Tuesday, 17 April 2018

सफलता की कहानी
मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना ने किसानों की खुशियां की दोगुनी
मांगीलाल गेहराजी को मिला पौत्र की शादी का उपहार
जगदीश सोनगरा उत्पादन बढ़ाने में करेंगे राशि का उपयोग
इंदौर 17 अप्रैल 2018
     राज्य शासन द्वारा मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान की पहल पर लागू की गयी मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना का इंदौर जिले में प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। यह योजना किसानों के लिये अपार खुशियां लायी है। जिले के किसान मांगीलाल गेहराजी, जगदीश सोनगरा हो या पप्पू पटेल सहित हजारों किसान ऐसे है, जिन्हें प्रोत्साहन राशि मिलने से बेहद खुशी मिली है।
     हॉल ही में राज्य शासन द्वारा लागू की गई मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के तहत इंदौर जिले में 13 हजार 302 किसानों को जिन्होंने गत रबी में समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचा था, उन्हें 200 प्रति क्विंटल के मान से 28 करोड़ रूपये से अधिक की राशि प्रोत्साहन स्वरूप दी गयी है। यह राशि उनके बैंक खाते में जमा करायी जा रही है। इन्हीं लाभान्वित किसानों में से एक है जिले के महू तहसील के ग्राम सातेर में रहने वाले मांगीलाल गेहराजी। प्रोत्साहन राशि मिलने से वे बेहद खुश है। उनके घर में शादी की तैयारियां चल रही है। उनके बड़े पौत्र धीरज सिंह की 19 अप्रैल को शादी है। ऐसे वक्त में प्रोत्साहन राशि मिलने से उनकी खुशियां दोगुनी हो गयी है। मुख्यमंत्रीजी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उनका कहना है कि लगता है मामा श्री शिवराजसिंह चौहान ने अपने भांजे धीरज सिंह को प्रोत्साहन की राशि उपहार स्वरूप दी है।
     इसी तरह की खुशिया जिले के देपालपुर तहसील के ग्राम छड़ोदा और इंदौर तहसील के ग्राम बेगमखेड़ी में रहने वाले पप्पू पटेल ने भी व्यक्त की है। उक्त दोनों  किसानों के विचार लगभग एक जैसे है। इनका कहना है कि प्रोत्साहन राशि मिलने से हमें खेती में बेहद लाभ होगा। प्रोत्साहन राशि का उपयोग हम अपने खेती व्यवसाय को उन्नत बनाने में करेंगे। राशि का उपयोग खाद, बीज सहित अन्य कृषि आदानों को खरीदने में करेंगे। अच्छे खाद-बीज खरीदेंगे तो हमें अच्छा उत्पादन और बेहतर उत्पादकता मिलेगी। इससे हमारी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। उन्होंने अन्य कृषकों से भी इस योजना का लाभ लेकर खेती व्यवसाय को आगे बढ़ाने की अपील की है। मांगीलालजी गेहराजी को 18 हजार रूपये, जगदीश सोनगरा को एक लाख रूपये तथा पप्पू पटेल को 9 हजार 900 रूपये की प्रोत्साहन राशि मिली है।
     ज्ञात रहे कि राज्य शासन द्वारा हाल ही में मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना लागू की गयी है। इस योजना में गत रबी में गेहूं की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर प्राथमिक साख सहकारी समितियों के माध्यम से ईउपार्जित मात्रा पर 200 रूपये प्रति क्विंटल की दर से प्रोत्साहन राशि संबंधित किसान के बैंक खाते में जमा करायी गयी है।
सफलता की कहानी
सुभाष ने बागवानी के जरिये बनाया खेती को लाभ का धंधा
सुभाष ने दी किसानों को मिश्रित खेती की सलाह
इंदौर 17 अप्रैल 2018
     इंदौर जिले के तहसील साँवेर ग्राम बसान्द्रा निवासी सुभाषचन्द्र राठौर वर्षो से परंपरागत खेती करते आ रहे थे। परंपरागत खेती से उन्हें बहुत कम लाभ हो रहा था। एक दिन उनकी मुलाकात उद्यान विकास अधिकारी विकासखण्ड साँवेर से हुई। उद्यान विकास अधिकारी ने उन्हें अमरूद की खेती करने की सलाह दी और उसे समझाया कि अमरूद की खेती से उसे कम से कम एक लाख रूपये सलाना अतिरिक्त आय होगी। सुभाष ने अमरूद की खेती करने की ठान ली। उसने डेढ़ हेक्टेयर खेत में अमरूद के 15 हजार पौधे लागये।  उसने आधुनिक तकनीक अपनाते हुये ट्रैक्टर से जुताई की और ड्रिप से सिंचाई की। उसके खेत में अमरूद के सभी पौधे आज भी जीवित हैं। उसके खेत में हर साल लगभग 300 क्विंटल अमरूद पैदा होता है। 5 रूपये प्रति किलो की दर से बेचने पर सारा खर्च काट कर उसे लगभग एक लाख रूपये प्रति वर्ष आय हो रही है।  इन बगीचों के रख-रखाव पर लगभग 50 हजार रूपये सालाना खर्च करना पड़ते हैं।
     चर्चा के दौरान प्रगतिशील किसान श्री सुभाषचन्द्र राठौर ने बताया कि उसने अपने खेत पर डेढ़ हेक्टेयर में इलाहाबादी सफेदा अमरूद का रोपण किया है। अमरूद के साथ मिश्रित खेती करते हुए मटर और बैगन भी लगाया है। मटर और बैगन से लगभग 50 हजार रूपये की आय हो जाती है। मटर और बैगन से सालाना लगभग 20 हजार रूपये शुद्ध लाभ प्राप्त हो जाता है। उसने अन्य किसानों को की मिश्रित खेती करने की सलाह दी है, जिससे खेती को लाभ का धन्धा बनाया जा सके।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खरगोन के भीकनगाँव में असंगठित श्रमिक कल्याण योजना का शुभारंभ कर विभिन्न शासकीय योजनाओं का हितग्राहियों को हितलाभ सौंपा।

"मेरी ज़िंदगी का सबसे खास दिन है आज। आज का दिन गरीब मजदूर और श्रमिकों के लिए स्वर्णिम दिन है। मेरे भाइयों आप मजदूर ज़रूर हैं, लेकिन आपको मजबूर नहीं होने देंगे। प्रदेश का विकास हो और सभी को आगे बढ़ने का अवसर मिले, लेकिन मेरे श्रमिक पीछे नहीं छूट जाना चाहिए, उसे भी आगे बढ़ने का पूरा अवसर हम दे रहे हैं। पंजीकृत असंगठित श्रमिकों को सभी योजनाओं का लाभ मिलेगा। सभी को मकान दिए जायेंगे और उसमें बिजली का कनेक्शन मुफ्त में दिया जाएगा। बिजली का फ़्लैट बिल 200 रुपए प्रति माह के हिसाब से आएगा। साथ ही उज्ज्वला योजना के साथ गैस कनेक्शन भी दिया जाएगा। गर्भवती श्रमिक बहनों को 6 से 9 माह की अवधि में 4,000 और प्रसव के बाद 12,000 रुपए देंगे, जिससे पौष्टिक भोजन से सेहत सुधर सके। गर्भावस्था के दौरान योजना का लाभ लेने हेतु सिर्फ सरकारी अस्पताल में जाँच करानी होगी। मैं कहना चाहता हूँ कि महिलाएँ सरकारी अस्पताल में ही प्रसव कराएँ। शासकीय अस्पताल में इलाज की व्यवस्था तो है ही, लेकिन श्रमिक के गंभीर बीमारी से ग्रसित होने पर जरूरत पड़ी तो प्रदेश या देश में कहीं भी पीड़ित श्रमिक का नि:शुल्क इलाज कराया जाएगा। 5 लाख रुपये तक का इलाज नि:शुल्क कराया जाएगा। अगर गरीब का किसी कारण हाथ-पैर खराब हो जाये, तो रु. 2 लाख दिये जायेंगे और अस्थायी अपंगता हो तो रु. 1 लाख और भगवान न करे कि 60 साल से कम उम्र में मृत्यु हो जाये तो रु. 2 लाख एवं दुर्घटना में मृत्यु होने पर 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जायेगी।":मुख्यमंत्री
बैंक खाता व मोबाइल नंबर को आधार से लिंक कराने पर
 मिलेगा योजनाओं का लाभ
इंदौर 17 अप्रैल 2018
    सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग श्रीमती मोहिनी श्रीवास्तव ने बताया कि आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुसार अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितग्राहियों हेतु नवीन विभागीय पोर्टल प्रारंभ किया गया है।
    उक्त पोर्टल पर योजनाओं के लाभ हेतु हितग्राहियों के पास निम्न दस्तावेज होना जरूरी हैं। समस्त हितग्राहियों के जाति प्रमाण अनुविभागीय अधिकारी द्वारा जारी डिजिटल प्रारूप में ही मान्य होगें। समस्त हितग्राहियों की आधार जानकारी अद्यतन होना अनिवार्य हैं तथा हितग्राही का सही नाम, पूर्ण जन्म दिनांक, वर्तमान का सही पता, मोबाइल नंबर की जानकारी अद्यतित हो। साथ ही समस्त विद्यार्थियो को बैंक खाता तथा मोबाइल नंबर आधार से लिंक होना अनिवार्य हैं। विद्यार्थियों द्वारा स्वयं का मोबाइल नंबर ही आधार से जुड़ा होना चाहिए। समस्त हितग्राहियों के पास समग्र आईडी उपलब्ध हो तथा हितग्राही के समग्र डाटा में हितग्राही का सही नाम, परिवार मुखिया से संबंध, लिंग, पूर्ण जन्म दिनांक, जाति-उपजाति, विकलांगता स्थिति, माता-पिता का नाम, माता-पिता का व्यवसाय, बीपीएल स्थिति एवं विद्यार्थियों की शैक्षिक जानकारी अद्यतन हो, साथ ही समग्र डाटा अद्यतन भी जरूरी हैं। समग्र पोर्टल/आईडी में आधार नंबर दर्ज करना अनिवार्य हैं। सभी जानकारियों या दस्तावेजों के अभाव में हितग्राहियों को विभागीय योजनाओं का लाभ प्राप्त नहीं हो सकेगा।
सामूहिक विवाह आयोजन के पूर्व अनुमति लेना होगा
इंदौर 17 अप्रैल 2018
    जिले में सामूहिक विवाह आयोजन के पूर्व सभी आयोजकों को अपने क्षेत्र के अनुविभागीय अधिकारी राजस्व से अनुमति लेना होगी। अनुमति प्राप्त करने के पश्चात ही सामूहिक विवाह का आयोजन किया जाये। संभागीय संयुक्त संचालक एकीकृत बाल विकास सेवा इंदौर  श्री राजेश मेहरा ने बताया कि अक्षय तृतीया पर आयोजित होने वाले सामूहिक विवाह में बाल विवाह होने की संभावना अधिक होती है। सामूहिक विवाह समारोह में बाल विवाह को रोकने के लिए शासन द्वारा निर्देश जारी किये गये है कि सामूहिक विवाह के आयोजकों को आयोजन की अनुमति क्षेत्र के अनुविभागीय अधिकारी से लेना होगी। अनुविभागीय दण्डाधिकारी द्वारा आयोजन की अनुमति इसी शर्त पर दी जायेगी कि उक्त आयोजन में वर की आयु 21 वर्ष एवं वधू की आयु 18 वर्ष से कम न हो। आयोजकों को वर-वधू की सूची मय फोटो एवं आयु प्रमाण पत्रों के प्रस्तुत करनी होगी। इसके अभाव में सामूहिक विवाह आयोजन करने की अनुमति अनुविभागीय दण्डाधिकारी नहीं दे सकेंगे।
    श्री मेहरा ने बताया कि अक्षय तृतीय के अवसर एवं आगामी मुहुर्त में बाल विवाह को रोकने हेतु सभी अनुविभागीय अधिकारी राजस्व द्वारा अपने-अपने क्षेत्र में उड़नदस्तों का गठन किया गया है। इस दल में विभिन्न विभागों के अधिकारियों को शामिल किया गया है। ये उड़नदस्ते विवाह स्थलों का भ्रमण कर वर-वधु की आयु की परीक्षण कर आवश्यक कार्यवाही करेंगे।
    उड़नदस्ता दलों द्वारा उनके क्षेत्राधिकार में यदि कोई बाल विवाह होना पाया जाता है, तो विवाह में सेवा देने वाले सभी प्रकार के सेवा प्रदाताओं एवं विवाह संपन्न कराने वालों के विरूद्ध  बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत वैधानिक कार्यवाही की जायेगी।
22 अप्रैल को लोक अदालत में विद्युत विभाग द्वारा
उपभोक्ताओं को मिलेगी भारी छूट
इंदौर 17 अप्रैल 2018
    मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशानुसार प्रदेश के संपूर्ण न्यायालयों में वर्ष-2018 की द्वितीय नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा हैं। इसी तारत्मय में श्री राजीव कुमार श्रीवास्तव, जिला एवं सत्र न्यायाधीश के मार्गदर्शन में जिला इंदौर में आगामी 22 अप्रैल 2018 को नेशनल लोक अदालत का आयेाजन किया जायेगा।
    उक्त नेशनल लोक अदालत में विद्युत अधिनियम, 2003 के अंतर्गत आने वाले प्रकरणों का अधिक से अधिक निराकरण हो सके इस हेतु मध्यप्रदेश शासन ऊर्जा विभाग, भोपाल द्वारा न्यायालयों में लंबित मामलों एवं प्रीलिटिगेशन प्रकरणों में छूट प्रदान की गई हैं।
विद्युत विभाग द्वारा उपभोक्ताओं को दी जाने वाली छूट
नेशनल लोक अदालत में लंबित प्रकरणों में निम्नदाब श्रेणी के उपभोक्तागण को छूट दी जा रही हैं। समस्त घरेलू उपभोक्तागण, समस्त कृषि उपभोक्तागण, 05 किलोवाट तक गैस घरेलू उपभोक्तागण, 10 अश्वशक्ति भार तक के औद्योगिक उपभोक्तागण पर छूट दी जायेगी।
    इसीप्रकर प्रीलिटिगेशन स्तर पर विद्युत कंपनी द्वारा आंकलित सिविल दायित्व की राशि पर 40 प्रतिशत और लंबित प्रकरणों पर विद्युत कंपनी द्वारा आंकलित सिविल दायित्व की राशि पर 25 प्रतिशत छूट दी जायेगी।
    उपरोक्त प्रीलिटिगेशन एवं लंबित प्रकरणों की आंकलित राशि के भुगतान में चूक की दशा में, जो आदेश तिथि से 30 दिवस पश्चात प्रत्येक छ: माही चक्रवृद्धि ब्याज 16 प्रतिशत प्रतिवर्ष वार्षिक की दर से ब्याज की दर से ब्याज वसूल योग्य होता हैं, उस ब्याज की राशि पर 100 प्रतिशत की छूट दी जायेगी।
    उपरोक्त छूट के संबंध में एक मात्र शर्त यह है कि उपभोक्ता को निर्धारित छूट के उपरांत शेष देय आंकलित सिविल दायित्व एवं ब्याज की राशि का एकमुश्त भुगतान करना होगा। साथ ही अपराध शमन फीस अधिनियम के प्रावधान अनुसार वसूल की जायेगी।
    जिला विधिक सहायता अधिकारी ने समस्त पक्षेकारों से अपील की है कि वे अपने मामलों को लोक अदालत के माध्यम से निपटाकर लोक अदालत योजना का लाभ उठायें।


कौशल्या योजना
1. योजना का उद्देश्य एवं लक्ष्य-
प्रस्तावित योजना के निम्न उद्देश्य हैं-
  • रोजगार अथवा स्व-रोजगार प्राप्त करने के लिए महिलाओं को आवश्यक कौशल प्रदाय।
  • महिलाओं के रोजगार अवसर में वृद्धि करना।
  • प्रशिक्षण उपरांत पारिश्रमिक स्तर में वृद्धि हासिल करना।
वर्ष 2017-18 से प्रतिवर्ष 2.00 लाख महिलाओं को प्रशिक्षित किया जायेगा।
2. लक्ष्य समूह :
  • औपचारिक शिक्षा प्रणाली को छोड़ी हुई महिलाऐं।
  • ऐसी महिलाऐं जो अपना कौशल विकसित कर रोजगार/स्व-रोजगार चाहती हैं।
  • ऐसी महिलाऐं जो अपने कौशल को बढ़ाना चाहती हैं।
  • ऐसी कामगार महिलाऐं जो अपने अनौपचारिक कौशल का प्रमाणीकरण चाहती हैं।
  • नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्रों की महिलाओं को आवासीय प्रशिक्षण।
3. प्रशिक्षण के लिए सेक्टर्स -
परिधान एवं गृह सज्जा, ऑटोमोबाइल्स, सौंदर्य प्रसाधन, केपिटल गुडस, निर्माण कार्य, घरेलू काम-काज, इलेक्ट्रानिक्स एण्ड हार्डवेयर, फूड प्रोसेसिंग, हेल्थकेयर, रिटेल, आईटी, सुरक्षा, टेलीकॉम, टूरिज्म एण्ड हॉसपिटेलिटी एवं वित्त सेवाएं।
4. प्रशिक्षण संस्थाओं/पाठ्यक्रमों/लक्ष्यों का निर्धारण
नेशनल स्किल क्वालीफिकेशन फ्रेमवर्क (एनएसक्यूएफ) के तहत कौशल दक्षता के स्तर निर्धारित किये गये हैं। इस योजना के तहत इन पाठ्यक्रमों को संचालित किया जाना प्रस्तावित है। ऐसे कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम भी किये जायेगें, जिनके लिये रोजगार प्रदायकर्ता सुनिश्चित रोजगार देने के लिये अनुबंध करेंगे। निजी क्षेत्र के प्रशिक्षण प्रदायकर्ता संस्थानों का चयन एवं लक्ष्य निर्धारण आरएफपी जारी कर साधिकार समिति द्वारा किया जायेगा।


कौशल्या योजना



1. योजना का उद्देश्य एवं लक्ष्य-
प्रस्तावित योजना के निम्न उद्देश्य हैं-
  • रोजगार अथवा स्व-रोजगार प्राप्त करने के लिए महिलाओं को आवश्यक कौशल प्रदाय।
  • महिलाओं के रोजगार अवसर में वृद्धि करना।
  • प्रशिक्षण उपरांत पारिश्रमिक स्तर में वृद्धि हासिल करना।
वर्ष 2017-18 से प्रतिवर्ष 2.00 लाख महिलाओं को प्रशिक्षित किया जायेगा।
2. लक्ष्य समूह :
  • औपचारिक शिक्षा प्रणाली को छोड़ी हुई महिलाऐं।
  • ऐसी महिलाऐं जो अपना कौशल विकसित कर रोजगार/स्व-रोजगार चाहती हैं।
  • ऐसी महिलाऐं जो अपने कौशल को बढ़ाना चाहती हैं।
  • ऐसी कामगार महिलाऐं जो अपने अनौपचारिक कौशल का प्रमाणीकरण चाहती हैं।
  • नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्रों की महिलाओं को आवासीय प्रशिक्षण।
3. प्रशिक्षण के लिए सेक्टर्स -
परिधान एवं गृह सज्जा, ऑटोमोबाइल्स, सौंदर्य प्रसाधन, केपिटल गुडस, निर्माण कार्य, घरेलू काम-काज, इलेक्ट्रानिक्स एण्ड हार्डवेयर, फूड प्रोसेसिंग, हेल्थकेयर, रिटेल, आईटी, सुरक्षा, टेलीकॉम, टूरिज्म एण्ड हॉसपिटेलिटी एवं वित्त सेवाएं।
4. प्रशिक्षण संस्थाओं/पाठ्यक्रमों/लक्ष्यों का निर्धारण

नेशनल स्किल क्वालीफिकेशन फ्रेमवर्क (एनएसक्यूएफ) के तहत कौशल दक्षता के स्तर निर्धारित किये गये हैं। इस योजना के तहत इन पाठ्यक्रमों को संचालित किया जाना प्रस्तावित है। ऐसे कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम भी किये जायेगें, जिनके लिये रोजगार प्रदायकर्ता सुनिश्चित रोजगार देने के लिये अनुबंध करेंगे। निजी क्षेत्र के प्रशिक्षण प्रदायकर्ता संस्थानों का चयन एवं लक्ष्य निर्धारण आरएफपी जारी कर साधिकार समिति द्वारा किया जायेगा।