हाई स्कूल एवं हायर सेकेण्डरी परीक्षा के संदर्भ में
विद्यार्थियों एवं अभिभावकों से कलेक्टर की अपील
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एक बेहतर भविष्य विद्यार्थियों का इंतजार कर रहा है-- कलेक्टर श्री पी.नरहरि
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सुख और दुख में समान आचरण जरूरी
इंदौर 7 मार्च, 2017
इस माह से हाई स्कूल एवं हायर सेकेण्डरी, माध्यमिक शिक्षा मंडल की परीक्षाएँ प्रारंभ हो गयी हैं, निश्चित ही इन परीक्षाओं के परिणाम विद्यार्थी के कैरियर के लिये निर्णायक होते हैं। विद्यार्थी सत्र पर्यंत मेहनत करता है, शिक्षक भी अपनी सशक्त एवं सक्रिय भूमिका का निर्वाह करते हैं, अभिभावक भी अपने बच्चों को दी गयी सतत् सुविधाओं से बेहतर परिणाम की अपेक्षा रखते हैं। सभी के समेकित प्रयास से प्राय: अनुकूल परिणाम भी प्राप्त होते हैं। यह सुखद परिणाम को प्रेरित करते हैं।
कुछ विषम परिस्थितियों में अपवाद स्वरूप विद्यार्थी को अभिभावक, शिक्षा तथा समाज की निरंतर स्मरण कराने वाली अपेक्षाओं के कारण, कुछ अधिभार का आभास होता है, जिसके कारण विद्यार्थी कुछ अनुचित साधनों एवं मार्गों की ओर अभिप्रेरित हो जाते हैं, यथा नकल करना, पेपर बिगड़ने पर आत्मघाती कदम इत्यादि।
अभिभावकों एवं बच्चों से कलेक्टर श्री पी.नरहरि ने यह मार्मिक अपील है कि हाई स्कूल एवं हायर सेकेण्डरी परीक्षा का परिणाम जीवन के लिये निर्णायक आवश्यक है, किंतु यह केवल पहली और अंतिम बार नहीं है। हम असफलता की स्थिति में अगले प्रयास में भी इसको अपने अनुकूल बना सकते हैं। हर अच्छा खिलाड़ी भी एक बार जीवन में हारता है, किंतु यह उसकी अंतिम हार नहीं होती, बल्कि अगली जीत के पूर्व का एक अवसर होती है।
उन्होंने अभिभावकों से अपील की है कि अभिभावक एवं शिक्षकों का दायित्व है कि वे बच्चों को निरंतर प्रोत्साहित करें, सकारात्मक रूप से अभिप्रेरित करें, साथ ही यह भी आश्वस्त करें कि आपने इन्हें आवश्यकतानुसार सभी सुविधायें प्रदान की है, आप के बच्चे ने भी उसके अनुरूप निष्ठा एवं लगन से मेहतन की है। अत: ईश्वर इसका सदैव सृजनात्मक सफल परिणाम होगा।
उन्होंने अपील की है कि विद्यार्थीगण यदा-कदा विपरीत स्थिति में किसी त्रुटि के कारण से परेशान नहीं हों, विचलित नहीं हों। यह एक सुनहरा अवसर है, एक बेहतर भविष्य विद्यार्थियों का इंतजार कर रहा है। अत: विद्यार्थी एवं अभिभावक सहित शिक्षक अपनी-अपनी भूमिकाओं के निर्वहन के साथ-साथ अपने दायित्वों की पूर्ति भी करें। एक बेहतर परिणाम का स्वागत करने अथवा किसी विशेष कारण से अपेक्षित परिणाम प्राप्त न होने की दशा में भी समान परिवेश बनाये रखें। श्रीमद् भगवत्गीता में भी कहा गया है कि मनुष्य को सुख और दुख में समान आचरण करना चाहिये।
सिंह/कपूर
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