एड्स नियंत्रण के लिये सबका सहयोग जरूरी
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एड्स से सभी को सतर्क रहने की जरूरत -- डॉ.रचना दुबे
इंदौर 28 मार्च, 2017
जिला एड्स नियंत्रण एवं रोकथाम समिति के तत्वावधान में आज क्षेत्रीय स्वास्थ्य प्रशिक्षण केन्द्र एमवाय परिसर में एड्स के संबंध में कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें समाजसेवी, एड्स विशेषज्ञ, स्वयंसेवी संगठन और शासकीय अधिकारियों ने भाग लिया। इस अवसर पर अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष श्री कमाल भाई ने कहा कि एड्स समाज के लिये कलंक है। इसे मिटाने के लिये समाज के सभी वर्गों का सहयोग जरूरी है। उन्होंने कहा कि एड्स के खिलाफ जनजागरण अभियान चलाना चाहिये। इस विषय पर खुलकर चर्चा होना चाहिये और एड्स रोगियों को परामर्श दिया जाना चाहिये।
इस अवसर पर एड्स विशेषज्ञ डॉ.रचना दुबे ने कहा कि एचआईव्ही (हयूमन इम्यूनो डेफीशिएन्सी वायरस) एक वायरस है । एचआईव्ही ग्रसित रोगियों की कार्य क्षमता धीरे-धीरे घटने लगती है। एड्स (एक्वायर्ड एम्युन डिफिसिएंसी सिंण्ड्रोम) एक संक्रामक बीमारी है। उन्होंने कहा कि असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित सुई का पुन: उपयोग, संक्रामित रक्त चढ़ाने और एचआईव्ही संक्रमित माँ से उसके होने वाले शिशु को एड्स होता है। उन्होंने बताया कि साथ-साथ खाना खाने, हाथ मिलाने, गले मिलने, खाने के बर्तन, कपड़े, बिस्तर, शौचालय, स्वीमिंग पुल आदि के सामूहिक उपयोग से खांसने, छीकने या हवा से, मच्छरों को काटने या घरों में पाये जाने वाले कीड़े-मकोड़ों के काटने से एड्स नहीं फैलता है। उन्होंने बताया कि अपने साथी के साथ वफादारी रखने, यौन संबंध के दौरान सही और हर बार कण्डोम का इस्तेमाल करने, केवल लायसेंस प्राप्त ब्लड बैंक से जांच किये गये खून का इस्तेमाल करने, हर बार नयी या उबली हुई सुई का इस्तेमाल करने, गर्भावस्था के दौरान एचआईव्ही की जांच और उपयुक्त इलाज करवाने से एड्स को रोका जा सकता है।
डॉ.दुबे ने बताया कि ऐसे एचआईव्ही संक्रमित रोगी,जिनकी रोगों से लड़ने की क्षमता बहुत कम हो जाती है, उनकी जांच, उपचार, परामर्श एवं रेफ्रल पैकेज का नाम एंटी रिट्रो वायरल थैरेपी है। इस थैरेपी से उपचार चिकित्सक की जांच एवं विभिन्न परीक्षण के बाद शुरू किया जाता है। आवश्यक औषधियां दी जाती हैं। औषधियों सहित यह सुविधा चुनिंदा अस्पतालों और चिकित्सा महाविद्यालयों में उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि एचआईव्ही संक्रमित मरीजों को अक्सर टीबी हो जाती है। इसका इलाज टीबी जांच केन्द्र में उपलब्ध है। यह केन्द्र सभी चिकित्सा महाविद्यालय, जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र और चुनिंदा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में होते हैं। जो लोग एचआईव्ही से संक्रमित हो चुके हैं उनके साथ प्यार और सम्मानजनक व्यवहार करना चाहिये। एड्स नियंत्रण के लिये सभी शासकीय अस्पतालों में परामर्श केन्द्र चलाये जा रहे हैं। इस विषय पर खुलकर चर्चा करने की जरूरत है। एचआईव्ही की जांच करवाने वाले का नाम गुप्त रखा जाता है। यदि संबंधित व्यक्ति चाहता है तो उसके एचआईव्ही संक्रमित होने की जानकारी उसके परिजनों और मित्रों को बतायी जाती है। जांच करवाने वाले व्यक्ति की भावनाओं का पूरा ध्यान रखा जाता है। जांच एवं परामर्श सेवा शासकीय अस्पतालों में नि:शुल्क है। जांच उपरांत पॉजिटिव रिपोर्ट आने पर निराश होने की जरूरत नहीं है। एचआईव्ही के साथ भी लंबे समय तक स्वस्थ्य जीवन जिया जा सकता है। अपने जीवनसाथी या यौन साथी का एचआईव्ही जांच कराना जरूरी है। गर्भवती माता की भी एचआईव्ही जांच कराना चाहिये। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि बिना कण्डोम के यौन संबंध हरगिज स्थापित न करें। एक-दूसरे के साथ मिलकर सुई के माध्यम से नशीली दवाओं का सेवन न करें। यदि एचआईव्ही संक्रमित हो तो भूल से भी रक्तदान, वीर्यदान तथा अन्य शारीरिक अंगों का दान न करें।
डॉ.रचना दुबे ने कहा कि एचआईव्ही संक्रमित गर्भवती महिला से उसके होने वाले शिशु में संक्रमण की संभावना होती है। यह संभावना 20 से 45 प्रतिशत होती है तथा गर्भावस्था, प्रसव तथा स्तनपान के दौरान संक्रमण की संभावना रहती है। गर्भवती माताओं को एचआईव्ही जांच कराना चाहिये। यदि समय रहते ज्ञात हो जाये कि कोई गर्भवती माता एचआईव्ही से संक्रमित है तो उसके होने वाले शिशु को संक्रमण से बचाया जा सकता है।
कार्यशाला को सम्बोधित करते हुये क्षय रोग विशेषज्ञ डॉ.विजय छजलानी ने कहा कि आपसी बातचीत से एड्स को नियंत्रित किया जा सकता है। यह एक खतरनाक बीमारी है और जागरूकता से ही इस पर नियंत्रण पाया जा सकता है। नशे में आदमी विवेक खो बैठता है और एड्स का शिकार हो जाता है। आज-कल बच्चों को भी एड्स हो जाता है। एचआईव्ही पीड़ित गर्भवती माता की जांच जरूरी है। उन्होंने कहा कि दो से चार प्रतिशत क्षय रोगियों में एड्स रहता है। उन्होंने कहा कि राज्य शासन एड्स पीड़ित विधवाओं को पेंशन देती है, उन्हें वोटर आईडी बनाने, जनधन खाता खोलने में मदद करती है। हर गर्भवती माता की जांच जरूरी है। गर्भाधान के प्रारंभिक दिनों में एचआईव्ही संक्रमण पाये जाने पर गर्भपात कराना जरूरी है। एड्स रोगी नियम, संयम से रहे और आजीवन दवा लेता रहे तो लंबे समय तक जीवत रह सकता है। एमवाय अस्पताल में हर क्षय रोगी की एचआईव्ही की जांच अनिवार्य है। कार्यक्रम को श्री आलोक मौर्य, श्रीमती ज्योति, कु.फिरदोस, कु. स्टेला, प्रो.रजनी भारती, प्रो. सचदेवा आदि ने भी सम्बोधित किया।
सिंह/कपूर
