पुनर्वास स्थल पर मुहैया करायी जायेंगी सभी मूलभूत सुविधायें -- कमिश्नर श्री दुबे
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पुलिस अधिकारियों को कानून व्यवस्था पर कड़ी नजर रखने के निर्देश
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पुनर्वास स्थल पर प्रति दो सौ परिवार पर होगा एक प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र
इंदौर 22 जून, 2017
कमिश्नर श्री संजय दुबे की अध्यक्षता में आज कमिश्नर कार्यालय सभाकक्ष में कलेक्टर कांफ्रेंस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कमिश्नर श्री संजय दुबे ने सभी कलेक्टरों और पुलिस अधिकारियों तथा स्वास्थ्य, वन, पशु पालन विभाग और ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग के अधिकारियों को सम्बोधित करते हुये कहा कि 15 दिन के भीतर युद्ध स्तर पर अभियान चलाकर पुनर्वास स्थल पर सभी मूलभूत सुविधायें मुहैया करायी जायें। नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बांध से प्रभावित लोगों को पेयजल के लिये पर्याप्त हैण्डपंप और नलजल योजना, पशुओं के लिये शेड, चारा और भूसा, आने-जाने के लिये सम्पर्क मार्ग, निस्तार के लिये नाली, स्ट्रीट लाइट आदि की सुविधा मुहैया करायी जाये। किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जायेगी। आगामी 31 जुलाई, 2017 तक डूब क्षेत्र में आने वाली आबादी को पुनर्वास स्थल पर जाना ही होगा। डूब क्षेत्र में एक अगस्त, 2017 से पेयजल और विद्युत सप्लाई बंद कर दी जायेगी। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार 31 जुलाई तक सभी डूब प्रभावितों को डूब क्षेत्र से हटना अनिवार्य है।
श्री दुबे ने कहा कि राज्य शासन द्वारा डूब प्रभावितों को अनेक सुविधायें दी जा रही हैं, उन्हें इसका लाभ उठाया चाहिये। डूब प्रभावितों को नई बस्ती में पानी, बिजली, सड़क के अलावा आंगनवाड़ी केन्द्र, स्कूल और स्वास्थ्य केन्द्र की सुविधा दी जा रही है। पुनर्वास का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। मेरे द्वारा समय-समय पर उसका निरीक्षण भी किया जा रहा है। पुनर्वास स्थल पर और राहत शिविर में पर्याप्त पुलिस बल की व्यवस्था की जा रही है। पुलिस बल के लिये टेंट, जनरेटर, मोटरबोट, भोजन, वाहन, लाइफ जैकेट, टार्च आदि की भी सुविधा मुहैया करायी जा रही है। गृह विभाग द्वारा मोटरबोट चलाने के लिये प्रशिक्षित होमगार्ड के जवानों की ड¬ुटी लगायी जा रही है। सारे काम के लिये नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण द्वारा पर्याप्त बजट कलेक्टरों को और संबंधित विभागों को मुहैया कराया गया है। राज्य शासन द्वारा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को पेयजल सुविधा मुहैया कराने का दायित्व सौंपा गया है। निर्माण कार्यों का दायित्व ग्रामीण यांत्रिकी सेवा और लोक निर्माण विभाग को सौंपा गया है। सभी विभागों के टेण्डर हो गये हैं और काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। डूब प्रभावित जिले बड़वानी, खरगोन, धार और अलीराजपुर के कलेक्टरों को पुनर्वास कार्य युद्ध स्तर पर चलाने के निर्देश दिये गये हैं। सड़क निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। आवास के लिये शेड बनाने का काम जारी है। कल से निस्तार के लिये पक्की नाली और पशु शेड बनाने का काम शुरू होगा। बैठक को आयुक्त नर्मदा घाटी विकास श्रीमती रेणु पंत ने भी सम्बोधित किया।
कमिश्नर श्री संजय दुबे ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रत्येक दो सौ परिवार पर एक प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र की स्थापना की जा रही है। नये निसरपुर में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र संचालित किया जा रहा है। ग्राम गणपुर में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र संचालित है। इन स्वास्थ्य केन्द्रों पर पैरामेडिकल स्टाफ, एम्बुलेंस और दवाओं की पर्याप्त व्यवस्था कर दी गयी है। पैरामेडिकल स्टाफ को सांप काटने, डूबने और कालरा से पीड़ित रोगियों के इलाज का विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। शासकीय अधिकारियों के प्रत्येक वाहन में फस्ट एड किट रखी जा रही है। पुनर्वास स्थल पर फायर ब्रिागेड की भी व्यवस्था की जा रही है। संकट के समय होमगार्ड के लोग नर्मदा नदी में मोटरबोट भी चलायेंगे।
श्री दुबे ने बताया कि वन विभाग को पुनर्वास स्थल पर बांस,बल्ली मुहैया कराने और डूब क्षेत्र में आने वाले पेड़ों को काटने के निर्देश दिये गये हैं। डूब क्षेत्र में आने वाले धार्मिक स्थलों को भी हटाने के निर्देश दिये गये हैं।
इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्री अजय शर्मा ने डूब प्रभावित चारों जिलों के पुलिस अधीक्षकों को सम्बोधित करते हुये कहा कि पुलिस विभाग के अधिकारी और कर्मचारी सतर्क रहें और कानून और व्यवस्था बनाये रखने में जिला प्रशासन की मदद करें। पुलिस बल को मूलभूत सुविधायें टेंट, भोजन, वाहन, लाइफ जैकेट,टार्च आदि की पर्याप्त व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर पुलिस बल में आवश्यक वृद्धि की जायेगी। महिला पुलिस बल की भी तैनाती की जा रही है।
बैठक में वन, पुलिस, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, स्वास्थ्य, नर्मदा घाटी विकास, ग्रामीण विकास आदि विभागों के अधिकारी मौजूद थे।
सिंह/कपूर