Thursday, 9 February 2017


लोक अदालत के लिये 8 खण्डपीठों का गठन
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लोक अदालत में दोनों पक्षों की सहमति से होते हैं फैसले
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लोक अदालत के फैसले के विरूद्ध वरिष्ठ न्यायालय में अपील नहीं हो सकती
इंदौर 9 फरवरी, 2017
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इंदौर में 11 फरवरी, 2017 को नेशनल लोक अदालत का आयोजन प्रशासनिक न्यायमूर्ति श्री पी.के.जायसवाल के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। नेशनल लोक अदालत के माध्यम से न्यायालयों में लंबित विभिन्न प्रकार के प्रकरणों का निराकरण सभी स्तर- सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट एवं जिला न्यायालयों तथा तहसील न्यायालयों में सुलह एवं समझौते के आधार पर किया जाना है।
11 फरवरी, 2017 को आयोजित की जाने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत में आपराधिक शमनीय प्रकरण, परकाम्य अधिनियम की धारा 138 के अंतर्गत प्रकरण, बैंक रिकवरी संबंधी मामले, मोटर दुर्घटना क्षतिपूर्ति दावा प्रकरण, वैवाहिक प्रकरण, श्रम विवाद प्रकरण, भूमि अधिग्रहण के प्रकरण, विद्युत एवं जल कर और बिल संबंधी प्रकरण (चोरी के मामलों को छोड़कर, बिजली तथा जल चोरी के प्रकरण जो कि विधि के अधीन समझौता योग्य हैं, रखे जा सकते हैं), सेवा मामले, जो सेवा निवृत्त संबंधी लाभों से संबंधित है, राजस्व प्रकरण, दीवानी मामले तथा अन्य समस्त प्रकरण के राजीनामा योग्य, प्रकरणों का निराकरण आपसी समझौते के आधार पर किया जायेगा। नेशनल लोक अदालत में प्रकरणों के निराकरण बाबत नेशनल लोक अदालत के लिये उच्च न्यायालय खण्डपीठ इंदौर के लिये 8 खण्डपीठों का गठन किया है।
उच्च न्यायालय के पिं्रसिपल रजिस्ट्रार श्री देवेन्द्र सिंह सोलंकी ने समस्त पक्षकारों एवं अधिवक्तागण से अनुरोध किया है कि उच्च न्यायालय में लंबित प्रकरणों को नेशनल लोक अदालत के माध्यम से सुलह एवं समझौते के आधार पर निराकृत कराने के लिये मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खण्डपीठ इंदौर में पिं्रसिपल रजिस्ट्रार, डिप्टी रजिस्ट्रार, संबंधित सेक्शन एवं मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति इंदौर से सम्पर्क कर सकते हैं और अपने प्रकरणों को नेशनल लोक अदालत में रखने हेतु आवेदन या सूचना दे सकते हैं। लोक अदालत में परस्पर सहमति से फैसले होते हैं। इस फैसले के खिलाफ किसी भी न्यायालय में अपील नहीं की जा सकती।
श्व्
सिंह/कपूर

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