Saturday, 21 April 2018

मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना

भोपाल

मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना में अब वर्ष 2016 या उसके बाद आयोजित 12वीं की माध्यमिक शिक्षा मण्डल की परीक्षा में 75 प्रतिशत या उससे अधिक अंक अथवा सीबीएसई/आईसीएसई की परीक्षा में 85 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा।
योजना में लाभ के लिये विद्यार्थी के पालक की आय 6 लाख रुपये से कम होना चाहिए। विद्यार्थी का आधार नम्बर भी जरूरी है। ऐसे छात्र जिनके पास आधार नम्बर नहीं हैं, उन्हें 3 माह के अंदर आधार नम्बर प्रस्तुत करना होगा।
इंजीनियरिंग-जे.ई.ई. मेन्स परीक्षा में 50 हजार तक की रैंक वाले विद्यार्थियों द्वारा किसी शासकीय अथवा अशासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश लेने पर उसे सहायता मिलेगी। शासकीय कॉलेज की पूरी फीस (मेस शुल्क एवं कॉशन मनी छोड़कर) दी जायेगी। प्रायवेट कॉलेज की फीस में डेढ़ लाख रुपये या वास्तविक शुल्क (शुल्क समिति द्वारा निगमित, मेस शुल्क एवं कॉशन मनी छोड़कर) जो कम हो, शासन द्वारा दी जायेगी।
यह स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी इंजीनियरिंग कॉलेज में पृथक प्रवेश परीक्षा के आधार पर प्रवेश दिया जाता है और छात्र की रैंक जेईई मेन्स में 50 हजार के अंदर है, तो उसे भी पात्रता होगी। शासकीय कॉलेज की परिभाषा में अनुदान प्राप्त महाविद्यालय एवं सभी शासकीय विश्वविद्यालय भी सम्मिलित हैं।
मेडिकल-राष्ट्रीय पात्रता और प्रवेश परीक्षा (नीट) के माध्यम से केन्द्र या राज्य के किसी भी शासकीय मेडिकल/डेंटल कॉलेज अथवा मध्यप्रदेश के किसी प्रायवेट मेडिकल कॉलेज/डेंटल कॉलेज में एम.बी.बी.एस./बी.डी.एस. पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने पर योजना का लाभ मिलेगा। विद्यार्थियों को देय शुल्क राज्य शासन द्वारा दी जायेगी।
नीट अथवा भारत शासन के अंतर्गत ऐसे संस्थान, जो स्वयं के द्वारा आयोजित परीक्षा के आधार पर प्रवेश देते हैं, को भी योजना में सम्मिलित किया गया है।
शासकीय मेडिकल/डेंटल कॉलेज में शिक्षित डाक्टर 2 वर्ष तक ग्रामीण क्षेत्र में कार्य करने को बाध्य होंगे। इन्हें 10 लाख रुपये का बांड भरना होगा। प्रायवेट कॉलेज के छात्रों के लिये यह अवधि 5 वर्ष तथा बांड की राशि 25 लाख रुपये होगी।
लॉ- क्लेट के माध्यम से देश के किसी भी राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में बारहवीं कक्षा के बाद के कोर्स की विद्यार्थियों को देय शुल्क राज्य सरकार द्वारा दी जायेगी। मध्यप्रदेश में स्थित भारत सरकार के सभी संस्थानों में संचालित ग्रेजुएशन प्रोग्राम या इंटीग्रेटेड पोस्ट-ग्रेजुएशन प्रोग्राम के कोर्स की विद्यार्थियों को देय शुल्क राज्य शासन द्वारा दी जायेगी।
राज्य शासन के सभी कॉलेज के बी.एससी., बी.ए., बी. काम., नर्सिंग, पॉलीटेक्निक तथा स्नातक स्तर के सभी पाठ्यक्रमों की फीस सरकार भरेगी। योजना में स्नातक स्तर के लिये विभिन्न संस्थाओं को देय शुल्क के रूप में प्रवेश शुल्क एवं वह वास्तविक शुल्क (मेस शुल्क एवं कॉशन मनी को छोड़कर), जो शुल्क विनियामक समिति अथवा मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग अथवा राज्य शासन द्वारा निर्धारित की गयी है, का ही भुगतान किया जायेगा। शासकीय संस्थाओं के विद्यार्थियों की पूरी फीस संस्था के खाते में दी जायेगी। प्रायवेट संस्थाओं में विद्यार्थियों को देय शुल्क विद्यार्थी के खाते में दिया जायेगा।
छह लाख रुपये तक की आय सीमा के अंतर्गत बीपीएल कार्डधारी, अनुसूचित-जाति और अनुसूचित-जनजाति वर्ग के विद्यार्थी, जो उपरोक्त निर्धारित शर्तों के कारण योजना में सम्मिलित नहीं हो पा रहे हैं, को विशेष प्रकरण मानते हुए विभाग इनके संबंध में सक्षम प्राधिकारी से अनुमोदन प्राप्त कर योजना में सम्मिलित कर सकेगा।
योजना का लाभ लेने वाले विद्यार्थियों को प्रवेशित संस्था के नियम अनुसार विषय तथा पाठ्यक्रम को समय-सीमा में पूरा करना आवश्यक होगा अन्यथा योजना का लाभ नहीं मिलेगा। विद्यार्थी द्वारा राज्य या केन्द्र शासन की किसी अन्य योजना से सहायता प्राप्त होने की स्थिति में वह अंतर की राशि प्राप्त कर सकेगा। मध्यप्रदेश के युवा, जो इस योजना के लाभार्थी होंगे एवं उनका परिवार स्वेच्छा से शिक्षा पूरी होने के बाद मध्यप्रदेश सरकार द्वारा स्थापित फण्ड में उनके जैसे अन्य छात्रों की सेवा के लिये योजना में दी गयी राशि को वापस जमा करा सकेंगे। योजना का क्रियान्वयन संचालनालय तकनीकी शिक्षा द्वारा किया जा रहा है। विभागीय पोर्टल www.scholarshipportal.mp.nic.in के माध्यम से योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है।

 योजना में 8 दिसम्बर 2017 तक 17025 विद्यार्थियों की लगभग 25 करोड़ 35 लाख रूपये की फीस का भुगतान किया जा चुका है। कुल आवेदन 28685 है।

तहसील से लेकर हाईकोर्ट तक लगेगी लोक अदालत आज
बिजली विभाग द्वारा उपभोक्ताओं को दी जायेगी भारी छूट
लोक अदालत का मुख्य केन्द्र होगा जिला न्यायालय
इंदौर 21 अप्रैल 2018
     म.प्र. उच्च न्यायालय खण्डपीठ इंदौर के प्रशासनिक न्यायाधिपति श्री पी.के. जायसवाल के निर्देशन में म.प्र. उच्च न्यायालय खंडपीठ इंदौर में आज 22 अप्रैल 2018 को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन उच्च न्यायालय खण्डपीठ इंदौर में किया जा रहा हैं।
     इस राष्ट्रीय लोक अदालत में शमनीय  आपराधिक प्रकरणपरक्राम्य अधिनियम की धारा 138 के अंतर्गत प्रकरणबैंक रिकवरी संबंधी मामलेंमोटर दुर्घटना क्षतिपूर्ति दावा प्रकरणवैवाहिक प्रकरणश्रम विवाद प्रकरणभूमि अधिग्रहण के प्रकरणविद्युत एवं जल कर/बिल संबंधी प्रकरण (अशमनीय मामलों को छोड़कर)सेवा मामले जो सेवा निवृत्त संबंधी लाभों से संबंधित हैंराजस्व प्रकरणदीवानी मामले तथा अन्य समस्त प्रकार के राजीनामा योग्यप्रकरणों का निराकरण आपसी समझौते के आधार पर किया जायेगा। प्रिंसिपल रजिस्ट्रार उच्च न्यायालय श्री तारकेश्वर सिंह ने समस्त पक्षकारों एवं अधिवक्तागण से अनुरोध किया है कि उच्च न्यायालय में लंबित प्रकरणों को नेशनल लोक अदालत के माध्यम से सुलह एवं समझौते के आधार पर निराकृत कराने हेतु म.प्र. उच्च न्यायालय खण्डपीठ इंदौर में प्रिंसिपल रजिस्ट्रारडिप्टी रजिस्ट्रारसंबंधित सेक्शन एवं उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति इंदौर से संपर्क कर सकते हैं एवं अपने प्रकरणों को नेशनल लोक अदालत में रखने हेतु आवेदन/सूचना दे सकते हैं। लोक अदालत के द्वारा निराकृत किये गये प्रकरणों में पक्षकारों के द्वारा भुगतान की गई कोर्ट फीस शासन द्वारा वापिस किये जाने का प्रावधान हैं। लोक अदालत में सबको न्याय मिलता हैं और दोनों पक्षों को जीत मिलती है तथा अदालत के निर्णय के विरूद्ध वरिष्ठ न्यायालय में अपील नहीं की जा सकती।           
     मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशानुसार प्रदेश के संपूर्ण न्यायालयों में वर्ष-2018 की द्वितीय नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा हैं। इसी तारत्मय में श्री राजीव कुमार श्रीवास्तव, जिला एवं सत्र न्यायाधीश के मार्गदर्शन में जिला इंदौर में आज 22 अप्रैल 2018 को नेशनल लोक अदालत का आयेाजन किया जायेगा।
     उक्त नेशनल लोक अदालत में विद्युत अधिनियम, 2003 के अंतर्गत आने वाले प्रकरणों का अधिक से अधिक निराकरण हो सके इस हेतु मध्यप्रदेश शासन ऊर्जा विभाग, भोपाल द्वारा न्यायालयों में लंबित मामलों एवं प्रीलिटिगेशन प्रकरणों में छूट प्रदान की गई हैं।
                विद्युत विभाग द्वारा उपभोक्ताओं को दी जाने वाली छूट
     नेशनल लोक अदालत में लंबित प्रकरणों में निम्नदाब श्रेणी के उपभोक्तागण को छूट दी जा रही हैं। समस्त घरेलू उपभोक्तागण, समस्त कृषि उपभोक्तागण, 05 किलोवाट तक गैस घरेलू उपभोक्तागण, 10 अश्वशक्ति भार तक के औद्योगिक उपभोक्तागण पर छूट दी जायेगी।
     इसीप्रकर प्रीलिटिगेशन स्तर पर विद्युत कंपनी द्वारा आंकलित सिविल दायित्व की राशि पर 40 प्रतिशत और लंबित प्रकरणों पर विद्युत कंपनी द्वारा आंकलित सिविल दायित्व की राशि पर 25 प्रतिशत छूट दी जायेगी।
     उपरोक्त प्रीलिटिगेशन एवं लंबित प्रकरणों की आंकलित राशि के भुगतान में चूक की दशा में, जो आदेश तिथि से 30 दिवस पश्चात प्रत्येक छ: माही चक्रवृद्धि ब्याज 16 प्रतिशत प्रतिवर्ष वार्षिक की दर से ब्याज की दर से ब्याज वसूल योग्य होता हैं, उस ब्याज की राशि पर 100 प्रतिशत की छूट दी जायेगी।
     उपरोक्त छूट के संबंध में एक मात्र शर्त यह है कि उपभोक्ता को निर्धारित छूट के उपरांत शेष देय आंकलित सिविल दायित्व एवं ब्याज की राशि का एकमुश्त भुगतान करना होगा। साथ ही अपराध शमन फीस अधिनियम के प्रावधान अनुसार वसूल की जायेगी।
बैंकों के वर्षों से लंबित प्रकरणों का हाथों-हाथ होगा निराकरण
     जिले के अग्रणी जिला प्रबंधक श्री मुकेश भट्ट ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट से प्राप्त निर्देशों के अनुसार जिले में भी नेशनल लोक अदालत का आयोजन आज 22 अप्रैल 2018 को प्रात: 11 बजे से दोपहर 4 बजे तक इंदौर जिला न्यायालय परिसर में किया जायेगा। इस नेशनल लोक अदालत में प्री-लिटिगेशन से संबंधित सिविल मामलों एवं विनियम विपत्र अधिनियम-1881 की धारा 138 के अंतर्गत चेकों की वापसी की सुनवाई होगी।
     सभी बैंक अपने बैंक से संबंधित सभी अतिदेय ऋणियों को न्यायालय के प्राधिकृत न्यायाधीश द्वारा हस्ताक्षरित मांग राशि का नोटिस तामिल करवाने की व्यवस्था करेगी तथा सभी अतिदेय ऋणियों को उक्त नेशनल अदालत में उपस्थित होकरअधिक से अधिक लंबित मामलों में एकमुश्त समझौता कर ऋण चुकैती करने का अवसर प्राप्त होगा। सभी बैंकर्स अपेक्षा की गई है कि इस नेशनल लोक अदालत में अधिक से अधिक संख्या में प्रकरणों का निपटारा करें और बैंकों की गैरनिष्पादक आस्तियों एवं बट्टेकृत खातों में पर्याप्त वसूली प्रभावित होकरबैंकों की लाभप्रदता में वृद्धि हो सके। इस नेशनल लोक अदालत के माध्यम से ऋणी भी ऋण मुक्त होकर सिविल की लिस्ट से बाहर आ सकेगें।
     श्री भट्ट ने विश्वास प्रकट किया कि हमेशा की तरह इस बार भी सभी बैंक इस नेशनल लोक अदालत के आयोजन में सहभागिता कर इसके प्रयोजन को सफल बनाएगें।

लोक सेवा एक मिशन है

मध्यप्रदेश के समस्त भाइयों और बहनों, प्रणाम!

आज लोक सेवा दिवस के अवसर पर आपसे अपने विचार साझा कर रहा हूँ। लोक सेवा का मतलब है जनता को सेवा प्रदान करना। यह हमारे लिए गर्व का विषय है कि मध्य प्रदेश के सभी क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं। यह उनका प्रयास है जो नीतियों के कार्यान्वयन को इतना आसान बना रहे हैं। लोक सेवा के तीनों स्तंभों द्वारा अद्वितीय काम किया जा रहा मैं इस उपलब्धि के लिए उन्हें बधाई देता हूं। यह हमारे प्रदर्शन और भिन्न विचार हैं जिनके कारण हमें ऐसी योजनाएं आरंभ कर पाए हैं जिन्हें अन्य राज्यों द्वारा अपनाई जा चुकी हैं। एक राज्य के रूप में, हम एक लंबा सफर तय कर चुके हैं और मैं इस सफलता के का श्रेय लोक सेवकों को देना चाहूँगा। अच्छा काम करने के लिए चाहे वह सीएम हेल्पलाइन हो, गुड गवर्नेंस हो, समाधान एक दिन हो उन्हें हमने सम्मानित किया है यह एक अच्छी पहल है, इस तरह के कार्य हुमें करते रहने चाहिए। हम लोग लगातार कोशिश कर रहे हैं जन कल्याण के काम, विकास के काम और साथ ही गुड गवर्नेंस। सीएम हेल्प लाइन के माध्यम से कई लोगों की समस्याओं का समाधान हमने किया है। अभियान चला कर हमने रेवेन्यू के मामले निपटाए हैं। हमने प्रदेश में अनेकों ऐसे काम किए हैं जो अद्भुत हैं, हमने कई क्षेत्रों में विभिन्न पुरस्कार हमने जीते हैं। मध्यप्रदेश एक समय में जहां था उससे कहीं आगे हम लोग ले कर आए हैं और इसका श्रेय मैं अपने सभी लोक सेवक मित्रों को देता हूँ।
जन सेवा के जिस कार्य में हम हैं वह सुबह 10 से 5 की नौकरी नहीं है। आपमें प्रतिभा है इस लिए आप इस सेवा में आए हैं, हमने यह रास्ता चुना है ताकि हम जनता, प्रदेश व अपने देश की भलाई के लिए कार्य कर सकें। जिस भी विभाग से आते हैं उस विभाग के लिए अपना सर्वस्व झोंक कर काम करें, क्योंकि जनकल्याण कोई नौकरी नहीं है, यह एक मिशन है, देश को बदलने व प्रदेश को बदलने का कार्य हमें मिला है, जिसे पूरे करने का जज़्बा हर व्यक्ति में होना चाहिए। हमारी प्रामाणिकता, कार्यकुशलता और किसी काम को करने की तड़प से हम इस काम को कर सकते हैं। हम उन चंद मुट्ठी भर लोगों में से हैं जिन्हें करोड़ों लोगों का भाग्य बदलना है उनका भविष्य बनाना है। हमें जो काम मिला है उसे पूरा करने की तड़प भी होना चाहिए, तभी लक्ष्य की प्राप्ति हो सकती है। इस काम को करने की तड़प जो हमें लक्ष्य को प्राप्त किए बिना चैन से नहीं बैठने देती, ऐसे जनूनी ऐसे कई अफसर हमारे पास हैं। मैं जब भी प्रदेशवासियों से मिलता हूँ तो मेरे मन में एक ही विचार होता है कि उनसे बात करके, उनकी समस्याएँ सुन कर, उनके समाधान की कोशिश करूँ। यही तड़प प्रदेश के हर एक लोक सेवक में होना चाहिए।
यदि हमारा लक्ष्य निर्धारित है तो लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक रोडमैप तैयार करने की जरूरत है। अगर रोडमैप ढंग से बन जाए तो कार्यक्रम के क्रियान्वन की सफलता निश्चित है। सही रोडमैप का पालन ककरके हम लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं। इस रास्ते में हमारे सामने कई चुनौतियां आती हैं। लेकिन चुनौतियाँ तो लोक सेवकों के जीवन का एक अभिन्न हिस्सा हैं। हम सभी को उन चुनौतियों को स्वीकार कर उनका सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। कई बार चुनौतियां अचानक हमारे सामने आ खड़ी होती है, तब त्वरित निर्णय लेकर काम करना होता है। ऐसे ही निर्णय हमने भावांतर भुगतान योजना को लागू करते समय हमने लिया।
एक महत्वपूर्ण बात और है कि किसी काम को देखने का हमारा दृष्टिकोण कैसा है? किसी काम कि सफलता या असफलता हमारे दृष्टिकोण हमारी सोच पर निर्भर करती है। लोक सेवकों में कई अफसर हमारे पास ऐसे हैं जिन्होंने अद्भुत कार्य करके अविश्वसनीय परिणाम हमें दिये हैं। हमारी सोच सकारात्मक होनी चाहिए। कुछ मित्र होते हैं जिनकी सोच नकारतमकता से प्रभावित होती है उन्हें हर कार्य में बाधाएँ पहले नज़र आती हैं, शुरुआत ही नकारात्मक होती है अंत भी नकारात्मक ही होगा। जहां भी नकारात्मक सोच की दखल हो जाती हैं वहाँ सफलता मिलनी असंभव है। ऐसे में सकारात्मक सोच बाधाओं को पार करके मार्ग निकाल लेने में सहायक सिद्ध होती है।
हमने मुख्यमंत्री असंगठित श्रमिक कल्याण योजना आरंभ कि जिसमें प्रदेश कि आधी आबादी को हम कवर करेंगे। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रदेश में अभी भी ऐसे लोग हैं जो सड़कों के किनारे या घासफूस, प्लास्टिक की पन्नी के मकान बना कर रहने पर विवश हैं। अब इस स्थिति को देखने के दो नज़रिये हो सकते हैं एक कि शहर की सुंदरता को खराब करने वाले इन लोगों को यहाँ से हटाओ या फिर दूसरा इनकी सहाता करके इन्हें भी शहर की सुंदरता का हिस्सा बनाया जाए। इसीलिए प्रदेश के गरीबों को घर, बिजली और शिक्षा प्रदान करने के निरंतर प्रयास हम कर रहे हैं। राज्य के लोगों के भाग्य को बदलने के लिए हम तत्पर हैं। नियम व प्रक्रियाएँ कई मामलों में आड़े आती हैं ऐसे में सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ संवेदना भी साथ है तो हर कार्य पूर्ण होना ही होना है, नियम, प्रक्रियाएं व व्यवस्थाएँ ऐसी हों जिससे सभी को लाभ मिले नियम, प्रक्रियाएँ, व्यवस्थाएँ जनता के लिए हैं आवश्यकता पड़ने पर सकारात्मक बदलाव किए जा सकते हैं। जनता को साथ लेकर, उन्हें अपने साथ जोड़ते हुए यदि हम योजनाएँ बनाएँ या अभियान चलाएं तो बेहतर परिणाम प्राप्त कर सकते हैं।
हम किसी भी क्षेत्र में हों अच्छा काम तभी कर सकते हैं जब हम सभी को समानता की दृष्टि से देखें। हम किसी एक सेवा से बंधे नहीं हैं, हम सभी का लक्ष्य एक ही है जनता, प्रदेश व देश की सेवा। धैर्य, दृढ़ता और उत्साह के साथ हमारी सेवाओं का कार्यान्वन करना बहुत महत्वपूर्ण है। आप परिणाम देने वाले अधिकारी हैं, इसलिए पसंद और नापसन्द के आधार पर व्यक्ति को ना चुनें, बल्कि जो उस काम के लिए परफेक्ट हो, उसे अवसर दीजिये। आवश्यक नहीं कि हमें सफलता हर बार प्राप्त हो, कभी असफल भी होना पड़ता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि उस असफलता से हताश हो कर रह जाएँ, हमारा प्रयास महत्व रखता है। पुनः कोशिश करके सफलता हासिल करेंगे यही हमारी सोच होनी चाहिए। यह हमारे लिए यह गर्व की बात है कि मध्य प्रदेश में हमारे पास ऐसे सक्षम लोक सेवा अधिकारी हैं। लोक सेवा के लिए इनके जनून, उत्कृष्ट कार्यों के लिए इन्हें हमेशा याद किया जाएगा।
- मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान
(भोपाल में लोक सेवा दिवस के अवसर पर 20 अप्रैल 2018 को आयोजित कार्यशाला में दिये गए उद्बोधन से)