रानीपुरा क्षे़त्र में आग की घटना के लिये
दिलीप फटाका हाउस के संचालक गुरेन्द्र सिंह दोषी
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स्थानीय पुलिस एवं कार्यपालिक मजिस्ट्रेट भी दोषी
इंदौर 23 मई, 2017
इंदौर शहर के रानीपुरा में गत 18 अप्रैल, 2017 को दुकानों में लगी आग की घटना की कलेक्टर श्री पी.नरहरि के आदेशानुसार की गयी मजिस्ट्रीयल जांच का प्रतिवेदन प्राप्त हो गया है। प्रतिवेदन में घटना का प्रारंभिक कारण फटाकों के अवैध संग्रहण, भण्डारण एवं संबंधित क्षेत्र के पुलिस एवं कार्यपालिक मजिस्ट्रेट की लापरवाही सामने आयी है। घटना के लिये दिलीप फटाका हाउस के संचालक गुरेन्द्र सिंह एवं स्थानीय पुलिस एवं कार्यपालिक मजिस्ट्रेट को प्रारंभिक रूप से दोषी पाया गया। प्रतिवेदन में भविष्य में घटना की पुर्नवृत्ति रोकने के लिये जीरो टोलरेंस की नीति रखने सहित अन्य महत्वपूर्ण दिये गये हैं।
घटना की सूचना मिलने पर पुलिस फायर स्टेशन द्वारा आग को नियंत्रित करने के लिए त्वरित कार्यवाही की गई। घटना स्थल संकीर्ण होने तथा आस-पास भी ज्वलनशील सामग्री की दुकान होने से आग ने विकराल रूप ले लिया एवं उपकी चपेट में 7 दुकाने आ गई।
घटना में मृत सभी व्यक्तियों की मृृत्यु पी.एम. रिपोर्ट अनुसार कार्डियो रेस्पायरेट्री फेलुअर (Cardio respiratory failure as a result of ante-mortem burn and its complications) के कारण हुई है, जो कि जलने के परिणाम स्वरूप है। उप मुख्य विस्फोटक नियंत्रक कार्यालय, भोपाल के अधिकारी श्री राजेन्द्र रावत एवं श्री तेजवीर सिंह द्वारा भी घटना स्थल का दौरा 20 अप्रैल 17 को किया गया तथा प्रारंभिक रिपोर्ट दी है।
झाबुआ जिले के पेटलावद में विस्फोटक सामग्री से हुए विस्फोट के कारण भारी जनहानि के दृष्टिगत जिला दण्डाधिकारी, इन्दौर के आदेशानुसार 18 सितंबर 2015 को लोक शांति एवं सुरक्षा बनाये रखने की दृृष्टि से कलेक्टर कार्यालय द्वारा जारी समस्त अनुज्ञा पत्र एवं विस्फोटक नियंत्रक द्वारा जारी लायसेंस निरस्त (अनापंिंंत्त प्रमाण पत्र) किये गये। इसमें दिलीप पटाखा हाउस का लायसेंस भी निरस्त किया गया था।
गत वर्ष दीपावली के दौरान प्रशासनिक एवं पुलिस के अमले के द्वारा सघन चेकिंग की गई तब कोई भी पटाखा सामग्री दुकानों पर नहीं पायी गई थी। कलेक्टर, इन्दौर के पत्र दिनांक 04 अक्टूबर 2016 एवं 26 अक्टूबर 2016 के द्वारा अनुविभागीय दण्डाधिकारी@नगर पुलिस अधीक्षक को शासन के नवीन निर्देशों का कडाई से पालन करने के संबंध में निर्देश भी दिये गये थे। कलेक्टर कार्यालय द्वारा अनुविभागीय दण्डाधिकारियों तथा नगर पुलिस अधीक्षकों को लगातार पटाखों की अवैध बिक्री रोकने हेतु सतत कार्यवाही करने के निर्देश दिये जाते रहे हैं।
विद्युत कम्पनी के अधिकारियों द्वारा बताया गया कि आग लगने की घटना का विद्युत कंपनी की लाईन या अन्य किसी उपकरण से कोई संबंध नहीं है, आगजनी का कोई अन्य कारण है। उप मुख्य विस्फोटक नियंत्रक से प्राप्त प्रारंभिक जाँच रिपोर्ट अनुसार घटना का कारण दिलीप पटाखा हाउस में अनुचित तरीके से फायरवक्र्स का उपयोग एवं अधिक मात्रा में भण्डारण होना है।
विभिन्न संगठनों@कार्यालयों से प्राप्त प्रतिवेदन, जनसामान्य, स्वतंत्र गवाह, पुलिस कर्मियों@अधिकारियों, प्रशासन के अधिकारियों@कर्मचारियों द्वारा दिये गये साक्ष्य के आधार पर विवेचना उपरांत जाँच में यह निष्कर्ष पाया गया है कि दिलीप पटाखा हाउस में 18 अप्रैल 2017 को दोपहर लगभग ढाई बजे आग लगने की घटना पटाखों के अवैध संग्रहण के कारण हुई है। रानीपुरा क्षेत्र में पटाखों के विक्रय का पुराना मार्केट है तथा यहाँ पर कई दुकाने पटाखों का विक्रय करती हैं जो कि घटना के पश्चात पुलिस एवं प्रशासन द्वारा पटाखा दुकानों पर दी गई दबिश के फलस्वरूप बड़ी मात्रा में पटाखे पाये जाने से सिद्ध होता है। पटाखों का विक्रय, शहर में आने तथा उसका परिवहन में पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही पायी गयी। उनके द्वारा पटाखों का खुलेआम विक्रय होने पर भी उसको रोकने के लिये कोई कार्यवाही नहीं की गई।
आग लगने के कारणों का ठीक-ठीक पता लगाया जाना संभव नहीं है, चुंकि घटना का कोई भी प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं है। इसलिये निश्चित तौर पर यह कहना संभव नहीं है कि आग प्रारंभ कैसे हुई? दिलीप पटाखा हाउस की पूरी तरह से जल जाने एवं कोई प्रत्यक्षदर्शी न होने से यह ज्ञात करना कठिन है कि दुकान में किस प्रकार का कार्य उस समय हो रहा था। मूलतः आग पटाखों के अवैध एवं असुरक्षित संग्रह के कारण लगी है। संभवतः पटाखों की लूज पैकिंग अथवा उनका री-पैकिंग किया जाना या उनकी मिस-हैंडलिंग के दौरान घर्षण से उत्पन्न चिंगारी है, जिसने बाद में अन्य पटाखों में आग लग गई और बड़ी मात्रा में पटाखे एक साथ फुट गये। दिलीप पटाखा हाउस से जप्त सामग्री में इस प्रकार के इलेक्ट्रोनिक ट्रिगर डिवाईस भी मिले हैं, जिनका उपयोग विस्फोटक अधिनियम के तहत प्रतिबंधित है। आग जितनी तीव्रता से एवं तेजी से फैली है इससे यह संभावना भी बनती है कि दिलीप पटाखा हाउस में चाईना निर्मित पटाखे भी हो सकते हैं जिनमें पोटेशियम क्लोरेट का उपयोग किया जाता है, जो कि अस्थिर (unstable ) होता है एवं तेज झ्ाटके (sharp jolt) के साथ फुटता (ignite or explod spontaneously) है।
दुकान में संभवतः आग बुझाने के भी कोई उपकरण नहीं थे। दुकान में कोई अन्य रास्ता न होने से सभी व्यक्ति एक ही ओर फंसे रह गये और दुर्घटनाग्रस्त हुए। दुकान में पटाखों का स्टोरेज नियमानुसार नहीं था। दुकान में एक और परछत्ती (mezannine floor) होेने के कारण भी पटाखों का स्टोरेज वहाँ पर था, जो कि पटाखों के स्टोरेज के नियमों के विरूद्ध है। आग एकदम से इतनी बड़ गई की लोगों को बाहर आने का अवसर नहीं मिला। जिसके कारण लोगों की मृृत्यु हुई।
रानीपुरा क्षेत्र में दिलीप पटाखा हाउस के अतिरिक्त पटाखों की कई अन्य दुकाने भी है जहाँ घटना के पश्चात शासन द्वारा की गई जाँच में पटाखे पाए गये हैं एवं इस संबंध में क्षेत्र के अनुविभागीय दण्डाधिकारी एवं पुलिस द्वारा की गई कार्यवाही के अंतर्गत 9 एफ.आई.आर. थाना सेन्ट्रल कोतवाली में दर्ज कराई गई हैं। स्वाभाविक है पटाखे क्षेत्र मेें बाहर से लाये जा रहे थे, नही तो रानीपुरा क्षेत्र में पटाखों का इतना अवैध भण्डारण संभव नही था। प्रशासन के सख्त निर्देश होने पर भी क्षेत्र में पदस्थ संबंधित अनुविभागीय अधिकारी@तहसीलदार द्वारा आवश्यक सावधानी नहीं बरती गई तथा दीपावली के पश्चात पटाखों का संग्रहण एवं विक्रय होने पर उसे रोकने का प्रयास कभी भी नहीं किया गया। मूल रूप से दिलीप पटाखा हाउस का संचालक गुरेन्द्र सिंह पटाखों के अवैध संग्रहण एवं विक्रय का दोषी है। पूरे प्रकरण में क्षेत्र के संबंधित थाना प्रभारी, रानीपुरा की बीट में पदस्थ अमला एवं कार्यपालिक मजिस्ट्रेट की घोर लापरवाही पटाखों की अवैध बिक्री खुले आम होने से प्रर्दिर्शत होती है, जिसके लिये वे दोषी है।
घटना की पुनवृत्ति जांच रिपोर्ट में दिये गये सुझाव
जांच प्रतिवेदन में घटना की पुर्नवृत्ति रोकने के संबंध में सुझाव दिये गये हैं कि भविष्य में शहर में पटाखा@ज्वलनशील सामग्री के विक्रय पर “जीरो टोलरेंस” की नीति रखी जाए। फायर डिपार्टमेन्ट द्वारा समय-समय पर आग रोकने हेतु सुरक्षा उपायों की जानकारी सार्वजनिक रूप से दी जाए एवं आग रोकने के उपायों का ड्रिल भी किया जाए, जिससे सभी ज्वलनशील पदार्थों से लगने वाली आग और उसके रोकथाम के त्वरित उपायों से जनता परिचित रहे।
ज्वलनशील पदार्थों के संग्रहण@विक्रय से संबंधित निर्देश प्रत्येक अनुविभागीय दण्डाधिकारी, नगर पुलिस अधीक्षक तथा थाना प्रभारी अपनी गार्ड फाईल में आवश्यक रूप से रखे जिससे की व्यक्ति बदल जाने पर भी निर्देशों का अवलोकन एवं पालन सतत होता रहे। पटाखा विक्रय के लिये अनुज्ञप्ति देने की शर्तों का पुनरीक्षण किया जाये। जब भी किसी विक्रेता या गोडाउन स्वामी का लायसेंस निरस्त किया जाए तो उस पर केन्सल की सील लगा दी जाए ताकि वह उसका अनुचित उपयोग न कर सके। लायसेंस प्रत्येक विक्रेता को दुकान में सार्वजनिक रूप से खुले स्थान पर प्रदर्शित करने के निर्देश हों। शहर के बाहर दो से तीन स्थानों पर पटाखा बेचने के लिए स्थाई मार्केट विकसित किया जाए। पुलिस एवं प्रशासन द्वारा पटाखा विक्रय के संभावित क्षेत्रों का संयुक्त औचक निरीक्षण किया जाये।
महिपाल@कपूर