Thursday, 29 June 2017

खरीफ 2017 सोयाबीन कृषकों के लिए उपयोगी सलाह
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भूमि में पर्याप्त नमी होने की स्थिति में ही बोनी करें
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रोगों से बचाव हेतु बीजोपचार अवश्य करें
इंदौर 29 जून, 2017
सोयाबीन की खेती किये जाने वाले क्षेत्रों में मानसून का आगमन होने की सूचना प्राप्त हो चुकी हैं। सोयाबीन की बोवनी के लिए जून के तृतीय सप्ताह से जुलाई माह के प्रथम सप्ताह तक अत्यंत उपयुक्त होता हैं। इस स्थिति में सोयाबीन कृषकों को निम्न सलाह दी जाती हैं - मानसून के आगमन के पश्चात भूमिमें पर्याप्त नमी होने की स्थिति में सोयाबीन की बोवनी करें। सोयाबीन के बीज का आकार एंव अंकुरण क्षमता (न्यूनतम 70)के अनुसार छोटे दाने वाली प्रजातियों का बीज दर 55-60 कि.ग्रा. प्रति हेक्टेयर, मध्य आकार की किस्म के लिये 60-65 कि.ग्रा प्रति हेक्टेयर एवं बड़े दाने वाली किस्म के बीज का 70-75 कि.ग्रा. प्रति हेक्टेयर रखें। बीज का अंकुरण 70 प्रतिशत से कम होने पर उसी अनुपात से बीज दर बढ़ाकर बोवनी करें। सोयाबीन बोवनी करते समय बीज की गहराई अधिकतम 3 से.मी. एवं कतार से कतार की दूरी 45 से.मी. का प्रयोग करें। 
विभिन्न रोगों से बचाव विशेषत: पीला मोजाइक बीमारी के लिए सुरक्षात्मक तरीके के रूप में बोवनी के समय सोयाबीन के बीज को अनुशंसित फफॅूद नाशक थायरम एवं कार्बेन्डाजिम 21 अनुपात में (3 ग्राम प्रति कि.ग्रा. बीज) उपचारित करने के तुरंत बाद अनुशंसित कीटनाशक थायोमिथाक्सम 30 एफ.एस (10 मि.ली प्रति कि.ग्रा. बीज) या इमीडाक्लोप्रिड 48 एफएस (1.25 मि.ली प्रति कि.ग्रा. बीज) से उपचारित करें। तत्पश्चात राइझोबियम पी.एस.एम कल्चर का प्रयोग करें। रासायनिक फफूंदनाशक (थायरम/कार्बेन्डिजम) के स्थान पर जैविक फफूंदनाशक ट्रायकोडर्मा विरीडी (8-10 ग्राम /कि.ग्रा बीज) का उपयोग किया जा सकता हैं लेकिन इसका उपयोग कीटनाशक से उपचारित करने के पश्चात राइजोबियम पी.एस.एम कल्चर के साथ में उपयोग किया जा सकता हैं।
वर्षा की अनिश्चितता एंव सूखे की समस्या के कारण सोयाबीन की फसल में होने वाली संभावित उत्पादन में कमी को देखते हुए बी.बी.एफ सीड ड्रील फब्र्स सीड ड्रील का उपयोग कर सोयाबीन की बोवनी करें। इन मशीनों की उपलब्धता न होने पर सुविधानुसार 6 से 9 कतारों के पश्चात् देशी हल चलाकर नमी संरक्षण नालियां बनाएं। सोयाबीन की फसल में पोषण प्रबंधन हेतु अनुशंसित पोषक तत्वों की मात्रा नत्रजन, स्फुर, पोटाश एंव गंघक बोवनी के समय ही सुनिश्चित करें। बोवनी के तुरंत बाद उनयोग में लाये जाने वाले अनुशंसित खरपतवार नाशक जैसे डायक्लोसूलम (26 ग्राम प्रति हेक्टेयर) या सल्फेन्ट्राजोन (750 मि.ली. प्रति हेक्टेयर) या पेन्डीमिथिलीन (3.25 ली. प्रति हेक्टेयर) की दर से किसी एक खरपतवार नाशक का चयन कर 500 लीटर पानी के साथ फ्लेड जेट या फ्लेड फेन नोझल (कट नोझल) का उपयोग कर समान रूप से खेत में छिडकाव करें। एकल पद्धति की तुलना में सोयाबीन की अंर्तवर्तीय खेती आर्थिक रूप से अधिक लाभकारी एंव स्थिर होती हैं। सलाह है कि सोयाबीन/मक्का/ ज्वार/ अरहर/ कपास को 4:2 के अनुपात में 30 से.मी. कतारों की दूरी पर बोबनी करें। अंर्तवर्तीय फसल की स्थिति में केवल पेन्डीमिथलीन नामक बोवनी पूर्व खरपतवार नाशक का ही प्रयोग करें। 
संयुक्त संचालक कृषि ने बताया कि जिन किसानों ने बोबनी के तुरंत बाद उपयोगी अनुशंसित खरपतवार नाशक का प्रयोग नहीं किया हो, सोयाबीन की फसल 15 दिन की होने की पर खड़ी फसल में अनुशंसित खरपतवारनाशक जैसे क्लोरीम्यूरान इथाइल (36 ग्राम प्रति हेक्टेयर) या इमाझेथापायर (1.0 ली. प्रति हेक्टेयर) या क्विजालोफाप इथाइल (1.0 ली. प्रति हेक्टेयर) या क्विजालोफॉप-पी-टेफूरील (1.0 ली. प्रति हेक्टेयर) या फेनाक्सीफॉप-पी-ईथाइल (0.75 ली. प्रति हेक्टेयर) में से किसी एक का 500 लीटर पानी के साथ फ्लेड जेट या फ्लेड फेन नोझल (कट नोझल) का उपयोग कर समान रूप से खेत में छिड़काव करें।
सिंह/गरिमा

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