Thursday, 9 February 2017

ओंकारेश्वर के अभय घाट पर मुख्यमंत्री श्री चौहान ने की माँ नर्मदा की आरती
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उपस्थित श्रद्धालुओं को दिलाया पर्यावरण व नदी संरक्षण का संकल्प
इंदौर 9 फरवरी, 2017  
   ओंकारेश्वर के अभय घाट पर गुरूवार शाम को मुख्यमंत्री श्री षिवराज सिंह चौहान ने सपत्निक  माँ नर्मदा की आरती की। इस दौरान स्वामी अवधेशानंद जी गिरी , प्रदेश के ऊर्जा मंत्री एवं खण्डवा जिले के प्रभारी मंत्री श्री पारस जैन, वन मंत्री श्री गौरीशंकर शेजवार, सांसद श्री नंदकुमार सिंह चौहान, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सह कार्यवाह श्री सुरेश सोनी सहित, सुश्री प्रज्ञाभारती, मांधाता विधायक श्री लोकेन्द्र सिंह तोमर , यात्रा प्रभारी डॉ. जितेन्द्र जामदार, प्रमुख सचिव संस्कृति श्री मनोज श्रीवास्तव, संस्कृति आयुक्त श्री राजेश मिश्रा, सहित अन्य अधिकारी व जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। 
 मुख्यमंत्री श्री चौहान ने इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं को नर्मदा एवं अन्य नदियों के संरक्षण, नशामुक्ति, बेटी बचाओ, तथा पर्यावरण संरक्षण का संकल्प दिलाया। इससे पूर्व मुख्यमंत्री श्री चौहान ने माँ नर्मदा का विधिवत अभिषेक व पूजन किया तथा नर्मदाष्टक का गायन किया तथा माँ नर्मदा की आरती की। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने ओंकारेश्वर नगर को अत्यन्त पवित्र तीर्थ नगरी बताया जहां ब्रम्ह्पुरी , शिवपुरी व विष्णुपुरी तीनों विद्यमान है। 
स्वामी अवधेशानंद जी गिरी ने इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुये कहा कि उन्होंने बचपन से ही नदियों के किनारे अनेक स्थानों पर तपस्या की है तथा अनेक धार्मिक नगरियां देखी है लेकिन आज नर्मदा तट पर जितना अद्भुत दृश्य आरती के दौरान देखने को मिला उतना आज तक नहीं देखा। उन्होंने कहा कि पुराणों में नर्मदा दर्शन का विशेष महत्व है। स्वामी अवधेशानंद जी गिरी ने कहा कि मध्यप्रदेश भारत के हृदय भाग में स्थित है अतः इस प्रदेश में नदी संरक्षण, नशा मुक्ति ,  तथा पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य को लेकर संचालित नर्मदा सेवा यात्रा का अच्छा प्रभाव पूरे देश पर पड़ेगा। 
कृषि मंत्री श्री बिसेन का दौरा कार्यक्रम
इंदौर 9 फरवरी, 2017
किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री गौरीशंकर मौर्य आज 10 फरवरी को शाम 6 बजे इंदौर आयेंगे।  श्री बिसेन इंदौर में दाल मिल एसोसियेशन द्वारा आयोजित प्रदर्शनी में भाग लेंगे। यह प्रदर्शनी लाभ-गंगा गार्डन में लगायी जायेगी। श्री बिसेन शाम 7 बजे कार द्वारा भोपाल के लिये प्रस्थान करेंगे।
नर्मदा की समृद्ध जल राशि से प्रदेश की कृषि वृद्धि दर देश में सबसे ज्यादा बढ़ी
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आंेकारेश्वर के पर्वत को वृक्षारोपण कर हरा-भरा बनायेंगे
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बालिकाओं के साथ दुराचार करने वालों को फांसी की सजा देने का कानून बनाया जायेंगा 
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मुख्यमंत्री श्री चौहान नर्मदा सेवा यात्रा के जनसंवाद कार्यक्रम में 

खण्डवा 09 फरवरी, 2017 - मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा कि नर्मदा का मध्य प्रदेश के विकास में बहुत बड़ा योगदान हैं। इसके जल का प्रदेश में सिंचाई, बिजली उत्पादन, कृषि, पेयजल सहित अन्य क्षेत्रों में भरपूर उपयोग किया जा रहा है और विकास को नये आयाम दिये जा रहे है। उन्होेंने कहा कि नर्मदा की समृद्ध राशि से प्रदेश की कृषि वृद्धि दर देश में सबसे अधिक बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बेटियों के साथ दुराचार करने वालों को बक्सा नहीं जायेगा। उन्हें कड़ी सजा देने के लिये फांसी देने का कानून बनाया जायेगा और इसे मंजूरी के लिये राष्ट्रपति को भेजंेगे।
मुख्यमंत्री श्री चौहान नमामि देवी नर्मदा सेवा यात्रा के तहत आज प्रसिद्ध तीर्थस्थल ओंकारेश्वर में निकाली गई यात्रा के पश्चात आयोजित विशाल जनसंवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में जूना अखाड़ा के पीठाधिश्वर श्री अवेधशानंद जी महाराज, राष्ट्रीय स्वयं सेवक के सर सह कार्यवाह श्री सुरेश सोनी, सांसद श्री नंदकुमारसिंह चौहान, राज्य मंत्री मंडल के सदस्यगण, प्रख्यात निदेशक श्री चन्द्र प्रकाश द्विवेदी, विशेष रूप से मौजूद थे। 
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि नर्मदा सेवा यात्रा जीवन को बचाने वाली यात्रा हैं। उन्होंने कहा कि इस नदी का अस्तित्व वृक्षों पर निर्भर हैं। वृक्ष रहेंगे तो यह नदी रहेंगी। इस नदी को बचाने के लिये बडे़ पैमाने पर वृक्षारोपण का अभियान शुरू किया जा रहा है। प्रसिद्ध तीर्थस्थली ओंकारेश्वर में ओंकार पर्वत को आगामी जुलाई माह में सघन वृक्षारोपण कर हरियाली से आच्छादित किया जायेगा। उन्होेंने नर्मदा किनारे के दोनो ओर के किसानों से आग्रह किया कि वे फलदार पेड़ लगाये। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि नर्मदा के किनारों पर बसे शहरों में मल-जल उपचार संयंत्र लगाये जायेंगे, ताकि यह नदी प्रदूषित ना हो। उन्होेंने कहा कि प्रदेश में एक मई से पॉलीथीन की थैली पर प्रतिबंध लगा दिया जायेगा तथा 31 मार्च के बाद नर्मदा नदी के तटों के किनारें की मदिरा दुकानें बंद कर दी जायेंगी। उन्होंने नर्मदा सेवा यात्रा के विभिन्न पहलुओं की जानकारी देते हुए नागरिकों से इसमें सक्रिय सहयोग देने का आव्हान किया। 
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर सह कार्यवाह श्री सुरेश सोनी ने कहा कि हम नदियों की रक्षा करेंगे तो नदी हमारी रक्षा करेंगी। नदियां माँ के समान हैं। यह जीवन के विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति करती हैं। नदियों का आध्यात्मिक महत्व भी हैं। नदियों का सतत् प्रवाह जीवन के लिये अत्यंत जरूरी हैं। उन्होंने नदियांे में विशेषकर नर्मदा नदी के प्रवाह को अविरल बनाये रखने के लिये सकारात्मक प्रयासों की जरूरत बताई। उन्होंने नदियों की पवित्रता एवं शुद्धता को कायम रखने की बात कही। उन्होंने नर्मदा सेवा यात्रा की सराहना करते हुए कहा कि यह सामाजिक परिवर्तन का बड़ा माध्यम हैं। 
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जुना अखाड़ा के पीठाधिश्वर श्री अवेधशानंद जी महाराज ने कहा कि अर्पण, तर्पण एवं सर्मपण भारतीय संस्कृति का मूल आधार हैं। हमारी संस्कृति में जल को नारायण माना गया हैं। हम प्राकृतिक संसाधनों की पूजा करते हैं। वृक्षों की पूजा का विशेष महत्व हैं। वृक्षो के बगैर जीवन अधूरा है। वृक्षों को बचाकर नदियों का अस्तित्व बचाया जा सकता है। उन्होंने नदियों के प्रदूषण रोकने की भी जरूरत बताई। उन्होंने ओंकारेश्वर में स्थापित होने वाली आदि गुरू शंकराचार्य की विशाल प्रतिमा के लिये धातु के सहयोग की अपील भी की। 
आदिगुरू शंकराचार्यजी महाराज की प्रतिमा के लिये 
जनसहयोग देने का सिलसिला हुआ शुरू
मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने आज घोषणा की थी कि ओंकारेश्वर में आदिगुरू श्री शंकराचार्य जी महाराज की विशाल प्रतिमा स्थापित की जायेगी। अष्टधातु से निर्मित होने वाली प्रतिमा के लिये हर किसी व्यक्ति से धातु का सहयोग लिया जायेगा। कोई भी नागरिक निसंकोच अपनी धातु के टुकडे़ के रूप में अपना सहयोग दे सकता है। जनसंवाद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री चौहान ने सबसे पहले 11 किलो तांबा देने की घोषणा की। इसके बाद देखते ही देखते धातु का सहयोग देने वालों की कतार लग गई। इस दौरान जनप्रतिनिधियों सहित अन्य गणमान्य नागरिकों ने भी धातु का सहयोग करने की घोषणा की। 
मुख्यमंत्री श्री चौहान इसके पश्चात ओंकारेश्वर के नर्मदा नदी पर स्थित अभय घाट पहुंचे। यहां उन्होंने सपत्निक वैदिक मंत्रोच्चार के बीच माँ नर्मदा का पूजन कर आरती की। 
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री चौहान आज नमामि देवी नर्मदा सेवा यात्रा के सिलसिले में ओंकारेश्वर के भ्रमण पर थे। इस दौरान उन्होंने नमामि देवी नर्मदा सेवा यात्रा की अगवानी की तथा सपत्निक इस यात्रा में शामिल हुए। यात्रा के पश्चात वे जनसंवाद कार्यक्रम में पहुंचे थे।










लोक अदालत के लिये 8 खण्डपीठों का गठन
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लोक अदालत में दोनों पक्षों की सहमति से होते हैं फैसले
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लोक अदालत के फैसले के विरूद्ध वरिष्ठ न्यायालय में अपील नहीं हो सकती
इंदौर 9 फरवरी, 2017
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इंदौर में 11 फरवरी, 2017 को नेशनल लोक अदालत का आयोजन प्रशासनिक न्यायमूर्ति श्री पी.के.जायसवाल के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। नेशनल लोक अदालत के माध्यम से न्यायालयों में लंबित विभिन्न प्रकार के प्रकरणों का निराकरण सभी स्तर- सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट एवं जिला न्यायालयों तथा तहसील न्यायालयों में सुलह एवं समझौते के आधार पर किया जाना है।
11 फरवरी, 2017 को आयोजित की जाने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत में आपराधिक शमनीय प्रकरण, परकाम्य अधिनियम की धारा 138 के अंतर्गत प्रकरण, बैंक रिकवरी संबंधी मामले, मोटर दुर्घटना क्षतिपूर्ति दावा प्रकरण, वैवाहिक प्रकरण, श्रम विवाद प्रकरण, भूमि अधिग्रहण के प्रकरण, विद्युत एवं जल कर और बिल संबंधी प्रकरण (चोरी के मामलों को छोड़कर, बिजली तथा जल चोरी के प्रकरण जो कि विधि के अधीन समझौता योग्य हैं, रखे जा सकते हैं), सेवा मामले, जो सेवा निवृत्त संबंधी लाभों से संबंधित है, राजस्व प्रकरण, दीवानी मामले तथा अन्य समस्त प्रकरण के राजीनामा योग्य, प्रकरणों का निराकरण आपसी समझौते के आधार पर किया जायेगा। नेशनल लोक अदालत में प्रकरणों के निराकरण बाबत नेशनल लोक अदालत के लिये उच्च न्यायालय खण्डपीठ इंदौर के लिये 8 खण्डपीठों का गठन किया है।
उच्च न्यायालय के पिं्रसिपल रजिस्ट्रार श्री देवेन्द्र सिंह सोलंकी ने समस्त पक्षकारों एवं अधिवक्तागण से अनुरोध किया है कि उच्च न्यायालय में लंबित प्रकरणों को नेशनल लोक अदालत के माध्यम से सुलह एवं समझौते के आधार पर निराकृत कराने के लिये मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खण्डपीठ इंदौर में पिं्रसिपल रजिस्ट्रार, डिप्टी रजिस्ट्रार, संबंधित सेक्शन एवं मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति इंदौर से सम्पर्क कर सकते हैं और अपने प्रकरणों को नेशनल लोक अदालत में रखने हेतु आवेदन या सूचना दे सकते हैं। लोक अदालत में परस्पर सहमति से फैसले होते हैं। इस फैसले के खिलाफ किसी भी न्यायालय में अपील नहीं की जा सकती।
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सिंह/कपूर
स्पीकर्स कांफ्रेंस के संबंध में बैठक 11 फरवरी को
इंदौर 9 फरवरी, 2017
कमिश्नर श्री संजय दुबे ने 18 और 19 फरवरी, 2017 को नगर में दक्षिण एशियाई देशों के स्पीकर्स के प्रथम शिखर सम्मेलन की तैयारी के संबंध में आगामी 11 फरवरी, 2017 को दोपहर 3 बजे रेसीडेंसी सभाकक्ष में बैठक आहूत की है। बैठक में सभी संबंधित अधिकारियों को आमंत्रित किया गया है। बैठक में इस सम्मेलन में आने वाले व्हीआईपी के भ्रमण संबंधी व्यवस्थाओं के संबंध में चर्चा की जायेगी।
सिंह/कपूर


ओंकारेश्वर में संतों के मार्गदर्शन में वेदांत संस्थान की स्थापना होगी
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आदि शंकराचार्य के दर्शन पर आधारित पाठ स्कूल पाठयक्रम में शामिल होगा
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आदि शंकराचार्य की गुफा का पुनरुद्धार होगा
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भव्य प्रतिमा के लिये हर घर से धातु संग्रहीत की जायेगी
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ओंकारेश्वर में आदि शंकराचार्य स्मरण प्रसंग पर मुख्यमंत्री श्री चौहान ने की घोषणा

इंदौर 9 फरवरी 2017
            मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि आदि शंकराचार्य के अद्वैत दर्शन को आम लोगों तक पहुँचाने और इसे व्यवहार में लाने के लिये ओंकारेश्वर में संतों के मार्गदर्शन में वेदांत संस्थान की स्‍थापना की जायेगी। उन्होंने कहा कि आदि शंकराचार्य के जीवन और दर्शन पर आधारित पाठ स्कूल पाठयक्रम में पढ़ाया जायेगा। ओंकारेश्वर में आदि शंकराचार्य की भव्य प्रतिमा की स्थापना की जायेगी। इस प्रतिमा के लिये प्रदेश के हर घर से धातु का संग्रहण किया जायेगा। श्री चौहान आज यहाँ ओंकारेश्वर में "नमामि देवि नर्मदे'' नर्मदा सेवा यात्रा के आगमन पर आदि शंकराचार्य स्मरण प्रसंग पर संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। उल्लेखनीय है कि आदि शंकराचार्य ने नर्मदा के तट पर ओंकारेश्वर में दीक्षा प्राप्त की थी।
            मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आदि शंकराचार्य के अद्वैत दर्शन के कारण ही भारत की सांस्कृतिक एकता और अखंडता कायम हुई थी। उन्होंने कहा कि ओंकारेश्वर, नर्मदा और आदि शंकराचार्य के महत्व को बताने वाला लाइट एंड साउंड शो कार्यक्रम प्रारंभ किया जायेगा। आदि शंकराचार्य जी की गुफा का संत समाज के मार्गदर्शन में पुनरुद्धार होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि संतों के सहयोग और मार्गदर्शन से काम करना भी सरकार का काम है। उन्होंने कहा कि ओंकारेश्वर में एक संग्रहालय और इंटरप्रिटेशन सेंटर की स्थापना भी की जायेगी। विष्णुपुरी, ब्रह्मपुरी और ममलेश्वर मंदिरों को जोड़ने वाला आकाश मार्ग स्थापित किया जायेगा। उन्होंने कहा कि ममलेश्वर मंदिर में सभी नागरिक सुविधाओं का इंतजाम किया जायेगा। देवसर मंदिर और चन्द्रमौली मंदिर का भी मूल स्वरूप में उद्धार किया जायेगा।
मुख्यमंत्री ने ओंकारेश्वर नगर पंचायत द्वारा तीर्थ-यात्रियों से लिये जाने वाले कर को समाप्त करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि नगर पंचायत को इससे होने वाली आय की भरपाई राज्य सरकार करेगी।
            मुख्यमंत्री ने कहा कि आदि शंकराचार्य के स्मरण प्रसंग पर आयोजित संगोष्ठी एक अदभुत अवसर है। यह आध्यात्मिक, धार्मिक और दर्शन का संगम है। उन्होंने कहा कि आदि शंकारचार्य के अद्वैत दर्शन के कारण सनातन धर्म अपने स्वरूप में विद्यमान है। उन्होंने नर्मदा सेवा यात्रा की चर्चा करते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में नदियों को जननी कहा गया है। नदियों का केवल भौगोलिक अस्तित्व नहीं है, वे आध्यात्मिक जीवन का अंग है।
श्री चौहान ने कहा कि अद्वैत दर्शन में सभी जीवों को ब्रह्म का रूप माना गया है। यही आत्मिक प्रसन्नता का स्त्रोत है।
            जूना अखाड़ा के प्रमुख महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद ने कहा कि आदि शंकराचार्य के दर्शन ने सभी प्रचलित कुरीतियों पर प्रहार किया। उन्होंने कहा कि संसाधनों के त्यागपूर्वक उपभोग की भारतीय संस्‍कृति रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान व्याकुलताएँ सिर्फ अज्ञानता के कारण हैं। यह जीवन के सत्य को अनावृत करने का दर्शन है।
       स्वामी अवधेशानंद गिरि ने मुख्यमंत्री श्री चौहान के नर्मदा नदी को प्रदूषणमुक्त करने के संकल्प की चर्चा करते हुए कहा कि सिंहस्थ भी उनके संकल्प से निर्विघ्न संपन्न हुआ था। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री चौहान राजा विक्रमादित्य, हर्षवर्धन और राजा भोज की तरह अपने राजधर्म का पालन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आदि शंकराचार्य की स्मृति में जो काम प्रदेश सरकार ने करने का संकल्प लिया है उससे दक्षिण और उत्तर के बीच संवाद सेतु का निर्माण होगा। इस काम में सारे सन्यांसी और संत समाज उनके साथ हैं। नर्मदा सेवा यात्रा को पूरे संत समाज का समर्थन है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में इस समय आध्यात्मिक वातावरण विद्यमान है। इससे न सिर्फ मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश के भाग्य का जागरण होगा। यदि संत समुदाय, समाज और सरकार मिल जाए तो बडे़ से बड़ा आंदोलन चला सकते हैं। मुख्यमंत्री के संकल्प का संत समाज स्वागत करता है। स्वामी अवधेशानंद ने संतों की प्रतिनिधि संस्था आचार्य सभा की सहमति से मुख्यमंत्री को रूद्राक्ष की माला भेंट की ताकि उनका संकल्प पूरा हो।
स्वामी जी ने आदि शंकराचार्य की प्रतिमा बनाने के लिये प्रत्येक घर से धातु के रूप में योगदान लेने का सुझाव दिया ताकि अद्वैत दर्शन का संदेश घर-घर पहुँच सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि आदि शंकराचार्य की प्रतिमा बनाने के लिये प्रत्येक घर से धातु संग्रह करने का अभियान नर्मदा सेवा यात्रा के साथ चलेगा।
            राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर सहकार्यवाह श्री सुरेश सोनी ने कहा कि भारत में भावनात्मक एकता सदा से विद्यमान है। उन्होंने कहा कि अनुभूति के बिना शब्द अर्थहीन होते हैं। उन्होंने कहा कि अद्वैत दर्शन को जीवन में अभिव्यक्त होना चाहिये। उन्होंने कहा कि बुराई को नहीं छोड़ने और अच्छाई को नहीं अपनाने के कारण समस्याएँ निरंतर बनी रहती हैं। श्री सोनी ने कहा कि अद्वैत दर्शन सारी समस्याओं का समाधान साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षक, शासक, माता, पिता और संत मिलकर आध्यात्म पर आधारित समाज का निर्माण कर सकते हैं।
चिन्मय मिशन के प्रमुख स्वामी श्री तेजोन्मयानंद ने कहा कि मिशन आदि शंकाराचार्य के दर्शन को लोगों के बीच प्रचार-प्रसार करने में राज्य सरकार को पूरी मदद करेगा। राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान के पूर्व कुलपति श्री कुटुम्ब शास्त्री ने कहा कि नर्मदा नदी का उल्लेख ऋगवेद में हुआ है। उन्होंने कहा कि आदि शंकराचार्य की गुफा का जीर्णोद्धार करने का संकल्प सराहनीय है।
            फिल्म निर्माता डॉ. चन्द्रप्रकाश द्विवेदी ने कहा कि संवादहीनता ही सबसे बड़ी समस्या है। उन्होंने आदि शंकराचार्य के जीवन-दर्शन को स्कूली पाठयक्रम में शामिल करने का स्वागत करते हुए कहा कि नई पीढ़ी को वेदांत दर्शन से परिचित करवाने का यह पहला कदम है। उन्होंने कहा कि संस्कृति की रक्षा करना साहित्य और कला का काम है। उपनिषदीय विरासत से नई पीढ़ी को परिचित करवाना वर्तमान पीढ़ी का दायित्व है।
साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि अद्वैत दर्शन ही विश्व को बचा सकता है। पृथ्वी के श्रंगार के लिये उसे शस्य श्यामला रखना, कन्याओं की रक्षा करने का संकल्प लेना और नदियों को पवित्र रखना धार्मिक महत्व का काम है। उन्होंने आग्रह किया कि रसायनयुक्त प्रतिमाओं को नदी में प्रवाहित न करें। जल प्रदूषित करने वाली सामग्री का उपयोग न करें।
            इस अवसर पर बड़ी संख्या में संत समाज के प्रतिनिधि, राम कृष्ण मिशन के संत स्वामी निर्विकारानंद, सांसद एवं भाजपा के अध्यक्ष श्री नंदकुमार सिंह चौहान, जिले के प्रभारी मंत्री श्री पारस जैन, संस्कार भारती के राष्ट्रीय संगठन सचिव श्री अमीर चंद एवं बडी संख्या में जन-प्रतिनिधि, भक्त और नर्मदा परिक्रमावासी उपस्थित थे।












ओंकारेश्वार की प्राचीन कला को बरकरार रख, अदभुत-भव्य मंदिर बनाया जायेगा
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मुख्यमंत्री श्री चौहान ने सपत्नीक ओंकारेश्वर में पूजन-अर्चन कर जलाभिषेक किया
इंदौर 9 फरवरी 2017
      मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को सपत्नीक प्रसिद्ध ओंकारेश्वर मंदिर में पूजा अर्चन व जलाभिषेक कर दर्शन किये। मुख्यमंत्री ने प्राचीन ओंकारेश्वर महादेव मंदिर की भौगोलिक स्थितियों को वहाँ के पंडितों, वास्तुकार और अधिकारियों से जाना।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने पूर्व में मंदिर का जीर्णोद्धार करने वाले श्री घनश्याम भाई सोमपुरा से जानकारी प्राप्त की। श्री चौहान ने कहा कि यह सर्वमान्य सत्य है कि नन्दी के सामने ही शिवालय हो। परमार काल के बाद ओंकारेश्वर महादेव मंदिर के कई बार जीर्णोद्धार कार्य किये गये हैं। प्राचीन ओंकारेश्वर महादेव मंदिर से जुड़े सभी तथ्यों को जानकर नवीन संकल्पना के आधार पर अदभुत मंदिर का निर्माण किया जायेगा। श्री चौहान ने वास्तुकार और उच्च अधिकारियों के साथ पूरे मंदिर के हर एक हिस्से में पहुँचकर वास्तविक स्थितियों का भी मूल्यांकन किया। इस दौरान संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव श्री मनोज श्रीवास्तव, वास्तुकार श्री नितिन श्रीमाली और मंदिर के पुजारी, संत-महात्मा उपस्थित थे।
विष्णुपुरी, ब्रम्हपुरी और ममलेश्वर के बीच आकाश मार्ग बनेगा
                मुख्यमंत्री श्री चौहान ने ओंकारेश्वर महादेव मंदिर से माँ नर्मदा नदी के दूसरे छोर पर बने मंदिरों के बारे में पंडितों से जानकारी प्राप्त की। श्री चौहान ने विष्णुपुरी, ब्रम्हपुरी और ममलेश्वर का इतिहास जानने के बाद आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए इन तीनों स्थानों के मध्य आकाश मार्ग बनाने की योजना बनाने के निर्देश दिये। इससे श्रद्धालुओं को अलौकिकता का एहसास होगा।
ओंकार पर्वत सघन वनमय होगा
                मुख्यमंत्री श्री चौहान ने ओंकार महादेव मंदिर के प्राचीन वैभव व वास्तुकला को देखकर नयी रूपरेखा तैयार करने के निर्देश दिये। उन्होंने पूरे ओंकार पर्वत को सघन वन से आच्छादित करने को कहा। श्री चौहान ने कहा कि एक ही दिन में पूरी पहाड़ी पर पौधारोपण करने की तैयारी आज से ही शुरू की जाये। बताया गया कि पहाड़ी पर पौधारोपण के लिये 25 हजार पौधे तैयार कर लिये गये हैं। पौधारोपण के लिये छायादार और शीघ्र ही पनपने वाले पौधों का चयन किया गया है।
आदि शंकराचार्य गुफा चित्रमयी होगी

                श्री चौहान ने आदि शंकराचार्य की गुफा में पूजन-अर्चन भी किया। उन्होंने प्रमुख सचिव संस्कृति श्री मनोज श्रीवास्तव से कहा कि गुफा के हिस्से में शंकराचार्य के जीवन और उनके जीवन मूल्यों पर आधारित चित्र उकरने का काम किया जाये। गुफा के अलावा किसी अन्य स्थान पर भी शंकर संग्रहालय बनाने की संकल्पना तैयार करें। श्री चौहान ने कहा कि गुफा के मूल स्तंभ जैसे हैं, वैसे ही रहें और इन पत्थरों को जोड़कर सोन लोहा से सोमनाथ मंदिर की तर्ज पर निर्माण काम करने के निर्देश दिये।


मुख्यमंत्री श्री चौहान ने आज ओंकारेश्वर में ज्योर्तिलिंग के दर्शन किये
 इंदौर 09 फरवरी2017
      मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज ओंकारेश्वर में भगवान ज्योर्तिलिंग के सपत्नीक दर्शन किये। उन्होंने प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने ओंकारेश्वर में नर्मदा नदी के पावन तट पर स्थित आदि शंकराचार्य की प्राचीन गुफा के भी दर्शन किये। श्री चौहान ने वृक्षारोपण किया तथा साधु-संतों से भेंट की। इस मौके पर श्रीमती साधना सिंह चौहान भी मौजूद थी। मुख्यमंत्री ओंकारेश्वर नर्मदा सेवा यात्रा एवं आदि शंकराचार्य के स्मरण प्रसंग पर
आयोजित संगोष्ठी में शामिल हो रहे हैं।
"नमामि देवि नर्मदे" -सेवा यात्रा
माँ नर्मदा का "नाद'' खत्म नहीं होने दें
खंडवा जिले के तीन गाँव में जन-संवाद में तकनीकी शिक्षा राज्यमंत्री श्री जोशी
इंदौर 9 फरवरी, 2017
      माँ नर्मदा का "नाद'' यानि कल-कल आवाज़ कम होगी तो तटीय इलाकों के ही नहीं  कई शहरों के लोगों का भी जीवन संकट में आ जाएगा। इसलिये सभी लोग मिलकर प्रयास करें कि नदी का "नाद'' बरकरार रहे । तकनीकी शिक्षा मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), श्रम एवं स्कूल राज्यमंत्री श्री दीपक जोशी ने "नमामि देवि नर्मदे''- सेवा यात्रा के खंडवा जिले में ग्राम खगबाड़ा, अजरूट, चितमौर और कोटी में जन-संवाद में कही। यात्रा का ग्रामीणों ने भावभीना स्वागत किया।
      संवाद में श्री जोशी ने कहा कि माँ नर्मदा को प्रदूषणमुक्त करने के लिये हरसंभव प्रयास करने होंगे । उन्होंने माँ नर्मदा के दोनों तट पर पौधे लगाने की भी अपील की।
राज्य मंत्री श्री जोशी ने कहा कि नर्मदा के अमृत कलश की मर्यादा बनाए रखें। सभी गाँव में नर्मदा तट पर पौध रोपण करने, स्वच्छता, रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों का उपयोग नहीं करने, जैविक खेती अपनाने, बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ, नशामुक्ति और नर्मदा की निर्मलता बनाए रखने के लिये हरसंभव प्रयास कर इसके लिये दूसरों को प्रेरित करने का संकल्प दिलवाया गया।