संभागायुक्त श्री संजय दुबे के प्रयास से इंदौर अंगदान की राजधानी बना
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इंदौर में 21 माह में 23वीं बार अंगदान हुआ
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तीन ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से अंग जरूरतमंदों तक पहुचाये गये
इंदौर 26 जुलाई, 2017
संभागायुक्त श्री संजय दुबे के द्वारा इंदौर में अंगदान के लिए एक प्रयास किया गया था, आज वो सिलसिला एक पंरपरा बना गया है। विगत 21 माह में 23 परिवारों ने अंगदान के लिए अपनी सहमति देते हुए पूरे देश मे इंदौर को अंगदान की राजधानी के रूप में स्थापित कर दिया है। नोटो ( नेशनल आर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट आर्गेनाईजेशन) के द्वारा भी इंदौर में अंगदान की प्रक्रिया को सराहा गया है। पिछले करीब 21 माह में 23 बार ब्रैनडेथ रोगियों के अंगदान सम्पन्न हुए एवम देशभर के 130 से भी ज्यादा जरूरतमंद रोगियों को अंग प्रत्यरोपण से नवजीवन मिला है।
25 जुलाई,2017 मंगलवार को ब्रैन डेथ के उपरांत मंदसौर निवासी श्रीमती अर्चना पति राकेश दोसी का दिल,लीवर, किडनी, त्वचा एवं आँख दान मेदांता हॉस्पिटल इंदौर में सम्पन्न हुआ ।श्रीमती अर्चना पति राकेश दोसी (उम्र 42 वर्ष) की 23 जुलाई को ब्रेन हेमरेज हुआ था, जिन्हें उपचार हेतु मेदांता हॉस्पिटल इंदौर में भर्ती किया गया था। 25 जुलाई को डॉक्टरों ने जांच के दौरान पाया गया कि श्रीमती अर्चना दोसी के दिमाग ने काम करना बंद कर दिया है। इस पर डॉक्टरों की टीम ने दो बार छह घण्टे के अंतराल से पुन: परीक्षण किया और श्रीमती अर्चना दोसी को ब्रेनडेथ घोषित किया। परिवार से सम्पर्क करने पर उन्हें इंदौर सोसायटी फॉर आर्गन डोनेशन और मुस्कान ग्रुप के द्वारा अंगदान के लिये प्रेरित किया गया। परिवार से सहमति मिलने के बाद अंगदान की प्रक्रिया प्रारंभ की गयी। अंगदान के संबंध में नोटो को भी सूचना दी गयी। स्वर्गीय श्रीमती अर्चना दोसी के एक पुत्र और एक पुत्री हैं,जिनके द्वारा भी अपनी माँ के अंगदान के लिये सहमति प्रदान की गयी।
अंगदान की प्रक्रिया में हृदय का प्रत्यारोपण मेदांता हॉस्पिटल में ही किया जाना सुनिश्चित हुआ। चिन्हित जरूरतमंद को हॉस्पिटल में एडमिट कर प्रक्रिया प्रारंभ की गयी। हृदय का प्रत्यारोपण मेदांता हॉस्पिटल में रोगी को प्रत्यारोपित किया गया। मेदान्ता हॉस्पिटल से सुबह 11.25 बजे लीवर के लिये पहला ग्रीनकॉरिडोर के चोइथराम हॉस्पिटल के लिये बनाया गया। लीवर 13 मिनट में मेदांता से चोइथराम हॉस्पिटल पहुंचा। दूसरा ग्रीन कॉरिडोर 11.25 मिनट पर किडनी के लिये बना, जो बॉम्बे हॉस्पिटल 2.45 मिनिट में पहुंचा। तीसरा ग्रीन कारीडोर 11.46 बजे बनाया गया, जो दूसरी किडनी लेकर 3.40 मिनट में ग्रेटर कैलाश हॉस्पिटल पहुंचा।
इंदौर सोसाइटी फॉर ऑर्गन डोनेशन द्वारा लंगस एवं पेनक्रियाज हेतु भी पूरे भारत भर में संपर्क किया गया था परंतु योग्य रोगी उपलब्ध नहीं होने से वहां संभव नहीं हो सके। इस पूरे कार्य में नोटो कार्यालय से सतत संपर्क बनाए रखा गया । दोसी परिवार जिन्होंने विपरीत समय में भी अनोखी मिसाल प्रस्तुत की। उल्लेखनीय है कि अंगदान की स्वीकृति हेतु श्रीमती अर्चना के जेठ श्री वीरेंद्र कुमार एवं पति श्री राकेश ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। आप दोनों के ही सब प्रयासों से परिवार में अंगदान का वातावरण बना एवं अंगदान की स्वीकृति दी। एमके इंटरनेशनल आई बैंक के टेक्नीशियन टीम में आंखें एवं चोइथराम हॉस्पिटल स्किन बैंक द्वारा स्किन कलेक्शन चोइथराम हॉस्पिटल इंदौर में ही संपन्न किया।
संभागायुक्त श्री संजय दुबे एवं इंदौर सोसाइटी फॉर ऑर्गन डोनेशन के सह सचिव डॉक्टर श्री संजय दीक्षित की अगुवाई में पूरी कार्य व्यवस्थाओं में प्रशासन ट्रैफिक पुलिस, सभी चिकित्सा संस्थान एवं मुस्कान ग्रुप सेवादारों का अभूतपूर्व सहयोग रहा। यह प्रथम अवसर था जब मेदांता हॉस्पिटल में अंगदान संपन्न हुए टीम मेदांता का एवं मेदांता के ऑर्गन ट्रांसप्लांट को-आर्डिनेटर श्रीमती प्रीति सैनी सहयोग प्राप्त हुआ।
उल्लेखनीय है कि इन्दौर मे अंग दान के क्षेत्र मे इंदौर सोसाइटी फार ऑर्गन डोनेशन के बनने के बाद बेहद चेतना व उत्साह जनक वातवरण निर्मित हुआ । सोसाइटी द्वारा बोनमेरो डोनेशन सेंटर एवं हार्ट वाल्व बेंक की स्थापना हेतु भी प्रयास किया जा रहा है।