Thursday, 13 April 2017


बाबा साहेब डॉ. आम्बेडकर जयंती
जन्म स्थली में होगा आज आस्था का महाकुंभ
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सभी तैयारियाँ पूरी
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मेजबान बनकर राज्य शासन कर रहा है 
श्रृद्धालुओं के लिये खाने, ठहरने आदि की व्यवस्था
इंदौर 13 अप्रैल,2017
बाबा साहब डॉ.अम्बेडकर की जयंती पर 14 अप्रैल को उनकी जन्मस्थली अम्बेडकर नगर (महू) में आम्बेडकर महाकुंभ लगेगा । आस्था के इस महाकुंभ में राज्य शासन मेजबान बनकर श्रृद्धालुओं के लिये भोजन, ठहरने, शौचालय आदि की पर्याप्त व्यवस्था कर रहा है। श्रृद्धालुओं के आगमन का सिलसिला शुरू हो गया है। हजारों श्रृद्धालु महू पहुँच चुके हैं।
डा. बाबा साहेब अम्बेडकर की जन्म स्थली अम्बेडकर नगर (महू) में राज्य शासन द्वारा बनाया गया  भव्य स्मारक श्रद्धालुओं की श्रद्धा का केन्द्र बन चुका है। करीब 9 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बने इस स्मारक पर बाबा साहेब के जन्मदिवस 14 अप्रैल के अवसर पर विशेष साज- सज्जा की जाती है। राज्य सरकार द्वारा शुरू किये गये इस महाकुंभ का यह 11वाँ वर्ष है। 
इस स्मारक का शिलान्यास वर्ष 1991 में हुआ था। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने इस स्मारक का निर्माण तेजी से पूरा कराने के लिये वर्ष 2007 में एक साथ 6 करोड़ रुपये से अधिक राशि स्वीकृत की थी। इसके बाद यह भव्य स्मारक बनकर 14 अप्रैल 2008 को लोकार्पित हुआ।
राज्य शासन ने स्मारक के द्वितीय चरण का कार्य तीव्र गति से पूर्ण करने के लिये वर्ष 2005-06 तथा वर्ष 2006-07 में 6 करोड 21 लाख रुपये का आवंटन प्रदान किया। तत्पश्चात 18 दिसम्बर 2006 से द्वितीय चरण का कार्य प्रारंभ कर स्मारक को यह भव्य स्वरूप प्रदान किया गया। तीसरे चरण में स्मारक में बाबा साहब के जीवन पर आधारित भित्ती चित्र तथा मूर्तियाँ लगाने के लिये 2 करोड़ 38 लाख रूपये मंजूर किये।
महू में आस्था का महाकुंभ
भारतीय संविधान के निर्माता डॉ.बाबा साहब अम्बेडकर की जन्म स्थली अम्बेडकर नगर (महू) में हर वर्ष उनका जन्म उत्सव 14 अप्रैल को धूमधाम से मनाया जाता है। इस उत्सव में प्रदेश के साथ ही अन्य प्रदेशों से हजारों श्रद्धालु अम्बेडकर नगर (महू) आते हैं। राज्य शासन मेजबान बनकर श्रद्धालुओं के लिये हर वह व्यवस्था करता है जिससे उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं हो। राज्य शासन ने वर्ष 2007 से अम्बेडकर जन्मस्थली अम्बेडकर नगर (महू) में उनके जन्म दिवस पर अम्बेडकर महाकुंभ लगाने का सिलसिला शुरू किया है। महाकुंभ हर वर्ष श्रद्धालुओं के लिये अविस्मरणीय बनता जा रहा है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान की विशेष पहल पर इस प्रतिष्ठापूर्ण आयोजन का सिलसिला प्रारंभ किया गया है। मुख्यमंत्री इस आयोजन की सतत समीक्षा कर स्वयं इस आयोजन में शामिल होते हैं। 
प्रतिवर्ष 14 अप्रैल को बाबा साहब के जन्म दिन पर अम्बेडकर नगर (महू) में उल्लास और उमंग का अद्भूत वातावरण होता है।  यह महाकुंभ सामाजिक समरसता का भी बेहतर उदाहरण बन गया है। मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र सहित अन्य प्रांतों से लाखों श्रद्धालु इस आयोजन में अपनी श्रद्धा प्रकट करने जुटते हैं। महाकुंभ में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, पूर्व उप प्रधानमंत्री श्री लालकृष्ण आडवाणी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख रहे श्री के.सी. सुदर्शन, बौद्धधर्म गुरू श्री करमापा सहित राष्ट्र की अन्य ख्यातनाम हस्तियां भी शिरकत कर चुकी हैं। 
श्रद्धालुओं के लिये ठहरने, खाने सहित अन्य जरूरी व्यवस्थाओं का माकूल प्रबंध रहता है। इस कार्य में राज्य सरकार के अलावा स्वयं सेवी, सामाजिक तथा अन्य संगठन भी अपना पूरा सहयोग देते हैं। बाबा साहब के जन्म दिवस के महाकुंभ की शुरूआत सुबह उनकी जन्मस्थली पर बने भव्य स्मारक से होती है। यहां उनकी आदमकद प्रतिमा के समक्ष पुष्पहार और आत्मीयता के साथ श्रद्धा सुमन अर्पित किये जाते हैं। सुबह 8 बजे पवित्र अस्थि कलश यात्रा निकाली जाती है।  यह यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होती हुयी स्मारक पर पहुंचती है, स्वर्ग मंदिर परिसर में बने भव्य पाण्डाल पर बाबा साहब के जीवन तथा उनके दर्शन पर आधारित विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया जाता है। इसमें अनेक प्रसिद्ध हस्तियां अपने विचार रखती है। 
स्थापत्य कला की बेजोड़ कृति
डॉ. बाबा साहब अम्बेडकर की जन्मस्थली पर बना यह  भव्य स्मारक स्थापत्य कला की बेजोड़ कृति है। मकराना के सफेद संगमरमर एवं मेंगलुरू के ग्रेनाइट से निर्मित इस स्मारक को समीप से देखने पर बौद्ध धर्म के सांची जैसे प्राचीन स्मारकों की छवि दिखाई देती है। स्मारक की गोलाई से संसद का आभास होता है।  
स्मारक का निर्माण बाबा साहेब अम्बेडकर स्मारक निर्माण समिति की देखरेख में किया गया है।  प्रदेश सरकार द्वारा नियुक्त आर्कीटेक्ट श्री ई.डी.निमगढ़े की ड्रॉर्इंग के अनुरूप स्मारक का मुख्य भवन विशिष्ट गोलाकार गुम्बज तथा सीढ़ियों आदि का निर्माण किया गया है। फर्श पर 15 मि.मी. मोटाई  वाला मकराना का सफेद संगमरमर, 15 मि.मी. मोटाई वाले मेंगलुरू के माईन्स ग्रेनाईट से साज-सज्जा कर स्मारक को भव्यता प्रदान की गयी है। पच्चीस मि.मी. मोटाई के सफेद संगमरमर से गोलाकार आकार की सीढियां बनाई गयी है। डोम की बाह्र सतह को 20 मि.मी. मोटाई के संगमरमर से सुसज्जित किया गया है। सीढ़ियों पर पीतल के हाथी तथा पाइप लगाकर रैलिंग की साज-सज्जा की गयी है। स्मारक की भव्यता के लिये प्रथम तल पर चारों ओर  संगमरमर की जालियां लगायी गयी है। स्मारक के सामने 14 फीट ऊंची भव्य एवं आकर्षक मूर्ति लगायी गयी है। मूर्ति का निर्माण ग्वालियर के प्रसिद्ध मूर्तिकार श्री प्रभात राय द्वारा किया गया है। स्मारक के चारों ओर संगमरमर की फ्लोरिंग की गयी है।  
कन्ट्रोल रूम स्थापित
महाकुंभ संबंधी विभिन्न व्यवस्थाओं और श्रृद्धालुओं के सहयोग के लिये महू में कन्ट्रोल रूम स्थापित किये गये हैं। ये कन्ट्रोल रूम सभास्थल स्वर्ग मंदिर परिसर, जन्मस्थली स्मारक के सामने तथा तहसील कार्यालय में बनाये गये हैं। इन तीनों कन्ट्रोल रूम में अधिकारी-कर्मचारियों की ऐसी व्यवस्था की गयी है कि वह 14 अप्रैल की शाम तक निरंतर 24 घण्टे कार्यरत रहें।
महाकुंभ में आने वाले श्रृद्धालुओं की सुविधा के लिये प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी सभा स्थल और भोजनशाला में मराठी भाषा में उद्घोषणा की भी विशेष व्यवस्था की गयी है।
भोजन का माकूल इंतजाम
महाकुंभ में आने वाले श्रृद्धालुओं के लिये भोजन की विशेष व्यवस्था की गयी है।  इसके तहत श्रृद्धालुओं को स्वादिष्ट भोजन परोसा जा रहा है । आज 13 अप्रैल को सुबह 10 बजे से रात 9 बजे तक भोजन परोसने का सिलसिला अनवरत जारी था । इस दौरान हजारों श्रृद्धालुओं ने भोजन किया। श्रृद्धालुओं को पूड़ी-सब्जी, नुक्ती, नमकीन, खिचड़ी आदि परोसा गया। अम्बेडकर जयंती के दिन 14 अप्रैल को भोजन का सिलसिला सुबह 8 बजे से शुरू कर दिया जायेगा। इस दिन पूड़ी, सब्जी, नुक्ती, नमकीन तथा खिचड़ी परोसी जायेगी। भोजन परोसने के लिये 30 स्टाल बनाये गये हैं। भोजन बनाने तथा वितरण के काम में करीब 500 लोग दिन-रात जुटे हैं। भोजन की व्यवस्था खाद्य विभाग के अधिकारी सम्हाले हुये हैं । 
श्रृद्धालुओं के ठहरने के लिये स्कूल, धर्मशाला तथा पण्डालों में व्यवस्था की गयी है। शौच एवं स्नान के लिये भी इंतजाम किये गये हैं । पीने के पानी के लिये जगह-जगह स्टाल भी लगाये गये हैं । 
महिपाल/कपूर

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