सतत विकास
लक्ष्यों की प्राप्ति से दक्षिण एशिया में शान्ति और खुशहाली
में बाधा
उत्पन्न करने वाली समस्याओं का समाधान हो जाएगा
- लोक सभा
अध्यक्ष
इंदौर, 19 फरवरी 2017
सतत
विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के बारे में दक्षिण एशियाई देशों के अध्यक्षों का शिखर
सम्मेलन, जिसका उद्घाटन
लोक सभा अध्यक्ष, श्रीमती
सुमित्रा महाजन ने 18 फरवरी 2017 को किया था, आज सम्पन्न हो गया । समापन सत्र में श्रीमती
महाजन ने कहा कि सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति से दक्षिण एशिया में शान्ति और
खुशहाली में बाधा उत्पन्न करने वाली समस्याओं का समाधान हो जाएगा । यहाँ विश्व का
4 प्रतिशत से भी कम भू-भाग है,
लेकिन यहाँ विश्व की लगभग 25 प्रतिशत आबादी बसी हुई है । परंतु
इस आबादी में युवाओं की बड़ी संख्या है जो मानव संसाधन के रूप में हमारी कीमती
पूँजी है । उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अधिकाँश लोग अभी भी घोर गरीबी में
जीवन बसर कर रहे हैं जो नीति निर्माताओं के लिए एक बड़ी चुनौती है । इस क्षेत्र के
देशों की यह सामूहिक जिम्मेदारी है कि वे उन्हें प्रभावित करने वाली समस्याओं का
हल खोजें । इस पृष्ठभूमि में उनका मत था कि दो दिनों के सत्रों में हुई चर्चाएं
बहुत ही उल्लेखनीय और लाभप्रद रही ।
श्रीमती
महाजन ने कहा कि एक ओर विकास की आवश्यकता
है और दूसरी और हमें पर्यावरण का भी संरक्षण करना है । दोनों के बीच संतुलन के
परिणाम बहुत बुरे हो सकते हैं और इनसे जलवायु प्रभावित होती है। उन्होंने यह भी
कहा कि जनवरी 2016 में ढाका में प्रतिनिधियों के बीच इस बात पर आम सहमति हुई थी कि सतत विकास लक्ष्यों के बारे में
कार्यवाही की जायेगी और निर्धारित अवधि के भीतर लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से
प्राप्त करने के लिए एक व्यावहारिक योजना तैयार की जायेगी । उन्होंने कहा कि इंदौर
में इस सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए,
इस शिखर सम्मेलन में उन तौर-तरीकों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की
गई जिनसे संसदें यह सुनिश्चित कर सकती हैं कि राष्ट्रीय और
क्षेत्रीय सतत विकास लक्ष्यों की रणनीतियों के कार्यान्वयन के लिए पर्याप्त
वित्तीय और अन्य संसाधन उपलब्ध हों । उन्होंने यह आशा व्यक्त की कि संसदों में और
संसदों के बीच सहयोग के अवसरों का पूर्ण उपयोग सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति की
हमारी सामूहिक यात्रा के मार्ग में सुनहरा अवसर सिद्ध हो सकता है ।
लोक
सभा अध्यक्ष ने कहा कि महिला-पुरुष असमानता एक संवेदनशील चुनौती है और महिलाओं को
भी गरिमा और समानता के साथ जीने का अधिकार है । उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि
महिलाओं को शिक्षा, आर्थिक
संसाधनों और रोजगार के समान अवसर मिलने चाहिए । उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त
की कि शिखर सम्मेलन में सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में बाधा उत्पन्न करने
वाले महिला-पुरुष असमानता के मुद्दे पर विस्तारपूर्वक विचार किया गया। उन्होंने यह
भी कहा कि इस विचार से सभी सहमत हैं कि महिला-पुरुष समानता और महिला-पुरुष का बेहतर संतुलन सतत विकास के लिए महत्वपूर्ण कारक
सिद्ध हो सकता है ।
श्रीमती
महाजन ने यह भी कहा कि इस क्षेत्र के देश प्रायः चक्रवात, भूकंप,बाढ़ आदि जैसी प्राकृतिक आपदाओं का भी शिकार होते
हैं । जलवायु परिवर्तन का मुद्दा न केवल इस क्षेत्र के लोगों के लिए बल्कि पूरे
विश्व के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है । आज समय की मांग है कि क्षेत्रीय सहयोग के
माध्यम से सावधानीपूर्वक, समेकित रूप से
और मिलजुलकर हल ढूंढे जाएँ।
उन्होंने
यह जानकारी भी दी कि भारत इसी साल सतत विकास क्ष्यों के इंडीकेटर्स और दक्षिण
एशिया के बारे में क्षेत्रीय विचार विमर्श का योजन भी करेगा । क्षेत्र के
विशेषज्ञों और अधिकारियों की इस बैठक में संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व में
विश्वव्यापी प्रक्रिया के परिणामों पर विचार किया
जाएगा।
श्रीमती
महाजन ने दक्षिण एशियाई देशों के पीठासीन अधिकारियों और उनके शिष्टमंडल के सदस्यों
की शिखर सम्मेलन में सक्रिय और सार्थक भागीदारी के लिए उनके प्रति आभार व्यक्त
किया । उन्होंने शिखर सम्मेलन के आयोजन में सहायता प्रदान करने के लिए मध्य प्रदेश
के मुख्य मंत्री, श्री शिवराज
सिंह चौहान को धन्यवाद दिया । उन्होंने मध्य प्रदेश विधान सभा के अध्यक्ष, श्री सीतासरन शर्मा को समय निकालकर इंदौर में शिखर सम्मेलन में शामिल
होने के लिए धन्यवाद दिया । उन्होंने इस शिखर सम्मेलन को सफल बनाने के लिए लोक सभा
सचिवालय और मध्य प्रदेश सरकार के अधिकारियों द्वारा की गई कड़ी मेहनत की भी सराहना
की ।
इससे
पहले, अंतर-संसदीय
संघ के अध्यक्ष, श्री साबिर
चौधरी ने कहा कि यह शिखर सम्मेलन बहुत सार्थक रहा है और न केवल राष्ट्रीय बल्कि
क्षेत्रीय और वैश्विक आकांक्षाओं के मामले में प्रेरक रहा है । सतत विकास लक्ष्य
का उद्देश्य लोगों का कल्याण है और इस संबंध में नए दृष्टिकोण और नई भागीदारी की
आवश्यकता है । उनका यह भी मत था कि सांसद सरकार का विकल्प नहीं हैं लेकिन वे मिलकर
सतत विकास लक्ष्यों के बेहतर कार्यान्वयन के कार्य में सरकारी अधिकारियों को शामिल
कर सकते हैं ।
इससे
पहले, आज शिखर
सम्मेलन के कार्य सत्र में जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं की चुनौती से
प्रभावी ढंग से निपटना : क्षेत्रीय संसदीय सहयोग के अवसर विषय पर चर्चा पुनः आरम्भ
हुई । इस सत्र में भाग लेते हुए,दक्षेस आपदा
प्रबंध केंद्र के कार्यकारी निदेशक, प्रोफेसर संतोष कुमार ने कहा कि जलवायु परिवर्तन
गंभीर चिंता का विषय है और दक्षिण एशियाई क्षेत्र को बहुत ख़तरा है । उन्होंने
चेतावनी दी कि गुजरात और नेपाल में भूकंप आने के बाद यह बहुत जरूरी हो गया है कि
अपने शहरों और देशों में आपदाओं के प्रभाव को कम करने के लिए हम इनके लिए तैयार
रहें । ट्रांस डिसिप्लिनरी यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु के कुलपति, डॉ बालकृष्ण पिसुपती ने पेरिस समझौते के
पांच प्रमुख बिंदुओं का उल्लेख किया और सुझाव दिया कि जलवायु संबंधी नए कानून
बनाकर, जलवायु संबंधी
नीतियों के पुनःआकलन के द्वारा और जलवायु संबंधी कार्यवाही को मुख्यधारा में लाकर
प्रत्येक देश द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर कार्यवाही किये जाने की आवश्यकता है ।
रिसर्च
एंड इनफार्मेशन सिस्टम फॉर डेवलपिंग कन्ट्रीज (आर.आई.एस.) के महानिदेशक, श्री सचिन चतुर्वेदी ने शिखर सम्मेलन के
दौरान हुई चर्चा का संक्षिप्त विवरण दिया ।
इंदौर घोषणा को स्वीकार किये जाने के साथ इस
शिखर सम्मेलन का समापन हुआ ।