Friday, 17 February 2017






पवित्र नदियों के शुद्धिकरण के लिये जागरूकता आवश्यक
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नर्मदा को प्रदूषण से मुक्त कराना जरूरी -- पर्यावरणविद् डॉ.शर्मा
इंदौर 17 फरवरी, 2017
राज्य शासन द्वारा नमामि देवि नर्मदे अभियान के तहत विशेष आमंत्रित विद्वान और अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरणविद् डॉ.सुबोध कुमार शर्मा (नेपाल) ने आज रेसीडेंसी सभाकक्ष में पत्रकारों से चर्चा करते हुये बताया कि हमारे देश में पवित्र नदियों को शुद्ध करने के लिये दृढ़ इच्छाशक्ति जरूरी है। पवित्र नदी जिन्हें हम माता और देवी के रूप में पूजते हैं, उसमें शहरों का गन्दा पानी मिला रहे हैं। यह पानी भूमि और वायु दोनों तरह का प्रदूषण पैदा कर रहा है। या तो हम नदियों की पूजा करना छोड़ दें या फिर उन्हें प्रदूषित करना बंद कर दें। बढ़ती हुई आबादी और बढ़ता हुआ शहरीकरण ही नदियों को प्रदूषण के लिये पूरी तरह जिम्मेदार है। उन्होंने पत्रकारों से चर्चा करते हुये कहा कि एशियाई देशों में बढ़ती हुई आबादी के कारण छोटी-मोटी नदियों का अस्तित्व समाप्त हो गया है,उसमें इंदौर की खान नदी भी शामिल है। हम शहरी लोग अपने निहित स्वार्थ के खातिर नदियों को गंदे नाले के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन का संबंधी सीधा मनुष्य के अस्तित्व से संबंधित है। मनुष्य के अस्तित्व को बनाये रखने के लिये भूमि,जल और वायु प्रदूषण को रोकना होगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में धरती का तापक्रम बढ़ेगा जिसके कारण गंगा सदृश बर्फ पोषित नदियों में पानी बढ़ेगा मगर झरना पोषित नर्मदा जैसी नदियों में जल स्तर घटेगा। उन्होंने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण और धरती के बढ़ते तापमान के कारण वर्षा अनियमित होगी। पहाड़ों पर वर्षा ज्यादा होगी और मैदानों पर कम होगी। पहाड़ी क्षेत्रों के लोग बाढ़ और भू-स्खलन के कारण मैदानी इलाकों में पलायन करने लगे हैं।
उन्होंने कहा कि नर्मदा जैसी पवित्र नदियों से प्रदूषण से मुक्त करने के लिये दोनों किनारों पर सघन वृक्षारोपण जरूरी है। इसके अलावा नर्मदा नदी और उसकी सहायक नदियों के किनारे पर बसे नगर अपना कचरा नदियों में छोड़ने के बजाय सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाकर उसे शुद्ध करें और उस पानी का सिंचाई में इस्तेमाल करें। नदियों के प्रदूषण से जीव-जंतु भी मर रहे हैं। जीव-जंतुओं के अस्तित्व के लिये नर्मदा नदी में रेत उत्खनन के लिये रोक लगाना जरूरी है। बढ़ती हुई आबादी को देखते हुये मैदानी इलाकों में छोटी-छोटी नदियों पर छोटे-छोटे बांध बनाने की जरूरत है। नदियों का पानी रेत और मछली से शुद्ध होता है। मछली कीड़े-मकोड़ों को खाती है और रेत भी पानी शुद्धिकरण का काम करता है। उन्होंने कहा कि सभी सरकारों को निश्चित रूप से नदियों को प्रदूषण से बचाना होगा। पिछले 30 साल में शोध के बाद यह निष्कर्ष निकला है कि धरती का तापमान 0.6 प्रतिशत बढ़ा है, जिसके कारण जल और धरती के लगभग 10 प्रतिशत जीव समाप्त हो चुके हैं। पर्यावरण शुद्ध के लिये जीव जंतुओं का अस्तित्व बनाये रखना जरूरी है। इसके अलावा लोगों को मंसाहारी होने के बजाय शाकाहारी होना जरूरी है। 
एक प्रश्न के उत्तर में ""अलनीनो'' की व्याख्या करते हुये कहा कि समुद्र का पानी गर्म होकर भाप बनता है और वह भाप बादल बनकर मैदानी इलाकों में वर्षा करती है। मगर बढ़ती हुई आबादी और बिगड़ते हुये पर्यावरण के कारण धरती का वातावरण गर्म होता जा रहा है, जिसके कारण भारी वर्षा, बाढ़ और अनियमित वर्षा की स्थिति निर्मित हो गयी है। समुद्र का पानी समुद्र में ही बरस रहा है। संतुलित वर्षा के लिये आबादी और जंगल का अनुपात ठीक होना जरूरी है। वृक्षारोपण के लिये सरकारों द्वारा जनजागरूकता अभियान चलाना जरूरी है। 
/सिंह/कपूर

सरकारी खर्च पर वृद्धों को करायी जायेगी रामेश्वरम् यात्रा
आवेदन की अंतिम तिथि 25 फरवरी
इंदौर 17 फरवरी, 2017
राज्य शासन के निर्देशानुसार 60 वर्ष से अधिक वृद्धों को शासकीय खर्च पर मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के तहत रामेश्वरम् की यात्रा करायी जायेगी। यह यात्रा इंदौर से देवास, सीहोर, बुधनी होते हुये रामेश्वरम पहुंचेगी। यात्रा 16 मार्च से शुरू होगी और 21 मार्च को खत्म होगी। इस यात्रा में 387 यात्री शामिल होंगे। इस यात्रा हेतु आवेदन की अंतिम तिथि 25 फरवरी, 2017 है। इस यात्रा हेतु आवेदन-पत्र कलेक्ट्रेट तथा जिले के सभी तहसील कार्यालयों से प्राप्त किये जा सकते हैं। इस धार्मिक यात्रा पर जाने वाले व्यक्ति आयकर दाता नहीं होना चाहिये, मध्यप्रदेश का मूल निवासी होना चाहिये। 60 वर्ष से अधिक आयु का होना चाहिये तथा पूर्व में इस योजना के तहत यात्रा न की हो और शरीरिक और मानसिक रूप से पूर्ण रूप से स्वस्थ्य होना चाहिये। तीर्थ यात्री को आवेदन करते समय पासपोर्ट साइज के दो फोटो, निवास साक्ष्य के रूप में राशन कार्ड, ड्रायविंग लायसेंस, मतदाता पहचान -पत्र आदि स्वीकार किये जायेंगे और लिफाफे पर ""मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना वर्ष 2017'' अंकित किया जाना चाहिये।
65 वर्ष से अधिक आयु के ऐसे व्यक्ति, जिसने अकेले यात्रा करने हेतु आवेदन किया है, को अपने साथ एक सहायक, जिसकी आयु 18 वर्ष से 50 वर्ष के बीच हो, को यात्रा पर जाने की पात्रता होगी। इसी प्रकार यदि आवेदक पति या पत्नी में से किसी एक का नाम चुना जाता है तो उसका जीवन साथी भी यात्रा पर जा सकेगा। आवेदक के जीवनसाथी की आयु 60 वर्ष से कम हो तब भी यात्रा कर सकेगा या कर सकेगी। आवेदन करते समय ही आवेदक को यह बताना होगा कि उसका जीवन साथ ही उसके साथ यात्रा करने का इच्छुक है। ऐसी स्थिति में उक्त जीवन साथी का आवेदन भी आवेदक के साथ ही संलग्न करना होगा। यदि सहायक को यात्रा पर साथ ले जाने की पात्रता है कि उस सहायक का आवेदन भी आवेदक के साथ जमा किया जायेगा।
सिंह/कपूर
कृषि मंत्री श्री गौरीशंकर बिसेन आज इंदौर में
इंदौर 17 फरवरी, 2017
प्रदेश के किसान कल्याण तथा कृषि विकास मंत्री श्री गौरीशंकर बिसेन आज इंदौर आयेंगे। वे यहां इस दिन आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगे।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार श्री गौरीशंकर बिसेन आज 18 फरवरी को सुबह सवा 9 बजे इंदौर आयेंगे। वे यहां सुबह साढ़े 10 बजे लक्ष्मीबाई नगर स्थित कृषि उपज मण्डी को निरीक्षण करेंगे। वे साढ़े 11 बजे मण्डी सभागृह में आयोजित इंदौर संभाग की कृषि उपज मण्डी समितियों की आय एवं निर्मण कार्यों की समीक्षा बैठक में शामिल होंगे। इसके बाद वे दोपहर डेढ़ बजे नंदबाग, टिगरिया बादशाह रोड़ स्थित चेतन्यधाम आश्रम जायेंगे, दोपहर तीन बजे कृषि महाविद्यालय इंदौर के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में इंदौर संभाग के कृषि अधिकारियों से निर्माणाधीन मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला, कृषि विज्ञान केन्द्र, अनुसंधान विस्तार कार्य, रबी फसल, प्रधानमंत्री सिंचाई योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के संबंध में चर्चा करेंगे। इसके बाद वे एक अन्य स्थानीय कार्यक्रम में शामिल होने के बाद इसी दिन शाम पौने 7 बजे इंदौर से नागपुर के लिये प्रस्थान करेंगे।
सिंह/कपूर