Friday, 23 March 2018


केन्द्र से भावांतर योजना का केन्द्रांश शीघ्र जारी करने की माँग
मुख्यमंत्री श्री चौहान की केन्द्रीय वित्त मंत्री श्री जेटली से मुलाकात 
इंदौर 23 मार्च 2018

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज नई दिल्ली में केन्द्रीय वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली से मुलाकात की। श्री चौहान ने मुलाकात के दौरान मध्यप्रदेश में किसानों को उनके उत्पाद का उचित दाम दिलाने के लिए चलायी जा रही भावांतर भुगतान योजना के बारे में विस्तार से चर्चा की।
मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय वित्त मंत्री को बताया कि प्रदेश में बम्पर कृषि उत्पादन के कारण उत्पादों की कीमत नीचे गिर गयी हैं। इससे किसानों को उनकी फसल का उचित दाम नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने खरीफ फसलों के लिए भावांतर भुगतान योजना शुरू की गयी थी। इस योजना से किसानों को राहत मिली है।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने केन्द्रीय मंत्री श्री जेटली से आग्रह किया कि भावांतर भुगतान योजना का लाभ रबी की फसलों को भी दिया जाय। मुख्यमंत्री ने भावांतर भुगतान योजना की केन्द्रांश (50 प्रतिशत) राशि शीघ्र जारी करने की माँग की। 
क्रमांक 230/760/महिपाल/विजय

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने सिंधी समाज के 28 लोगों को दिये नागरिकता प्रमाण पत्र
इंदौर 23 मार्च 2018

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज यहाँ मुख्यमंत्री निवास भोपाल पर आयोजित कार्यक्रम में सिंधी समाज के 28 लोगों को नागरिकता प्रमाण पत्र प्रदान किये। ये लोग बरसों से विस्थापित के रूप में प्रदेश में रह रहे थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कार्यक्रम में इन सभी विस्थापितों का स्वागत करते हुये कहा कि अब वे मान-सम्मान से रहें, खुद आगे बढ़ें और प्रदेश तथा देश को आगे बढ़ाने के लिये काम करें।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि जिन लोगों को आज नागरिकता मिली है, उनके लिये ये भाव भरे पल खुशी के हैं। इस पल का वे बरसों से इंतजार कर रहे थे। श्री चौहान ने कहा कि यह देश और शहर आपका है। सिंधु नदी के किनारे विकसित हुई सभ्यता के पोषक नागरिक यदि किसी कारण से अपनी जड़ों को छोड़कर हमारे यहाँ आये तो यह देश उनका भी है। उनका यहाँ खुले दिल से स्वागत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मर्जर की समस्या का जल्दी ही समाधान करेंगे। इस संबंध में नीति बना ली गई है। उन्होंने आगामी एक अप्रैल को मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित होने वाली चैतीचांद उत्सव के लिये सिंधी समाज को आमंत्रित किया।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने जिन लोगों को नागरिकता प्रमाण पत्र दिये उनमें गीता-प्रीतम दास, कविता बाई-भाग सिंह, मुरली लाल-चमनलाल छाबरिया, नरेन्द्र कुमार-पीतामबर दास, जयपाल-पीतामबर दास, बेबी बाई-सीतल दास, सीतल दास-राझों मल, सावन दास-हशमत मल, तुलसी बाई-सावन दास, राजकुमार-राझों मल, चन्द्रभान-राझों मल, गुली बाई-राझों मल, अनीता बाई-राझों मल, चन्द्री बाई-राझों मल, देवी बाई-ब्रिज लाल, शर्मिला बाई-रमेश लाल, महेन्द्र कुमार-पीतामबर दास, हरीश कुमार कुकरेजा-चन्द्रभान, दर्पणलाल-भगवान दास, रमेशलाल-बचाराम, पपी बाई-रमेश लाल, संतोष कुमार-सुमेर मल, मुकेश कुमार-सुमेर मल, रीता रानी-हंसराज, पवन कुमार-सुधामचंद, शारदी बाई-पवन कुमार, सुनीता बाई-सुनील कुमार और कृष्णा-मुरलीलाल छाबरिया शामिल हैं।

कार्यक्रम में विधायक श्री रामेश्वर शर्मा और इंदौर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री शंकर ललवानी भी उपस्थित थे।
क्रमांक229/759/महिपाल/विजय

मुख्यमंत्री श्री चौहान की नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. कुमार से मुलाकात
इंदौर 23 मार्च 2018

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज नई दिल्ली में नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार से उनके कार्यालय में मुलाकात की। मुलाकात के दौरान श्री चौहान ने उन्हें मध्यप्रदेश में किसानों के हितों को ध्यान में रखकर चलायी जा रही भावांतर भुगतान योजना के बारे में विस्तार से बताया। श्री चौहान ने बताया कि मध्यप्रदेश में बम्पर कृषि पैदावार होने के कारण उत्पादों के दाम काफी गिर गये हैं। इससे किसानों को उनकी फसल का वाजिब दाम नहीं मिल पा रहा था। इस समस्या से निपटने के लिए राज्य सरकार द्वारा भावांतर भुगतान योजना शुरू की गई। इस योजना के अंतर्गत किसानों को उनके कृषि उत्पाद की बाजार भाव और न्यूनतम समर्थन मूल्य के अंतर की राशि सीधे उनके बैंक खातों में जमा कर दी जाती है। अभी यह योजना खरीफ फसलों के लिये भी शुरू की गई है। 
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने नीति आयोग के उपाध्यक्ष से आग्रह किया कि चना, मसूर और सरसों को भी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने की व्यवस्था होना चाहिये। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने 3 हजार किसानों के बेटा-बेटियों के लिए खाद्य प्रसंस्करण उद्योग लगवाने की शुरूआत की है। इससे युवाओं को अपने स्वयं के उद्योग लगाने के नये अवसर मिलेंगे। क्रमांक 228/758/महिपाल/विजय

केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री राधा मोहन सिंह ने भावांतर भुगतान योजना की तारीफ की
मुख्यमंत्री श्री चौहान केन्द्रीय कृषि मंत्री से मिले, जी.आई. बासमती मुद्दे पर की चर्चा 
इंदौर 23 मार्च 2018

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज नई दिल्ली में केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री राधा मोहन सिंह से मुलाकात की। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने मध्यप्रदेश में किसानों के हित संरक्षण के लिए चलाई जा रही भावांतर भुगतान योजना की मुक्त कण्ठ से तारीफ की। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी फसलों के उचित दाम दिलाने के लिए यह योजना एक श्रेष्ठ योजना है। अन्य राज्यों को मध्यप्रदेश में कृषि के क्षेत्र में चलायी जा रही योजनाओं का अनुसरण करना चाहिए। केन्द्रीय मंत्री श्री सिंह ने मुख्यमंत्री श्री चौहान को मध्यप्रदेश को लगातार पांचवी बार कृषि कर्मण अवार्ड से पुरस्कृत होने पर बधाई दी। 
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रदेश में बम्पर कृषि उत्पादन से उत्पन्न हुई समस्याओं से केन्द्रीय मंत्री को अवगत कराते हुए कहा कि इस कारण उत्पाद की कीमतों में काफी गिरावट आई। इस कारण किसानों को उनकी फसल का उचित दाम नहीं मिल पा रहा है। इस समस्या से निपटने के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने भावांतर भुगतान योजना शुरू की है। उन्होंने बताया कि किसानों को बाजार भाव और न्यूनतम समर्थन मूल्य के बीच के अंतर की राशि राज्य सरकार किसानों के खाते में सीधे जमा कर रही है।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने केन्द्रीय कृषि मंत्री से मध्यप्रदेश में पैदा होने वाले जी.आई. बासमती चावल के मुद्दे पर भी चर्चा की। मुख्यमंत्री ने बताया कि टैग ना मिलने के कारण किसानों को चावल का सही भाव नहीं मिल पा रहा है। मुख्यमंत्री ने अनुरोध किया कि केन्द्र सरकार इस संबंध में किसानों के हितों को ध्यान में रखकर उचित कार्यवाही करे।
मुलाकात के दौरान केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री द्वय सर्वश्री पुरुषोत्तम रूपाला और गजेन्द्र शेखावत भी मौजूद थे।
क्रमांक 227/757/महिपाल/विजय

मध्यप्रदेश के बासमती चावल को जी.आई. टैग न दिया जाना गलत निर्णय: श्री चौहान
मुख्यमंत्री ने नई दिल्ली में केन्द्रीय मंत्रियों से भेंट कर सहयोग मांगा 
इंदौर 23 मार्च 2018

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने जी.आई. रजिस्ट्री द्वारा बासमती चावल के जी.आई. टैग (G.I.Tag) के संबंध में लिये गये निर्णय के विरोध में शुक्रवार को नई दिल्ली में केन्द्रीय वाणिज्य मंत्री श्री सुरेश प्रभु, केन्द्रीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह और केन्द्रीय विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज से मुलाकात की और वस्तु-स्थिति से अवगत कराया। ज्ञातव्य है कि 15 मार्च 2018 को एपेडा द्वारा बासमती जी.आई. के संबंध में दिये गये तथ्यों के आधार पर जी.आई. रजिस्ट्री द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार मध्यप्रदेश में बोये गये धान से उत्पन्न चावल बासमती नहीं कहलायेगा। 
श्री चौहान ने केन्द्रीय मंत्रियों को वस्तु-स्थिति से अवगत कराते हुए कहा कि मध्यप्रदेश के 13 जिलों में लगभग 105 वर्षों से बासमती चावल का उत्पादन किया जा रहा है। राज्य के लगभग 80 हजार किसान इस खेती से जुड़े हुए हैं। राज्य में उत्पादित बासमती चावल का लगभग तीन हजार करोड़ रुपये का निर्यात होता है तथा राज्य के बासमती की गुणवत्ता सभी स्तरों पर मान्य पायी गयी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश के बासमती चावल को जी.आई. टैग नहीं मिलने पर बासमती चावल पैदा करने वाले किसानों में गहरा असंतोष होगा। बासमती टैग न मिलने के कारण किसानों को उनके चावल का सही मूल्य बाजार में नहीं मिल पायेगा। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश के बासमती चावल का जी.आई. टैग का क्लेम न केवल ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित है, बल्कि बासमती चावल पैदा करने वाले जिलों की एग्रो क्लाइमेटिक कंडीशन भी विशेष प्रकार के बासमती चावल पैदा करने में सहायक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस निर्णय से न केवल राज्य के किसानों के हितों का नुकसान हुआ है बल्कि निर्यातकों को भी काफी घाटा सहना पड़ेगा। इस निर्णय से पूरे देश के बासमती चावल के निर्यातकों से प्राप्त होने वाली विदेशी मुद्रा में भारी गिरावट आयेगी। श्री चौहान ने बताया कि मध्यप्रदेश की एग्रो बायो क्लाइमेटिक कंडीशन पर राज्य के बासमती के प्रयोगशाला परीक्षण राज्य के क्लेम का समर्थन करते हैं। 
श्री चौहान ने केन्द्रीय मंत्रियों से आग्रह किया कि वे किसानों और मध्यप्रदेश सरकार के हितों को ध्यान में रखते हुए प्रदेश के 13 जिलों में पैदा होने वाले चावल को बासमती जी.आई. टैग दिलवाने में सहयोग करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे प्रदेश के किसानों, खासकर बासमती चावल पैदा करने वाले किसानों को उनके उत्पाद का सही मूल्य मिल सकेगा और जी.आई. टैग मिलने से बासमती चावल निर्यातकों के जरिये विदेशी मुद्रा में भी काफी बढ़ोत्तरी होगी। साथ ही मध्यप्रदेश के बासमती चावल की पहचान विश्व में बरकार रहेगी।
क्रमांक 226/756/महिपाल/विजय

केन्द्र से भावांतर योजना का केन्द्रांश शीघ्र जारी करने की माँग
मुख्यमंत्री श्री चौहान की केन्द्रीय वित्त मंत्री श्री जेटली से मुलाकात 
इंदौर 23 मार्च 2018



मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज नई दिल्ली में केन्द्रीय वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली से मुलाकात की। श्री चौहान ने मुलाकात के दौरान मध्यप्रदेश में किसानों को उनके उत्पाद का उचित दाम दिलाने के लिए चलायी जा रही भावांतर भुगतान योजना के बारे में विस्तार से चर्चा की।
मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय वित्त मंत्री को बताया कि प्रदेश में बम्पर कृषि उत्पादन के कारण उत्पादों की कीमत नीचे गिर गयी हैं। इससे किसानों को उनकी फसल का उचित दाम नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने खरीफ फसलों के लिए भावांतर भुगतान योजना शुरू की गयी थी। इस योजना से किसानों को राहत मिली है।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने केन्द्रीय मंत्री श्री जेटली से आग्रह किया कि भावांतर भुगतान योजना का लाभ रबी की फसलों को भी दिया जाय। मुख्यमंत्री ने भावांतर भुगतान योजना की केन्द्रांश (50 प्रतिशत) राशि शीघ्र जारी करने की माँग की। 
क्रमांक 225/755/महिपाल/विजय

अल्पकालीन फसल ऋण की देय तिथि 27 अप्रैल तक बढ़ाने की मंजूरी
शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर अल्पावधि फसल ऋण यथावत 
मंत्रि-परिषद के निर्णय 
इंदौर 23 मार्च 2018

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों द्वारा खरीफ 2017 में वितरित अल्पकालीन फसल ऋण की देय तिथि 28 मार्च 2018 से बढ़ाकर 27 अप्रैल 2018 करने की मंजूरी दी गई।
मंत्रि-परिषद ने वर्ष 2017-18 में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के माध्यम से शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर अल्पावधि फसल ऋण देने की वर्तमान योजना के तहत सहकारी बैंको के लिए बेस रेट पूर्व वर्षो की भांति 11 प्रतिशत यथावत रखने का निर्णय लिया। 
मंत्रि-परिषद ने उच्च न्यायालय के ऐसे कर्मचारीगण, जो 3600 रूपये ग्रेड-पे के नीचे की ग्रेड-पे पर कार्य कर रहें हैं, उन्हें एक अप्रैल 2003 से एक अतिरिक्त वेतन वृद्धि और 3600 ग्रेड-पे प्राप्त करने वाले कर्मचारियों को दो अतिरिक्त वेतन वृद्धि देने की मंजूरी दी।
क्रमांक 224/754/महिपाल/विजय
असंगठित श्रमिकों के पंजीयन के लिए एक अप्रैल से विशेष अभियान
पंजीयन कराने वाले श्रमिकों को मिलेगा सरकार की विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ


इंदौर 23 मार्च 2018

राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश असंगठित शहरी एवं ग्रामीण कर्मकार कल्याण मण्डल गठित किया है, जिसके माध्यम से असंगठित मजदूरों का पंजीयन कर उन्हें जन कल्याणकारी योजनाओं में अनेको तरह के लाभ दिलाये जायेंगे। कलेक्टर श्री निशांत वरवड़े ने बताया कि असंगठित मजदूरों के पंजीयन के लिए एक अप्रैल 2018 से विशेष अभियान प्रारंभ किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि असंगठित श्रमिकों के पंजीयन के लिए ग्राम पंचायतवार तथा नगरीय क्षेत्र में वार्डवार पंजीयन शिविर लगाये जायेंगे तथा अधिक से अधिक श्रमिकों का पंजीयन किया जायेगा।
कौन करा सकता है पंजीयन
पंजीयन के लिए श्रमिक की आयु 18 से 60 वर्ष के बीच होना चाहिए, आवेदक असंगठित श्रमिक श्रेणी में कार्यरत हो, आयकर दाता न हो तथा संबंधित आवेदक श्रमिक के पास ढ़ाई एकड़ से ज्यादा कृषि भूमि नहीं होना चाहिए। पंजीयन के लिए निर्धारित प्रारूप में आवेदन सह घोषणा पत्र के साथ समग्र आई.डी. क्रमांक, पासपोर्ट साईज फोटो लगाना होगा पंजीयन प्रक्रिया पूर्णतः निःशुल्क रहेगी। एक बार किया गया पंजीयन 5 वर्ष तक वैध रहेगा।
असंगठित श्रमिकों को मिलेगी ये सुविधाएं
पंजीबद्ध असंगठित मजदूरों को 200 रूपये मासिक फ्लैट रेट पर बिजली उपलब्ध कराई जायेगी, गर्भवती श्रमिक महिलाओं को पोषण आहार के लिये 4 हजार रूपये दिये जायेंगे, प्रसव होने पर महिला के खाते में 12 हजार 500 रूपये जमा किये जायेंगे। घर की मुखिया श्रमिक की सामान्य मृत्यु पर परिवार को 2 लाख तथा दुर्घटना में मृत्यु पर 4 लाख रूपये की सहायता, हर भूमिहीन श्रमिक को भूखण्ड या मकान, स्वरोजगार के लिए ऋण दिलाया जायेगा, साइकिल-रिक्शा चलाने वालों को ई-लोडिंग रिक्शा का मालिक बनाने के लिए बैंक ऋण की सुविधा दिलाई जायेगी उन्हें 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान के साथ 30 हजार की सब्सिडी दी जायेगी। श्रमिक को मृत्यु पर अंतिम संस्कार के लिये पंचायत व नगरीय निकाय से 5 हजार रूपये की नगद सहायता दिलायी जायेगी। इसके अलावा तेदूपत्ता तोड़ने वाले मजदूरों को चरण पादूका योजना के तहत जूते चप्पल तथा पानी की कुप्पी दिलाई जायेगी। पंजीकृत श्रमिक व उसके परिवार के सदस्यों की गम्भीर बीमारी का मुक्त इलाज सरकार करायेगी। श्रमिक के बच्चों को कक्षा 1 से पी.एचडी तक निःशुल्क शिक्षा दिलायी जायेगी। मजदूर को साइकिल व औजार खरीदने के लिए 5 हजार रूपये का नगद अनुदान दिया जायेगा। मजदूरों को मकान बनाने के लिए जमीन का पट्टा दिलाया जायेगा।
असंगठित श्रमिक के रूप में ‘‘कचरा व पन्नी बीनने वाले‘‘ भी करा सकते है पंजीयन
ऐसे श्रमिकों को जिनकी उम्र 18 से 60 वर्ष के बीच हो। जो आयकर दाता नहीं हो, शासकीय सेवा में नहीं हो तथा ढ़ाई एकड़ से अधिक भूमिधारक नहीं हो वे सभी असंगठित श्रमिक माने जायेंगे। पंजीयन नि:शुल्क होगा जो 5 वर्ष तक के लिये वैध माना जायेगा। असंगठित श्रमिकों में कचरा व पन्नी बीनने वाले, कृषि कार्य में लगे मजदूर, घरेलू कामकाजी मजदूर, फेरी लगाकर दूध बेचने वाले, फेरी लगाकर रद्दी व कबाड़ी का समान खरीदने वाले, मत्स्य पालन मजदूर, पत्थर तोड़ने वाले, ईट बनाने वाले, दुकानों पर काम करने वाले, गोदामों में कार्य करने वाले, परिवहन, हथकरघा, पावरलूम, रंगाई, छपाई, सिलाई, अगरबत्ती बनाने वाले, जूते बनाने वाले, ऑटो रिक्षा चालक, आटा, तेल, दाल मिलो में काम करने वाले मजदूर, लकड़ी का काम करने वाले, बर्तन बनाने वाले, कारीगर, लोहार, बढ़ाई, आतिशबाजी उद्योग में लगे सभी मजदूरों का पंजीयन किया जा सकता है। इसके अलावा प्रायवेट सुरक्षा में लगे कर्मचारियों दरी व कारपेट बनाने वाले, आतिशबाजी व माचिस बनाने वाले सभी मजदूरों, कृषि मण्डियों में हम्माली करने वाले, तुलाई कराने वाले, बोरे सिलने वाले का पंजीयन किया जा सकता है।
कैसे होगा पंजीयन
पंजीयन के लिए आवेदक को घोषणा पत्र व आवेदन, समग्र आईडी क्रमांक, पासपोर्ट साईज फोटो देना होगा। यह पंजीयन आगामी 5 वर्ष तक वैध रहेगा। उन्होंने बताया कि पंजीयन पूर्णतः निःशुल्क रहेगा। पंजीयन के बाद आवेदक के मोबाइल पर वाईस कॉल व मेसेज भी आयेगा।
क्रमांक/224/754/भदौरिया/जी
मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना में 6897 ग्राम बारहमासी सड़कों से जुड़े
अगले वर्ष 330 करोड़ से बनेगी 1250 कि.मी. सड़कें 


इंदौर 23 मार्च 2018,



प्रदेश के शत-प्रतिशत ग्रामों को सड़क मार्ग से जोड़ने के लक्ष्य के तहत राज्य सरकार द्वारा 2661 करोड़ रुपये के व्यय से 6897 ग्रामों को ग्रेवल रोड के माध्यम से बारहमासी सड़क मार्गों से जोड़ दिया गया है। इन सड़कों का निर्माण 'मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना'' के तहत करवाया गया है। आगामी वित्तीय वर्ष में 1250 किलोमीटर सड़कों का निर्माण कर 550 ग्रामों को बारहमासी सड़कों से जोड़ा जायेगा। इसके लिये पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा 330 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री गोपाल भार्गव ने कहा है कि वर्ष 2010 में राज्य सरकार ऐसे ग्राम, जो प्रधानमंत्री सड़क योजना के माध्यम से डामरीकृत मार्गों से जुड़ने से वंचित रह जाते हैं, उनमें बारहमासी सड़क सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 'मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना'' का शुभारंभ किया गया था।
इस योजना के तहत 15 हजार 146 किलोमीटर सड़कों का निर्माण कर 6897 ग्रामों को जोड़ा जा चुका है। चालू वित्त वर्ष में 400 करोड़ रुपये के कार्य प्रगति पर हैं।
क्रमांक/223/753/भदौरिया/जी

नगरीय निकायों में अधोसंरचना विकास के लिये 1366 करोड़ स्वीकृत
इंदौर 23 मार्च 2018,




प्रदेश में 378 नगरीय निकायों में अधोसंरचना विकास के लिये 1366 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत कर दी गई है। स्वीकृत राशि में से 57 करोड़ रुपये नव-गठित नगरीय निकायों को दिये गये हैं। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्रीमती माया सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री शहरी अधोसंरचना विकास योजना के द्वितीय चरण के तहत 378 नगरीय निकायों में सड़क स्टॉर्म वॉटर ड्रेन, पार्किंग एवं यातायात सुधार कार्य, धरोहर संरक्षण, नगरीय सौंदर्यीकरण, पर्यटन विकास, खेल मैदान विकसित करने, आमोद-प्रमोद संरचनाएँ, हाट बाजार का विकास जैसी मूलभूत सुविधाओं के विस्तार के लिये 1800 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। इसमें 360 करोड़ रुपये अनुदान एवं 1440 करोड़ ऋण के रूप में दिया जायेगा। इसमें 300 करोड़ रुपये की व्यवस्था भी विभाग द्वारा राज्य-स्तरीय स्मार्ट सिटी विकास के लिये की गई है।
क्रमांक/222/752/भदौरिया/जी
उचित मूल्य दुकानों के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 31 मार्च तक बढ़ाई गयी

इंदौर 23 मार्च 2018,

            इंदौर जिले में उचित मूल्य दुकानों के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 31 मार्च 2018 तक के लिए बढ़ा दी गई है। जिले में ग्रामीण क्षेत्रों की 126 उचित मूल्य दुकानों के लिए ऑनलाइन आवेदन पत्र आमंत्रित किये गये है। यह आवेदन पत्र खादद्य एवं नागरिक आपूति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की वेबसाइट www.food.mp.gov.in पर किये जा सकते है। रिक्त ग्राम पंचायतों एवं दुकान आवंटन की प्रक्रिया की जानकारी इसी वेबसाइट तथा संबंधित अनुविभागीय राजस्व अधिकारी कार्यालय से प्राप्त की जा सकती है। पूर्व में आवेदन करने की अंतिम तिथि 12 मार्च 2018 थी।

क्रमांक/221/751/भदौरिया/जी

लोक अदालत में होगी दोनों पक्षों की जीत

इंदौर 23 मार्च 2018,

      विभिन्न न्यायालयों में लंबित प्रकरणों के त्वरित निराकरण के लिए आगामी 14 अप्रैल को राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित की जायेगी। इसी तारतम्य में प्रशासनिक न्यायाधिपति श्री पी.के. जायसवाल के निर्देशन में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खण्डपीठ इंदौर में आगामी 14 अप्रैल,2018 को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन उच्च न्यायालय खण्डपीठ इंदौर में किया जायेगा।

      राष्ट्रीय लोक अदालत में शमनीय आपराधिक प्रकरणपरक्राम्य अधिनियम की धारा 138 के अंतर्गत प्रकरणबैंक रिकवरी संबंधी मामलेंमोटर दुर्घटना क्षतिपूर्ति दावा प्रकरणवैवाहिक प्रकरणश्रम विवाद प्रकरणभूमि अधिग्रहण के प्रकरणविद्युत एवं जल कर/बिल संबंधी प्रकरण (अशमनीय मामलों को छोड़कर),सेवा मामलेजो सेवानिवृत्ति संबंधी लोगों से संबंधित हैराजस्व प्रकरणदीवानी मामले तथा अन्य समस्त प्रकार के राजीनामा योग्यप्रकरणों का निराकरण आपसी समझौते के आधार पर किया किया जायेगा। समस्त पक्षकारों एवं अधिवक्तागण से अनुरोध किया गया है कि उच्च न्यायालय मे लंबित  प्रकरणों को नेशनल लोक अदालत के माध्यम से सुलह एवं समझौते के आधार पर निराकृत कराने हेतु मध्यप्रदेश  उच्च न्यायालय खण्डपीठ इंदौर  प्रिंसिपल रजिस्ट्रारडिप्टी रजिस्ट्रार,संबंधित सेक्शन एवं उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति इंदौर से संपर्क कर सकते हैं एवं अपने प्रकरणों को नेशनल लोक अदालत में रखने हेतु आवेदन या सूचना दे सकते हैं। लोक अदालत के द्वारा निराकृत किये गये प्रकरणों में पक्षकारों के द्वारा भुगतान की गयी कोर्ट फीस का शासन द्वारा वापिस किये जाने का प्रावधान है।

क्रमांक/220/750/भदौरिया/जी

गर्मी में पेयजल आपूर्ति राज्य सरकार की पहली प्राथमिकता : मंत्री श्रीमती माया सिंह

जल संरक्षण एवं संवर्धन को बढ़ावा देने नगरीय निकाय चलाएंगे "जनचेतना-अभियान''  

इंदौर 23 मार्च 2018

    नगरीय विकास और आवास मंत्री श्रीमती माया सिंह ने कहा है कि गर्मी के मौसम में पेयजल की आपूर्ति राज्य सरकार की पहली प्राथमिकता है। इसके लिए नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा प्रदेश के 23 जिलों के 123 निकायों के लिए 19.40 करोड़ रुपए राशि के प्रस्ताव राहत आयुक्त को भेजे गए हैं। इसमें से सरकार द्वारा 4.06 करोड़ की राशि उपलब्ध करवा दी गई है जो आवश्यकतानुसार निकायों को आवंटित की जा चुकी है। वर्ष 2018-19 में पेयजल आपूर्ति के लिए 751 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है।

    मंत्री श्रीमती माया सिंह ने बताया कि नगरों में पेयजल उपलब्ध कराने तथा  योजनाओं समय पर क्रियान्वयन, के लिए मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी द्वारा 45 नगरों में पेयजल और दो नगरों में सीवरेज का कार्य किया जा रहा है। इसके लिए वित्तीय वर्ष 2018 -19 में 660 करोड़ का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि आगामी 3 वर्षों में सभी 378 शहरों में मानक पेयजल उपलब्ध कराने की कार्य योजना भी तैयार कर ली गई है ।  

    अमृत योजना, मुख्यमंत्री पेयजल योजना सहित विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत नगरीय निकायों के लिए 6200 करोड़ रुपये की राशि पेयजल परियोजना हेतु स्वीकृत की गई है। मुख्यमंत्री शहरी पेयजल योजना अंतर्गत वर्ष 2018 में 91 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि पेयजल आपूर्ति के लिए धन की कमी नहीं आने दी जाएगी। इसके साथ ही विभाग द्वारा सभी नगरीय क्षेत्रों में पानी की बर्बादी और फिजूलखर्ची  को रोकने तथा जल संरक्षण और संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए 'जनचेतना अभियान' चलाने के निर्देश भी स्थानीय निकायों को दिए गए हैं।

क्रमांक/219/749/भदौरिया/जी

जलवायु परिवर्तन चुनौतियों से निपटने के लिये जन-जागरूकता जरूरी

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एप्को भोपाल में जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन 

इंदौर 23 मार्च 2018

    पर्यावरण मंत्री श्री अंतर सिंह आर्य ने एप्को भोपाल में गुरूवार को मध्यप्रदेश में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों पर केन्द्रित पहली राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ किया। संगोष्ठी में भाग ले रहे देश-प्रदेश के 200 से अधिक विषय-विशेषज्ञ, शोधार्थी आदि से श्री आर्य ने जलवायु परिवर्तन के खतरों और बचाव के प्रति लोगों को जागरूक करने की अपील की। श्री आर्य ने कहा कि जिस तरह से वैश्विक और देश के तापमान में बढ़ोत्तरी से जलवायु में बदलाव आ रहे हैं, उससे कृषि और आर्थिक व्यवस्था प्रभावित हुई है। भावी पीढ़ी को इनसे बचाने के लिये पाठ्यक्रम में जलवायु परिवर्तन विषय का समावेश किया जाना चाहिये।

    एप्को के महानिदेशक श्री अनुपम राजन ने कहा कि एप्को ईको-क्लब द्वारा विद्यार्थियों के माध्यम से जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को कम करने का प्रयास कर रहा है। तीन जिलों के 60 गाँव को स्मार्ट विलेज बनाने का काम किया जा रहा है। परम्परागत जल-स्रोतों और देशी नस्ल के पशुओं का संरक्षण कर रहा है। एप्को विषय-विशेषज्ञों, सेवानिवृत्त अनुभवशाली लोगों को जोड़कर भी जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि आज 25वाँ विश्व जल-दिवस है। नितांत आवश्यक है कि लोगों को पीने का साफ पानी मिले, जिससे जल-जनित बीमारियाँ न हों।

मध्यप्रदेश का एप्को केन्द्र देश में पहले स्थान पर

    केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सलाहकार और जलवायु परिवर्तन मिशन के राष्ट्रीय प्रभारी डॉ. अखिलेश गुप्ता ने कहा कि एप्को का जलवायु परिवर्तन ज्ञान प्रबंधन केन्द्र देश के 22 केन्द्रों में प्रथम स्थान पर है। पर्यावरण के क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने हमेशा आगे बढ़ते हुए पहल की है। उन्होंने कहा कि पहले विश्व के तापमान में 100-200 सालों में मामूली परिवर्तन आता था, जिसमें वर्ष 1980 के बाद से काफी बढ़ोत्तरी हो रही है। इससे समुद्र स्तर भी बढ़ा है। इसके लिये मानवीय गतिविधियाँ जिम्मेदार हैं। हालांकि विश्व की तुलना में भारत में तापमान कम बढ़ा है और देश में 
मध्यप्रदेश में भी स्थिति उतनी विकट नहीं हुई है। मध्यप्रदेश में भी वर्षा कम हुई है पर छत्तीसगढ़ और झारखण्ड सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। अब हल्की बारिश न होकर भारी बारिश हो जाती है, जिससे वर्षा औसत तो सामान्य हो जाता है, पर यह कृषि के अनुकूल नहीं है। पूरे देश में हीट वेव बढ़ी है, जो चिंता का विषय है। डॉ. गुप्ता ने सुझाव दिया कि तापमान के बदलाव को मद्देनजर रखते हुए तैयारी करें और विश्वविद्यालय मिलकर इस पर शोध करें। उन्होंने कहा कि आज देश में विश्व का सबसे तेज मौसम भविष्यवाणी करने वाला कम्प्यूटर है।

    पूर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक और उप कुलपति डॉ. रामप्रसाद ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से जैव-विविधता में 10 से 15 प्रतिशत तक की कमी आयी है। संगोष्ठी शोधार्थियों के लिये एक अच्छा अवसर और मंच है। मंत्री श्री आर्य ने इस अवसर पर अकादमिक समिति द्वारा चयनित 145 से अधिक शोध-पत्रों की पुस्तक का भी विमोचन किया। उन्होंने एप्को द्वारा जलवायु परिवर्तन पर पीएचडी के लिये प्रारंभ किये गये फैलोशिप कार्यक्रम के प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र और राशि प्रदान की। शोधार्थियों ने भी अपने शोध प्रस्तुत किये। संगोष्ठी का समापन 24 मार्च को होगा।कार्यक्रम का संचालन महाप्रबंधक श्री लोकेन्द्र ठक्कर ने किया।

क्रमांक/218/748/भदौरिया/जी

जलवायु परिवर्तन चुनौतियों से निपटने के लिये जन-जागरूकता जरूरी

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एप्को भोपाल में जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन 

इंदौर 23 मार्च 2018

    पर्यावरण मंत्री श्री अंतर सिंह आर्य ने एप्को भोपाल में गुरूवार को मध्यप्रदेश में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों पर केन्द्रित पहली राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ किया। संगोष्ठी में भाग ले रहे देश-प्रदेश के 200 से अधिक विषय-विशेषज्ञ, शोधार्थी आदि से श्री आर्य ने जलवायु परिवर्तन के खतरों और बचाव के प्रति लोगों को जागरूक करने की अपील की। श्री आर्य ने कहा कि जिस तरह से वैश्विक और देश के तापमान में बढ़ोत्तरी से जलवायु में बदलाव आ रहे हैं, उससे कृषि और आर्थिक व्यवस्था प्रभावित हुई है। भावी पीढ़ी को इनसे बचाने के लिये पाठ्यक्रम में जलवायु परिवर्तन विषय का समावेश किया जाना चाहिये।

    एप्को के महानिदेशक श्री अनुपम राजन ने कहा कि एप्को ईको-क्लब द्वारा विद्यार्थियों के माध्यम से जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को कम करने का प्रयास कर रहा है। तीन जिलों के 60 गाँव को स्मार्ट विलेज बनाने का काम किया जा रहा है। परम्परागत जल-स्रोतों और देशी नस्ल के पशुओं का संरक्षण कर रहा है। एप्को विषय-विशेषज्ञों, सेवानिवृत्त अनुभवशाली लोगों को जोड़कर भी जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि आज 25वाँ विश्व जल-दिवस है। नितांत आवश्यक है कि लोगों को पीने का साफ पानी मिले, जिससे जल-जनित बीमारियाँ न हों।

मध्यप्रदेश का एप्को केन्द्र देश में पहले स्थान पर

    केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सलाहकार और जलवायु परिवर्तन मिशन के राष्ट्रीय प्रभारी डॉ. अखिलेश गुप्ता ने कहा कि एप्को का जलवायु परिवर्तन ज्ञान प्रबंधन केन्द्र देश के 22 केन्द्रों में प्रथम स्थान पर है। पर्यावरण के क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने हमेशा आगे बढ़ते हुए पहल की है। उन्होंने कहा कि पहले विश्व के तापमान में 100-200 सालों में मामूली परिवर्तन आता था, जिसमें वर्ष 1980 के बाद से काफी बढ़ोत्तरी हो रही है। इससे समुद्र स्तर भी बढ़ा है। इसके लिये मानवीय गतिविधियाँ जिम्मेदार हैं। हालांकि विश्व की तुलना में भारत में तापमान कम बढ़ा है और देश में मध्यप्रदेश में भी स्थिति उतनी विकट नहीं हुई है। मध्यप्रदेश में भी वर्षा कम हुई है पर छत्तीसगढ़ और झारखण्ड सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। अब हल्की बारिश न होकर भारी बारिश हो जाती है, जिससे वर्षा औसत तो सामान्य हो जाता है, पर यह कृषि के अनुकूल नहीं है। पूरे देश में हीट वेव बढ़ी है, जो चिंता का विषय है। डॉ. गुप्ता ने सुझाव दिया कि तापमान के बदलाव को मद्देनजर रखते हुए तैयारी करें और विश्वविद्यालय मिलकर इस पर शोध करें। उन्होंने कहा कि आज देश में विश्व का सबसे तेज मौसम भविष्यवाणी करने वाला कम्प्यूटर है।

    पूर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक और उप कुलपति डॉ. रामप्रसाद ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से जैव-विविधता में 10 से 15 प्रतिशत तक की कमी आयी है। संगोष्ठी शोधार्थियों के लिये एक अच्छा अवसर और मंच है। मंत्री श्री आर्य ने इस अवसर पर अकादमिक समिति द्वारा चयनित 145 से अधिक शोध-पत्रों की पुस्तक का भी विमोचन किया। उन्होंने एप्को द्वारा जलवायु परिवर्तन पर पीएचडी के लिये प्रारंभ किये गये फैलोशिप कार्यक्रम के प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र और राशि प्रदान की। शोधार्थियों ने भी अपने शोध प्रस्तुत किये। संगोष्ठी का समापन 24 मार्च को होगा।कार्यक्रम का संचालन महाप्रबंधक श्री लोकेन्द्र ठक्कर ने किया।

क्रमांक/218/748/भदौरिया/जी