अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में इन्दौर ने बनाई अपनी
अलग पहचान - कमिश्नर श्री संजय दुबे
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देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में हेल्थ कॉन्क्लेव का आयोजन
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"रूद्राक्ष' हेल्थ मैनेजमेन्ट क्लब का हुआ शुभारम्भ
इन्दौर 27 मार्च, 2017
इन्दौर देश का मेडिकल हब बनता जा रहा है। इन्दौर मध्यप्रदेश का ही नहीं मध्यभारत का पहला शहर है, जहां सबसे पहले सफल ह्मदय प्रत्यारोपण किया गया है। देश में ही नहीं दुनिया के अन्य देशों में इन्दौर ने अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। अंगदान कर जिन्होंने दूसरों को जीवन दिया है वे हमारे लिये असली सेलिब्रिाटी हैं। उक्त विचार देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में इंस्टीट¬ूट ऑफ मैनेजमेंट द्वारा सोमवार को आयोजित हेल्थ कॉन्क्लेव में कमिश्नर श्री संजय दुबे ने व्यक्त किये। कॉन्क्लेव का विषय ""एडवांस इन हेल्थ केयर मैनेजमेंट'' रखा गया था। इस अवसर पर कमिश्नर श्री दुबे ने इंस्टीट¬ूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज के "रूद्राक्ष' नाम से हेल्थ मैनेजमेंट क्लब को भी लॉन्च किया।
कमिश्नर श्री संजय दुबे ने कहा कि अंग प्रत्यारोपण बहुत ही चुनौतीपूर्ण कार्य है। इस क्षेत्र से जुड़े सभी विभागों के समन्वित प्रयासों और टीम वर्क के बिना यह संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में हमारे देश में अंगदान सबसे बड़ी बाधा है। लोग शरीरदान करना चाहते हैं, किन्तु प्रक्रियाओं की बाधा भी एक बड़ी समस्या है। उन्होंने कहा कि जर्मनी जैसे विकसित देश में जहाँ दस लाख व्यक्तियों पर 35 लोग अंगदान के लिये आगे आते हैं वहीं भारत में केवल 0.18 लोग ही शरीरदान करते हैं। हमारे देश में ही दक्षिण के राज्य अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में उत्तरी राज्यों से काफी आगे है। कमिश्नर श्री दुबे ने कहा कि इन्दौर ने ह्मदय के साथ ही किडनी, लीवर, नेत्र व अन्य अंगों के प्रत्यारोपण में अपनी पहचान बनाई है। अब इन्दौर को बोनमेरो प्रत्यारोपण की दिशा में आगे बढ़ना है, ताकि केंसर रोगियों को जीवनदान मिल सके। उन्होंने अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में आने वाली चुनौतियों व बाधाओं के संबंध में भी विस्तार से बताया।
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के कुलपति श्री नरेन्द्र धाकड़ ने कॉन्क्लेव की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि इन्दौर शहर स्मार्ट सिटी में शामिल है। इन्दौर एजुकेशन व मेडिकल हब बनने की ओर अग्रसर है। अंग प्रत्यारोपण के मामले में काफी अग्रणी हो गया है। इसका सबसे बड़ा श्रेय कमिश्नर श्री संजय दुबे को जाता है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर अब वास्तव में भगवान हो गए हैं, क्योंकि ब्रोन डेथ के अंग बदलकर वे अन्य लोगों को जीवन दे रहे हैं। इन्दौर में कई संस्थाएँ ऐसी हैं जो लोगों को अंगदान कर दूसरों को जीवन देने के लिये प्रेरित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न प्रकार की चुनौतियों व बाधाओं के बाद भी इन्दौर शहर अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में पहचान बनाने में सफल रहा है। समय व तकनीकी तेजी से बदलते जा रहे हैं। अग्रणी बने रहने के लिये इस तरह की कॉन्क्लेव की सार्थकता अधिक है, ताकि विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त कर हम आगे बढ़ सकें। कॉन्क्लेव में अतिथिवक्ता प्रो. संजय दीक्षित व प्रो. रजनीश जैन ने भी अपने विचार रखे। अतिथियों का आभार प्रो. निशिकान्त वालकर ने व्यक्त किया। कार्यक्रम के अन्त में अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किये गये।
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