Wednesday, 2 May 2018

जिले की तहसीलों का होगा पुनर्सीमांकन
अवैध कॉलोनियों को नियमित करने की कार्यवाही होगी जल्द शुरू
कलेक्टर श्री वरवड़े की अध्यक्षता में राजस्व अधिकारियों की बैठक संपन्न
इंदौर, 2 मई 2018
    इंदौर जिले में तहसील सीमाओं के  पुनर्सीमांकन की कार्यवाही शीघ्र शुरू होगी । ज्ञात रहे कि राज्य सरकार ने हाल ही में इंदौर शहर के लिए तहसील स्वीकृत की है । साथ ही राज्य शासन द्वारा दिये गये निर्देशों के अनुरूप इंदौर जिले में भी अवैध कॉलोनियों को नियमित करने की प्रक्रिया जल्द ही शुरू की जायेगी।
    यह जानकारी आज यहां कलेक्टर श्री निशांत वरवड़े की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई राजस्व अधिकारियों की बैठक में दी गयी । बैठक में अपर कलेक्टर सुश्री निधि निवेदिताश्री कैलाश वानखेड़े श्री अजयदेव शर्मा सहित अन्य राजस्व अधिकारी उपस्थित थे  । बैठक में  कलेक्टर श्री वरवड़े ने निर्देश दिये कि अवैध कालोनियो के नियमितीकरण की प्रक्रिया राज्य शासन द्वारा निर्धारित समय सीमा में की जाय । नियमों का पूरा ध्यान रखा जाय । नियमितकरण के लिये अवैध कालोनियो को चिन्हित कर उनकी सूची सार्वजनिक करें। नियमितीकरण की प्रक्रिया जल्द ही शुरू करने के निर्देश उन्होंने दिये।
    कलेक्टर श्री वरवड़े ने बैठक में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिये कि जिले में सभी तैयारियां भारत निर्वाचन आयोग द्वारा दिये गये निर्देशानुसार निर्धारित समयबद्ध कार्यक्रम अनुसार ही की जाय। निर्वाचन कार्य को पूरी गंभीरता से लिया जाय। निर्वाचन कार्य में किसी भी तरह की लापरवाही और उदासीनता बर्दाश्त नहीं की जायेगी। उन्होंने निर्देश दिये कि मतदाता सूची को पूर्ण रूप से शुद्ध बनाया जाय। मतदाता सूची में सभी पात्र मतदाताओं के नाम शामिल किये जाय। मृत्य अथवा अन्यत्र चले गये मतादाताओं के नाम सूची से हटाये जाय। सभी मतदाताओं को फोटोयुक्त मतदाता परिचय पत्र मिल जाय, यह भी सुनिश्चित किया जाय। सभी अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों के मतदान केन्द्रों की युक्तियुक्तकरण का कार्य निर्धारित मापदण्ड अनुसार मतदाताओं की सुविधा के अनुसार ही करें। युक्तियुक्तकरण कार्य में जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों का भी सहयोग लें।
    बैठक में कलेक्टर श्री वरवड़े ने पट्टा अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन की प्रगति की समीक्षा भी की। उन्होंने पट्टा बनाने के कार्य को भी जल्दी ही पूरा करने के निर्देश दिये। उन्होंने यह भी निर्देश दिये कि इंदौर शहर में राजस्व विभाग द्वारा जिस भी सेवादार को भूमि दी गई है, वह भूमि वापस लेकर नजूल में दर्ज की जाय। राजस्व संबंधी प्रकरणों को भी समय-सीमा में निराकृत करने के निर्देश दिये।
क्रमांक 11/1056//महिपाल/विजय
कैरियर काउंसलर हेतु आवेदन आमंत्रित
इंदौर 02 मई 2018
    जिला रोजगार कार्यालय में वर्ष 2018-19 हेतु मध्यप्रदेश शासन की कैरियर काउंसिलिंग योजनांतर्गत कैरियर मार्गदर्शन काउंसलर एवं मनोवैज्ञानिक के गेस्ट पैनल के नामांकन हेतु 08 मई 2018 तक आवेदन आमंत्रित किये गये हैं। जिस हेतु निर्धारित योग्यता स्नातकोत्तर डिग्री मनोवैज्ञानिक विषय के साथ उत्तीर्ण होना आवश्यक है या गाइडेन्स काउंसलर हेतु पी.जी. डिग्री या पी.जी. डिप्लोमा की प्रोफेशनल डिग्री आवश्यक हैं। कैरियर काउंसिलिंग के क्षेत्र में अनुभव रखने वाले एवं कम्प्यूटर ज्ञान रखने वाले आवेदक और आवेदिकाओं को प्राथमिकता दी जायेगी। यह किसी प्रकार के जॉब के लिए आवेदन नहीं हैं। नामांकित आवेदकों को आवश्यकता अनुसार समय-समय पर कैरियर काउंसिलिंग हेतु निर्धारित मानदेय पर बुलाया जायेगा। आवेदल पत्र निर्धारित तिथि के पूर्व कार्यालय के ई-मेल आई. डी. deoindor@gmail.com पर संपूर्ण बायोडेटा के साथ आवेदन भेज सकते है या जिला रोजगार कार्यालय इंदौर से कार्यालयीन समय में प्रस्तुत किये जा सकते हैं।
क्रमांक/09/1055/सिंह/जी
निकाय स्तरीय शहरी नियोजन दल गठित
इंदौर 02 मई 2018
    राज्य शासन के निर्देशानुसार कलेक्टर श्री निशांत वरवड़े ने जिले की नगरीय निकाय महू, मानपुर, बेटमा, हातौद, देपालपुर, गौतमपुर, सांवेर, और राऊ के लिए निकाय स्तरीय शहरी नियोजन दल का गठन किया हैं। इस दल में ब्लॉक मेडिकल आफिसर, खण्ड शिक्षा अधिकारी, विकास खण्ड स्त्रोत समन्वयक, सहायक यंत्री या उपसंत्री नगर पंचायत, परियोजना अधिकारी महिला एवं बाल विकास, सहायक यंत्री म.प्र. विद्युत वितरण कंपनी, सहायक यंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, विकास खण्ड समंवयक जन अभियान परिसद को सदस्य और सीएमओ नगर पंचायत को सदस्य सचिव नियुक्त किया गया हैं।
    निकाय स्तरीय शहरी नियोजन दल को नगरीय क्षेत्र में संचालित विभिन्न सेवाओं और अधोसंरचनात्मक कार्यों के संचालन करने वाले विभागीय अधिकारियों एवं स्वयंसेवी संस्थाओं को सम्मिलित करके दल का गठन करेंगें तथा नगरीय क्षेत्रों को तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध करायेगें एवं निकायों की योजनाओं समेकित कर नगर परिषद को प्रषित करना सुनिश्चित करेगें।
अधिकारीगण टीम भावना से काम करें- कमिश्नर श्री सिंह
इंदौर संभाग में शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग में आवश्यक सुधार जरूरी
लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को बक्शा नहीं जायेगा
इंदौर 02 मई 2018
    कमिश्नर श्री राघवेन्द्र सिंह ने कहा है कि इंदौर संभाग में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, श्रमिक कल्याण और किसान कल्याण योजना के संबंध में विशेष ध्यान दिया जायेगा। संभाग में शिक्षा पुनरूत्थान योजना लागू की जायेगी, जिससे शिक्षा के क्षेत्र में सुधार आ सके। शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता सुधार के लिए शिक्षा पुनरूत्थान योजना के तहत ऑडियो-विजुअल क्लासेस शुरू की जायेगी, जिससे विद्यार्थियों की हर विषय पढ़ाई हो सके। उन्होने कहा कि शिक्षा विभाग के स्कूलों का आकास्मिक निरीक्षण किया जायेगा तथा दोषी पाये जाने पर अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही की जायेगी। स्कूलों में साधन भले ही कम हो, मगर शिक्षा में एक वर्ष की भीतर सुधार परिलक्षित होना चाहिए। श्री सिंह आज इंदौर संभाग के संभागीय अधिकारियों से कमिश्नर कार्यालय संभाकक्ष में चर्चा कर रहे थे। इस अवसर पर शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, उद्यानिकी, खाद्य, श्रम, नगरी प्रशासन आदि विभागों के संभागीय अधिकारी मौजूद थे।
    श्री सिंह ने कहा कि इंदौर संभाग को पूरे प्रदेश में नं. 1 बनाना हैं। आदिवासी बहुल जिलों में बहुत अधिक काम करने की जरूरत हैं। उन्होने पेयजल की समीक्षा करते हुए कहा कि इंदौर संभाग की बंद नल-जल योजनाएं एक माह के भीतर शुरू कर दी जाए। सभी 2 हजार 290 नल-जल योजनाओं का ठीक ठंग से संधारण शुरू किया जाये। हेडपम्पों की रिपेयरिंग समय-सीमा में की जाए। सभी ग्रामों में पेयजल सुविधा जरूरी हैं। उनके द्वारा आने वाले समय में ग्रामीण क्षेत्रों को दौरा किया जायेगा। उन्होने कहा कि बंद नल-जल योजनाओं में बिलजी कनेक्शन और टयूबवेल खनन सुनिश्चित किया जाये। राज्य शासन से संभाग में आबादी के अनुपात में ट्यूबवेल खनन के लिए आवश्यक बजट प्राप्त किया जाये। ज्ञातव्य है कि इंदौर संभाग में लगभग 86 हजार हैंडपम्प हैं, जिसमें से 95 प्रतिशत चालू स्थिति में हैं।
असंगठित श्रमिकों का शासन की योजनाओं का लाभ दिलाने के निर्देश
    कमिश्नर श्री सिंह ने नगरीय निकाय, ग्रामीण विकास और श्रम विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि इंदौर संभाग में सभी पात्र श्रमिकों का पंजीयन कर उन्हें शासन की कल्याणकारी योजनाओं का अधिकाधिक लाभ दिलाये। श्रमिकों का पंजीयन करते समय उनके पते और व्यवसाय का सत्यापन जरूरी है। उन्होने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल में सुधार लाकर इंदौर संभाग को मानव विकास सूचकांक में बेहतर श्रेणी में लाना हैं।
जच्चा-बच्चा का कीटाकरण जरूरी
कमिश्नर श्री सिंह ने स्वास्थ्य विभाग में समीक्षा करते हुए कहा कि संभाग में सभी जच्चा-बच्चा का कीटाकरण जरूरी हैं। उन्‍होने संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। उन्होने कहा कि जननी सुरक्षा एक्सप्रेस सभी जिलों में चलना चाहिए। अस्पतालों में चिकित्सकों और स्टॉफ की समय पर उपस्थिति जरूरी हैं। गरीबों के इलाज में किसी प्रकार की कोताही बर्दास्त नहीं की जायेगी।
    कृषि विभाग की समीक्षा करते हुए श्री सिंह ने कहा कि इंदौर संभाग में 80 प्रतिशत लोग कृषि पर निर्भर हैं1 राज्य शासन की मंशा में अनुरूप संभाग में किसानों की माली हालत सुधारना जरूरी हैं1 ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि विस्तार अधिकारी किसानों को स्थानीय भाषा में किसानों को खेती-किसानी के गुण सिखाए। मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर फसलवार किसानों को खाद इस्तेमाल की जानकारी दें। उन्होने बैठक में भावांतर भुगतान योजना और समर्थन मूल्य पर गेंहू और चना की खरीदी की भी समीक्षा की। उन्होने अधिकारियों से टीम भावना से काम करने की अपील की। बैठक में संयुक्त आयुक्त विकास श्रीमती चेतना फौजदार भी मौजूद थी।

मुख्यमंत्री युवा इंजीनियर-कान्ट्रेक्टर योजना


प्रदेश के अधोसंरचना विकास कार्यों में योगदान के लिये प्रदेश के युवा अभियंताओं को कान्ट्रेक्टर के रूप में क्षमता विकसित करने के उद्देश्य से 'मुख्यमंत्री युवा इंजीनियर-कांट्रेक्टर योजना'' तैयार की गई है। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की 16 जनवरी, 2013 को युवा पंचायत में की गई घोषणा के अनुपालन में 14 अगस्त 2013 को मंत्रि-परिषद् ने योजना को मंजूरी दी।
योजना के क्रियान्वयन के लिये लोक निर्माण विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है। योजना में किसी भी संकाय के इंजीनियरिंग में डिग्रीधारी 500 युवा अभियंता को 6 माह का प्रशिक्षण (इन्टर्नशिप) दिया जायेगा। प्रारंभिक वर्ष में प्रायोगिक तौर पर 500 युवा अभियंता को प्रशिक्षण का लक्ष्य रखा गया है। आगामी वर्षों में लक्ष्य और उपलब्धि का पुनरावलोकन कर लक्ष्य प्रतिवर्ष निर्धारित किया जायेगा। प्रशिक्षण की छह माह की अवधि को तीन भाग में विभाजित किया गया है। इसमें दो माह एकेडेमिक ट्रेनिंग दी जायेगी। कार्यालयीन ज्ञान तथा विभाग के संबंध में जानकारी के लिये एक माह और मैदानी प्रशिक्षण तीन माह का होगा।
प्रशिक्षु को मध्यप्रदेश का मूल निवासी होना आवश्यक है। आवेदक डिग्री करने के 3 वर्ष के अंदर ही आवेदन कर सकता है। आवेदकों की संख्या अधिक होने पर प्रशिक्षु का चयन लॉटरी द्वारा किया जा सकेगा। प्रशिक्षुओं के चयन में राज्य सरकार द्वारा जारी सेवा भर्ती नियमों में अनुसूचित जाति, जनजाति और महिला वर्ग के लिये निर्धारित आरक्षण कोटे का पालन किया जायेगा।
प्रशिक्षण अवधि में स्नातक अभियंता को 5000 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जायेगा। मैदानी प्रशिक्षण के समय मैदानी भत्ते के रूप में 2000 रुपये प्रतिमाह अतिरिक्त दिया जायेगा। योजना में प्रशिक्षित युवा इंजीनियर कांट्रेक्टर को निविदा शर्तों में प्रावधान अनुसार उप ठेके (सब लेट्टिंग) के माध्यम से प्रतिष्ठित ठेकेदारों से भी जोड़ा जायेगा। प्राप्त अनुभव से युवा आगामी ठेके ले सकेंगे।
प्रशिक्षण के बाद युवा इंजीनियरों को राज्य शासन की केन्द्रीयकृत पंजीयन प्रणाली के अंतर्गत 'सी' श्रेणी में पंजीकृत किया जा सकेगा, लेकिन मध्यप्रदेश अनुज्ञापन मण्डल (विद्युत) विनियमन 1960 की पूर्ति के लिये विद्युत वितरण, ट्रांसमिशन और उत्पादन से संबंधित कार्यों के लिये ठेकेदारों को 'ए' और 'बी' श्रेणी के विद्युत लायसेंस धारक होने की आवश्यकता यथावत बनी रहेगी। योजना में प्रशिक्षित इंजीनियर मुख्यमंत्री युवा स्व-रोजगार योजना में 25 लाख रुपये तक ऋण प्राप्त कर सकेंगे।

मुख्यमंत्री युवा इंजीनियर-कान्ट्रेक्टर योजना


प्रदेश के अधोसंरचना विकास कार्यों में योगदान के लिये प्रदेश के युवा अभियंताओं को कान्ट्रेक्टर के रूप में क्षमता विकसित करने के उद्देश्य से 'मुख्यमंत्री युवा इंजीनियर-कांट्रेक्टर योजना'' तैयार की गई है। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की 16 जनवरी, 2013 को युवा पंचायत में की गई घोषणा के अनुपालन में 14 अगस्त 2013 को मंत्रि-परिषद् ने योजना को मंजूरी दी।

योजना के क्रियान्वयन के लिये लोक निर्माण विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है। योजना में किसी भी संकाय के इंजीनियरिंग में डिग्रीधारी 500 युवा अभियंता को 6 माह का प्रशिक्षण (इन्टर्नशिप) दिया जायेगा। प्रारंभिक वर्ष में प्रायोगिक तौर पर 500 युवा अभियंता को प्रशिक्षण का लक्ष्य रखा गया है। आगामी वर्षों में लक्ष्य और उपलब्धि का पुनरावलोकन कर लक्ष्य प्रतिवर्ष निर्धारित किया जायेगा। प्रशिक्षण की छह माह की अवधि को तीन भाग में विभाजित किया गया है। इसमें दो माह एकेडेमिक ट्रेनिंग दी जायेगी। कार्यालयीन ज्ञान तथा विभाग के संबंध में जानकारी के लिये एक माह और मैदानी प्रशिक्षण तीन माह का होगा।

प्रशिक्षु को मध्यप्रदेश का मूल निवासी होना आवश्यक है। आवेदक डिग्री करने के 3 वर्ष के अंदर ही आवेदन कर सकता है। आवेदकों की संख्या अधिक होने पर प्रशिक्षु का चयन लॉटरी द्वारा किया जा सकेगा। प्रशिक्षुओं के चयन में राज्य सरकार द्वारा जारी सेवा भर्ती नियमों में अनुसूचित जाति, जनजाति और महिला वर्ग के लिये निर्धारित आरक्षण कोटे का पालन किया जायेगा।

प्रशिक्षण अवधि में स्नातक अभियंता को 5000 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जायेगा। मैदानी प्रशिक्षण के समय मैदानी भत्ते के रूप में 2000 रुपये प्रतिमाह अतिरिक्त दिया जायेगा। योजना में प्रशिक्षित युवा इंजीनियर कांट्रेक्टर को निविदा शर्तों में प्रावधान अनुसार उप ठेके (सब लेट्टिंग) के माध्यम से प्रतिष्ठित ठेकेदारों से भी जोड़ा जायेगा। प्राप्त अनुभव से युवा आगामी ठेके ले सकेंगे।

प्रशिक्षण के बाद युवा इंजीनियरों को राज्य शासन की केन्द्रीयकृत पंजीयन प्रणाली के अंतर्गत 'सी' श्रेणी में पंजीकृत किया जा सकेगा, लेकिन मध्यप्रदेश अनुज्ञापन मण्डल (विद्युत) विनियमन 1960 की पूर्ति के लिये विद्युत वितरण, ट्रांसमिशन और उत्पादन से संबंधित कार्यों के लिये ठेकेदारों को 'ए' और 'बी' श्रेणी के विद्युत लायसेंस धारक होने की आवश्यकता यथावत बनी रहेगी। योजना में प्रशिक्षित इंजीनियर मुख्यमंत्री युवा स्व-रोजगार योजना में 25 लाख रुपये तक ऋण प्राप्त कर सकेंगे।