प्रति वर्ष लगभग 125 क्विंटल गेंदा फूल, मटर, लहसुन और प्याज पैदा होता है। उसे खेती पर लगभग 90 हजार रूपये सालाना खर्च करना पड़ते है। उसे सालाना लगभग एक लाख रूपये की शुद्ध आय होती है।
चर्चा के दौरान प्रगतिशील किसान राधेश्याम ने बताया कि उसे अपने खेत में कोलकाता की लाल और पीली दो प्रकार हाईब्रिड गेंदा फूल लगाये थे। पहले उसकी पौध तैयार की, उसके बाद पौध को मेड़ बना कर रोपा, जिससे पौधे तेजी से बढ़े और गुड़ाई भी नहीं करना पड़ी। समय-समय पर समुचित खाद और दवाई का स्प्रे भी किया गया। मात्र 5 माह में ही पौधे में गेंदा फूल आने लगे। गेंदा फूल बाजार में लगभग 15 हजार रूपये प्रति क्विंटल की दर से बिक्री की गयी। उसे सारा खर्च काट कर सालाना एक लाख रूपये मात्र गेंदा फूल से शुद्ध आय हो रही है। राधेश्याम के गेंदा फूल से पूरा इंदौर महक रहा है।
उसने किसानों से कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए नकदी फसल करना जरूरी है और मिश्रित खेती को भी किसान भाई बढ़ावा दें। मिश्रित खेती में फसल उत्पादन दुगुना होता है। कृषि वैज्ञानिकों ने भी किसानों को मिश्रित खेती करने की सलाह दी है।