Sunday, 25 March 2018

प्रदेश से वर्ष 2025 तक टी.बी. उन्मूलन का लक्ष्य- मंत्री श्री रूस्तम सिंह
टी.बी. मरीजों को एक अप्रैल से हर माह मिलेगी 500 रुपये की पोषण-आहार राशि
इंदौर, 25 मार्च 2018      
      लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री रुस्तम सिंह ने बताया है कि प्रदेश में वर्ष 2025 तक टी.बी. उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने बताया कि एक अप्रैल, 2018 से प्रदेश में टी.बी. के मरीजों को उपचार से निदान तक प्रति माह 500 रुपये की राशि पोषण-आहार के लिये दी जायेगी। साथ हीपुनरीक्षित राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण कार्यक्रम में जिलों में निजी चिकित्सकों द्वारा टी.बी. मरीज का नोटिफिकेशन पर 500 रुपये और उसके ठीक होने की जानकारी देने पर फिर 500 रुपये की राशि प्रोत्साहन स्वरूप दी जायेगी।
      प्रदेश में वर्ष 2011 से मल्टी ड्रग रेजीस्टेंट (एमडीआर)डॉट प्लस उपचार योजना सम्पूर्ण प्रदेश में क्षय रोगियों के निदान एवं उपचार के लिये लागू है। इसमें भोपालइंदौर एवं जबलपुर में आधुनिक लैब (सी एण्ड डीएसटी) और 51 जिलों में सीबीएनएएटी मशीनें स्थापित कर क्षय रोगियों का निरूशुल्क उपचार किया जा रहा है। एमडीआर क्षय रोगियों के उपचार के लिये भोपालइंदौरउज्जैनसागररीवाछिंदवाड़ानौगाँव (छतरपुर)ग्वालियर और जबलपुर में डीआर टी.बी. सेंटर संचालित हैं।
      स्वास्थ्य मंत्री ने प्रदेश के लोगों से टी.बी. रोग के संक्रमण के प्रति सावधानी बरतने की अपील करते हुए कहा कि दो सप्ताह या उससे अधिक खाँसीशाम के समय बुखार,वजन में कमीभूख न लगनाखखार के साथ खून और रात में पसीना आयेतो चिकित्सक से अवश्य सलाह लें।
      स्वास्थ्य मंत्री श्री सिंह ने बताया कि टी.बी. के निदान के लिये प्रदेश में पुनरीक्षित राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण कार्यक्रम लागू है। प्रदेश के सभी जिलों में सीबी नॉट मशीनें स्थापित हैं। अक्टूबर-2017 से सभी जिलों में टी.बी. का डेली रेजीमेन (कोर्स) और जनवरी-2018 से टी.बी. निदान के लिये यूनिवर्सल डीएसटी सुविधा शुरू की गई है। इससे मरीज के ऊपर दवा के प्रभाव का अध्ययन आसान हो गया है।
टी.बी. मरीज को अधिसूचित न करने पर होगी कानूनी कार्यवाही
      स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि केन्द्र शासन ने 16 मार्च, 2018 को एक अधिसूचना जारी की हैजिसमें यदि क्लीनिकल संस्थाफार्मेसी और दवा विक्रेता द्वारा क्षय रोगी को नोडल अधिसूचित नहीं करनेक्षय रोगी की अधिसूचना मिलने पर जन-स्वास्थ्य संबंधी कार्यवाही नहीं करने पर भारतीय दण्ड संहिता की धारा-269 और 270 के उपबंधों के अनुसार कार्यवाही की जायेगी। इसमें धारा-269 में लापरवाहीपूर्ण कार्यजिससे जीवन के लिये खतरनाक रोग के संक्रमण की संभावना होमें 6 माह तक कारावास की सजा या जुर्माना या दोनों किये जा सकेंगे। धारा-270 में द्वेषपूर्ण ढंग से किया गया कार्यजिससे जीवन के लिये खतरनाक रोग के संक्रमण की संभावना होमें 2 वर्ष तक का कारावास या जुर्माना या दोनों सजाएँ हो सकेंगी।
क्रमांक/246/776/राठौर/विजय

No comments:

Post a Comment