Wednesday, 15 February 2017

                                                                     रासुका
इंदौर 15 फरवरी 2017
    इंदौर जिले में शांति एवं कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिये आपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्तियों के विरूद्ध प्रतिबंधात्मक कार्यवाही का सिलसिला लगातार जारी है। इसी सिलसिले में कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्री पी. नरहरि ने अखलाख पिता मुस्ताक एहमद निवासी ताजनगर खजराना इंदौर को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (रासुका) में निरूद्ध करने के आदेश जारी किये हैं। इनके विरूद्ध विभिन्न थाना क्षेत्रों में कई आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं।
आईडीए चेयरमेन और कलेक्टर ने दिव्यांगजनों को ट्रायसिकल वितरित की
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दिव्यांगजनों की क्षमतायें अदभुत-ईश्वर ने विशेष गुणों से सम्पन्न किया
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दिव्यांगजन ई-ट्रायसिकल के माध्यम से स्वावलम्बी बनें -- कलेक्टर
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अगले माह दृष्टिहीनों के लिये रोजगार मेला लगेगा
इंदौर 15 फरवरी, 2017
    दिव्यांगजनों की क्षमतायें अदभुत हैं। यदि प्राकृतिक या बीमारी के कारण किसी प्रकार की विकलांगता शरीर में आती है तो ईश्वर और विशेष क्षमता प्रदान कर देते हैं। इन विशिष्ट क्षमताओं के बल पर वे समाज में अपनी विशेष पहचान बनाते हैं। शासन की योजनाओं के माध्यम से उन्हें इस कार्य में थोड़ी मदद अवश्य मिलती है, किंतु दिव्यांगजनों की इच्छाशक्ति ही उन्हें समाज में सही स्थान दिलाती है। आईडीए अध्यक्ष श्री शंकर लालवानी ने कहा कि मध्यप्रदेश शासन दिव्यांगजनों के लिये अनेक योजनायें चला रहा है, जिनका लाभ समाज के सभी वर्ग, जाति के दिव्यांजनों को दिया जा रहा है।
    कार्यक्रम में कलेक्टर श्री पी.नरहरि ने कहा कि इंदौर में दिव्यांजनों को रोजगार दिलाने के लिये प्रशासन के द्वारा विशेष प्रयास किये जा रहे हैं। इंदौर  दिव्यांगजनों के लिये स्वरोजगार मेला लगाया जिसमें 750 से अधिक दिव्यांजनों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है और अगले माह दृष्टिहीनों के लिये रोजगार मेला लगाया जायेगा, उनके लिये उपलब्ध रोजगार को चिन्हित किया जा रहा है। कलेक्टर श्री पी.नरहरि ने कहा कि दिव्यांजन स्वावलंबी बनें। ई-ट्रायसिकल बैटरी से संचालित होती है और एक बार चार्ज करने पर 40 किलोमीटर तक चलती है। इसके माध्यम से स्वरोजगार शुरू करें और स्वावलम्बी बने, आत्मनिर्भर बनकर समाज में अपना योगदान दें। आज इस कार्यक्रम के माध्यम से दिव्यांजनों को डिजिटल ईयरफोन, ब्रााइवेट करने वाली स्टिक और डिजी रिकार्डर बांटे गये। इण्डियन रेलवे फाइनेन्स कार्पोरेशन लिमिटेड नईदिल्ली (रेल मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन एक सरकारी उपक्रम) के द्वारा सामाजिक दायित्व के (सीएसआर) अंतर्गत 36 लाख रूपये कीमत के उपकरण बांटे गये। इन उपकरणों का निर्माण भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम (एलिम्को) कानपुर ने किया है।
    सामाजिक न्याय एवं निशक्तजन कल्याण विभाग के सहयोग से 80 प्रतिशत या उससे अधिक विकलांग व्यक्तियों को चिन्हित कर यह उपकरण वितरित किये गये।
राठौर/कपूर
                                        पीएससी द्वारा होगी खेलकूद अधिकारियों की भर्ती
इंदौर 15 फरवरी, 2017
    मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग इंदौर द्वारा खेलकूद अधिकारियों की भर्ती की जायेगी, जिसके लिये विज्ञापन जारी कर दिया गया है और ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 12 मार्च, 2017 है। लोक सेवा आयोग द्वारा मध्यप्रदेश खेल एवं युवक कल्याण सेवा के राजपत्रित 25 पदों के लिये भर्ती की जा रही है। इनके पदनाम जिला खेल एवं युवा कल्याण अधिकारी, खेल अधिकारी, सहायक संचालक, युवक कल्याण अधिकारी होंगे। इनका वेतनमान 9300-34800अ4200 ग्रेड-पे में द्वितीय श्रेणी राजपत्रित अधिकारी पद पर भर्ती की जायेगी। मध्यप्रदेश के निवासियों के लिये आयु सीमा अधिकतम 21 से 40 वर्ष मध्यप्रदेश के बाहर के अभ्यर्थियों के अधिक अधिकतम आयु सीमा 21 से 35 वर्ष निर्धारित की गयी है। पद के लिये न्यूनतम शैक्षणिक आर्हता स्नातक के साथ एमपी एङ या एम.पी.ई. और राष्ट्रीय खेल अथवा अधिकृत सीनियर राष्ट्रीय चैम्पियनशील में प्रतिनिधित्व होना चाहिये। लिखित परीक्षा 30 अप्रैल, 2017 को प्रात: 10 बजे से 12 बजे तक और दोपहर तीन बजे से पांच बजे तक ऑनलाइन आयोजित की जायेगी। विस्तृत जानकारी आयोग की बेवसाइट www.pscdemo.in, www.mppsc.nic.in  तथा www. mppsc.com पर देखी जा सकती है।
सिंह/कपूर

                                           सामाजिक बदलाव के लिये ईमानदार और समर्पित कुशल नेतृत्व जरूरी
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                                                    सामाजिक बदलाव में स्वैच्छिक संगठनों की महत्वपूर्ण भूमिका
इंदौर 15 फरवरी, 2017
    जन अभियान परिषद इंदौर के तत्वावधान में आज प्रीतमलाल दुआ सभागृह में संवाद योजना के तहत स्वैच्छिक संगठनों का एक दिवसीय जिला स्तरीय सम्मेलन सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर अपर कलेक्टर श्री शमीम उद्दीन ने कहा कि भारत में अधिकांश जनता ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है। शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयंसेवी संगठनों द्वारा जनजागृति अभियान चलाया जाना चाहिये । सामाजिक, आर्थिक और स्वरोजगार के  क्षेत्र में ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत अधिक सुधार की गुंजाइश है। जन अभियान परिषद इस दिशा में सराहनीय कार्य कर रहा है। जन अभियान परिषद की प्रस्फुटन समितियों ने इस दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया है। कार्यक्रम को मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्रीमती कीर्ति खुरासिया, श्री प्रदीप पाण्डे,जनअभियान परिषद इंदौर के संभाग समन्वयक श्री अमित शाह, समर्पित संस्था के श्री ऋषि मेहरा, जनअभियान परिषद के जिला समन्वयक श्री नवनीत रत्नाकर और प्रस्फुटन तथा नवांकुर समितियों के प्रतिनिधियों ने सम्बोधित किया।
    इस अवसर पर कार्यशाला को सम्बोधित करते हुये श्री अरूण जोशी ने सामाजिक विकास में स्वयंसेवी संगठनों की भूमिका विषय पर बोलते हुये कहा कि सामाजिक बदलाव में स्वयंसेवी संगठन अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। नवांकुर और प्रस्फुटन समितियों का दायित्व है कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में क्रांतिकारी सुधार लायें। हम मूकदर्शक नहीं बने रह सकते। उन्होंने कहा कि समाजसेवा एक नेक कार्य है और जनअभियान परिषद समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ्य समाज के लिये शुद्ध भोजन जरूरी है। दुर्भाग्य की बात यह है कि शहर में हवा, पानी और भोजन शुद्ध नहीं मिल रहा है,जिससे अनेक नयी बीमारियां पैदा हो रही हैं। शुद्ध हवा, पानी और भोजन के लिये हर व्यक्ति को जागरूक होना होगा।
    इस अवसर पर ""नेतृत्व कौशल"" विषय पर व्याख्यान देते हुये आचार्य शशिकांत मणि त्रिपाठी ने कहा कि समाज को आज एक कुशल और स्वार्थहीन नेतृत्व की जरूरत है। नेतृत्व कौशल के बिना समाज का विकास नहीं हो सकता। नवांकुर और प्रस्फुटन समितियों का दायित्व है कि वे समाज को स्वार्थहीन नेतृत्व प्रदान करें। कुशल नेतृत्व के लिये ईमानदारी, परिश्रम और समर्पण भाव जरूरी है। रामायण और महाभारत में अनेक ऐसे उदाहरण मिलेंगे कि जिनसे हम प्रेरणा लेकर समाज को नई दिशा दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि माँ समाज की प्रथम शिक्षिका है। स्त्री-पुरूष समान होते हैं। किसी प्रकार का भेदभाव उचित नहीं है। सभी महान लोगों के पीछे किसी न किसी महिला का हाथ रहा है। आधुनिक युग में मलाला युसुफजई और लालीबाई समाज का नेतृत्व करने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग सांचे में ढल जाते हैं ओर कुछ लोग सांचे को ही बदल देते हैं। इतिहास जिन लोगों को आज याद करता है या जिन्हें हम महापुरूष कहते हैं वे ऐसे ही व्यक्ति थे, जिन्होंने समाज के सांचे को बदल दिया। ठीक ही कहा गया है कि शायर, सिंह और सपूत लीक पर नहीं चलते। कुशल नेतृत्व से ही हम गांव की तकदीर और तस्वीर बदल सकते हैं। राज्य शासन की मंशा है कि जनअभियान परिषद की नवांकुर और प्रस्फुटन समितियां सामाजिक बदलाव की कर्णधार बनें। इसके लिये हमें अपने नजरिये में सुधार लाना होगा। हम पद, पैसा और प्रतिष्ठा का मोह छोड़कर हम सार्वजनिक हित का सर्वोपरि मानकर चलें। वह जवानी, जवानी नहीं है,जिसमें कोई आसाधारण उपलब्धि न हो। जिसके पास तरह-तरह के हुनर हैं,वहीं समाज का नेतृत्व कर सकता है। व्रत, उपवास, पूजा-पाठ से आत्मिक सुधार होता है। हमें राम बनना है, रावण नहीं। हमें राम के आदर्श, चरित्र से सबक सीखना चाहिये। ईश्वर ने हर व्यक्ति को अपने जैसा बनाया है। मनुष्य अच्छे कर्म करके इंसान से भगवान बन सकता है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में नवांकुर और प्रस्फुटन समितियों के सदस्य एवं पदाधिकारी मौजूद थे।
सिंह/कपूर
 

प्रसिद्ध भजन गायक श्री अनूप जलोटा की पत्रकारवार्ता के  बिन्दू
इंदौर 15 फरवरी,2017
    भारत में नदियों को माँ का दर्जा दिया जाता है देश की कुछ नदियां को अत्याधिक पवित्र देवी तुल्य माना जाता है। ऐसी ही एक नदी माँ नर्मदा है जो मध्यप्रदेश की जीवन रेखा है मध्यप्रेदश के 16 जिलों से यह नदी निकलती है और सीधे तौर प्रदेश की 30 प्रतिशत से अधिक आबादी इसके आस-पास निवास करती है। नर्मदा जल पीती है एवं जल एवं कृषि कार्य में उपयोग करती है।
    माँ नर्मदा मध्यप्रदेश की जनता को केवल पानी ही नहीं देती वरन पर्यावरण संरक्षण जीव जन्तु के पालन पोषण और विद्युत उत्पादन में महत्वपुर्ण योगदान है। नर्मदा जल के उपयोग से मध्यप्रदेश ने कृषि उत्पादन में की अभूतपूर्ण योगदान दिया है। लगातार 4 वर्षों से मध्यप्रदेश की कृषि कर्मण आवार्ड मिलना माँ नर्मदा के आशीर्वाद से ही संभव हुआ है।
    मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने माँ नर्मदा को श्रृंगारित करने के लिये जो बीड़ा उठाया है। वो पूरे भारत वर्ष के लिये मार्गदर्शन के रुप में स्थापित हो रहा है। देश के प्रत्येक प्रदेश में नंदियों को सरंक्षित और संवर्धित करने के लिये ऐसी आन्दोलन कारी यात्रायें की जानी चाहिये। जिससे आम जनमानस के साथ बच्चे और युवा नदियों के महत्व को समझे। भारत वर्ष तो देव भूमि है। यहां देवता भी जन्म लेने के लिये लालायित रहते हंै। नदियों को माँ के समान माना जाता है। किन्तु फिर भी हमारे देश की नदियों की हालत चिन्ताजन है। उनको बनाये रखने के लिये मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा किये जा रहे प्रयासों को पूरे देश में क्रियान्वित किया जाना चाहिये। लंदन की टेम्स नदी कितनी साफ और सुन्दर बन गई है। जबकि वहाँ नदियों को माँ का दर्जा नहीं मिलता है। हम सबके लिये यह एक प्रश्न है कि भौतिकवादिता के बाद भी टेम्स नदी (लंदन) स्वच्छ है और हमने अपनी धार्मिक मान्यताओं पौराणिक कथाओं के बाद भी नदियों की संरक्षित नहीं कर पाये है।
    मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री की अच्छी सोच के कारण मध्यप्रदेश में नमामि देवी नर्मदे एक जन आन्दोलन बन गया है। पूरे मध्यप्रदेश में नमामि देवी नर्मदे गूँज रहा है। माँ नर्मदा का पौराणिक महत्व है। गंगा में स्नान करने से पाप मुक्ति होती है पर मां नर्मदा के दर्शन और स्मरण मात्र से ही कई जन्मों के पापों से मुक्ति मिल जाती है। माँ नर्मदा के जल में औषधीय गुण विद्यमान है। नर्मदा जल पीने से ही कई बीमारी दूर हो जाती है। मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान एक किसान पुत्र है और प्राकृति व खेती से उनका लगाव जग जाहिर है। उनकी सोच से आज पूरें भारत के पर्यावरण प्रेमी और विशिष्ट व्यक्तियों  नमामि देवी नर्मदे यात्रा जुडते जा रहे है।
    सुप्रशिद्ध गायक श्री अनूप जलोटा ने कहा कि गंगा स्वच्छ मुहिम से भी वे जुड़े हुये है। श्री नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद पूरे देश में नदी संरक्षण अभियान बहुत तीव्र गति से आगे बढ़ा है।
    नमामि देवी नर्मदे यात्रा में शामिल होने आया हूं  माँ नर्मदा-क्षिप्रा लिंक परियोजना के बनने से इस बार सिंहस्थ निर्विवाद सम्पन्न हुआ और कही भी पानी की कमी नहीं आई है। मुख्यमंत्री की भागीदारी प्रयास और भविष्य की सोच से निश्चय ही मां नर्मदा श्रृंगारित होगी और प्रदेश को सम्पन्न बनायेंगी।
    भजन गायक श्री अनूप जलोटा ने कहा कि वे स्वंय भी पर्यावरण प्रेमी है और नदी पहाड़ी से उनका विशेष लगाव है। देश की पवित्र नदियों को भारत की शान माना जाता हे। मां नर्मदा देश की 5वीं सबसे बड़ी नदी है। और उनका अविरल बहना प्रदेश के लिये सबसे ज्यादा जरूरी है।
    श्री जलोटा संगीत क्षेत्र में वे गजल गायक के रूप में आये, किन्तु भजन और ईश्वर प्रेम से उनका लगाव भजनों की ओर हुआ। भजन और ईश्वर प्रेम और आज भजन ही मेरी पहचान बन गयी है। संगीत व्यक्ति की उम्र को रोक लेता है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि वे आज भी युवा सोच रखते है और संगीत  साधना के करण उन्हे पता भी नहीं चलता कि उम्र बढ़ गई है। संगीत व्यक्ति को युवा दिखाता ही नहीं। वरन् युवा बनाता भी है। यही भारतीय संगीत का सौन्दर्य भी है।
राठौर/कपूर