जल संरक्षण और संवर्धन से ही प्राणी मात्र की रक्षा हो सकती है
ग्राम उज्जैनी में जय जयवन्ती नदी को
पुनर्जीवित करने के लिए ग्रामीणों ने लिया संकल्प
इंदौर, 30 अप्रैल 2018
जन अभियान परिषद द्वारा प्रदेश के साथ-साथ आज जिले में भी जन चेतना और जल संरक्षण तथा जल संवर्घन के लिए ग्राम उज्जैनी, यशवंत नगर, कटक्या और बनेड़िया में जल संसद का आयोजन किया गया, जिसमें बडी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। ग्रामीणों ने इस अवसर पर संकल्प लिया कि वे पुरानी नदियों को पुनर्जीवित करेंगे, उनकी साफ-सफाई करेंगे तथा दोनों किनारों पर वृक्षारोपण करेंगे। जिससे ये नदियां बरसाती पानी को खींच कर बड़ी नदियों तक पहुंचायेंगी, जिससे शिप्रा जैसी प्राचीन नदी बारह मास प्रवाहमान रहेगी। सांवेर तहसील में कटक्या नदी, देपालपुर में देवपाल नदी और महू में तारन नदी को पुनर्जीवित करने का संकल्प ग्रामीणों ने लिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एसडीएम श्री राकेश शर्मा ने कहा कि स्टापडैम, तालाब और बलराम ताल के माध्यम से हमें किसानों को जल संरक्षण के लिए प्रेरित करना होगा। हम वर्षा का सिर्फ 3 प्रतिशत पानी रोक पाते है, जबकि हमें 25 से 50 प्रतिशत पानी हमें धरती पर रोकना चाहिये अथवा धरती में उतारना चाहिये। इजरायल में मात्र 12 इंच वार्षिक वर्षा होती है, मगर पानी के मामले में वह हमसे ज्यादा समृद्ध है। भारत में औसतन हर साल 40 इंच बारिस होती है। हर साल जल संरक्षण अभियान चलाया जाता है, नये-नये तालाब बनाये जाते है और पुराने तालाबों का गहरीकरण किया जाता है, जिससे अधिकाधिक जल हम संरक्षित कर सकें। बढ़ती आबादी को देखते हुए ऐसा करना बहुत जरूरी है।
इस अवसर जन अभियान परिषद के जिला समन्वयक श्री व्ही.के. रत्नाकर ने कहा कि उज्जैनी ग्राम के काकरी बरड़ी पहाड़ी से शिप्रा नदी निकलती है। यहीं से जय जयवन्ती नदी भी निकलती है। यह नदी पूरी तरह विलुप्तप्राय हो चुकी है। इसे पुर्नजीवित करने की आवश्यकता है। राज्य शासन की मंशा है कि पूरे प्रदेश में विलुप्तप्राय नदियों को पुर्नजीवित किया जाये। यह काम ग्राम पंचायत और ग्रामीणजन बेहतर तरीके से कर सकते हैं। जन अभियान परिषद की नवांकुर और प्रस्फुटन समितियां इस दिश में उल्लेखनीय कार्य कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के लिए जन सहयोग जरूरी है। बिना जन सहयोग के कोई भी अभियान सफल नहीं हो सकता। जन जागरूकता के लिए आज पूरे प्रदेश में जल संसद का आयोजन किया जा रहा है। प्रदेश का जब तक प्रत्येक नागरिक जल संरक्षण व जल संवर्धन के प्रति जागरूक नहीं होगा तब तक जल संवर्धन नहीं किया जा सकता है। जल संरक्षण के लिए बड़ी-बड़ी नदियों पर बड़े-बड़े बांध बनाये गये है और उनसे नहरें भी निकाली गई है तथा बिजली भी पैदा की जा रही है। इन बांधों से भू-जल स्तर भी बढ़ा है। इमें छोटो-छोटे नालों पर स्टॉपडैम और चेकडैम बनाना चाहिये। पहाड़ों पर गड्ढे खोद कर जल संरक्षित करना चाहिये।
कार्यक्रम को डॉ0 विकास अवस्थी और श्री आनंद ठाकुर ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर श्री विकास चौधरी, श्री श्याम चौधरी, श्रीमती साधना, श्री अजय शर्मा आदि विशेष रूप से मौजूद थे।