इंदौर में डेयरी उद्योग की व्यापक संभावनायें
पशुपालन से बदल रही है किसानों की किस्मत
इंदौर, 20 मई 2018.
पशुपालन विभगा द्वारा पशुओं और पशुपालकों के हित में अनेक योजनायों संचालित है। हितग्राही उनका लाभ उठाकर अपना जीवन स्तर सुधार सकते है। पशुपालन रोजगार और उत्पादन का एक सशक्त माध्यम है। ग्रामीण क्षेत्र में यह उद्योग खूब फल फूल रहा है। विशेष कर इंदौर जिले में डेयरी उद्योग और सब्जी उत्पादन ने किसानों की किश्मत बदल दी है।
वत्स पालन प्रोत्साहन योजना:- योजना का मुख्य उददेश्य प्रदेश में भारतीय देशी नस्ल के गौवंश को बढ़ावा देने के लिये पशुपालकों को प्रोत्साहित करना है। योजना सभी वर्ग के लिये है। इकाई लागत 17 हजार रूपये है।, जो शतप्रतिशत अनुदान है। गाय को 5 हजार तथा वत्स को 500 रूपये प्रति व्यात 24 माह तक कुल राशि 17 हजार रूपये दी जाना है।
नंदीशाला योजना:- योजना सभी वर्ग के लिये है, इकाई लागत 25 हजार 720 रूपये है। अनुदान राशि 75 प्रतिशत 19290 रूपये तथा हितग्राही अंश 25 प्रतिशत 6430 रूपये है। योजना में देशी गौसांड, साहीवाल, थारी, मालवी, नस्ल प्रदाय किया जाना है।
समुन्नत मुर्रा पाड़ा योजना:- योजना के अंतर्गत प्रगतिशील पशुपालक अथवा प्रशिक्षित गौसेवक को मुर्रा भैसा सांड प्रदाय किया जाता है। यह योजना सभी वर्ग के लिये है। योजना का मुख्य उद्देश्य नस्ल सुधार है। इकाई लागत 45 हजार रूपये है। अनुदान राशि 75 प्रतिशत एवं हिग्राही अंशदान 25 प्रतिशत है। इस योजना में उन्नत नस्ल का मूर्रा सांड प्रदाय किया जाता है।
बैकयार्ड कुक्ककुट पालन योजलना:- योजना का मुख्य उद्देश्य कुक्कुट पालन के माध्यम से हितग्राहियों की आर्थिक स्थिति में सुधार करना है। यह योजना केवल अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के हितग्राहियों के लिये है। इकाई लागत 2225 रूपये है। योजना में बिना लिंग भेद के 28 दिवसीय 40 रंगीन चूजे प्रदाय किये जाते है। अनुदान राशि 75 प्रतिशत व हितग्राही अंश 25 प्रतिशत है।
कड़कनाथ कुक्कुट पालन योजना:- योजना का मुख्य उद्देश्य कड़कनाथ नस्ल का संरक्षण एवं संवर्धन करना है। यह योजना केवल अनुसूचित जनजाति के लिये है। इकाई लागत 4400 रूपये है। योजना में 28 दिवसीय 40 चूजे वितरित किये जाते है। अनुदान राशि 75 प्रतिशत व हितग्राही अंशदान 25 प्रतिशत है।
अनुदान पर बकरा प्रदाय योजना:- यह योजना सभी वर्ग के लिए है। योजनांतर्गत उन्नत नस्ल का जमनापारी बकरा प्रदाय किया जाता है। इकाई लागत 8300 रूपये तथा अनुदान राशि सभी वर्ग हेतु इकाई लागत का 75 प्रतिशत है तथा 25 प्रतिशत हिग्राही अंशदान है।
बैंक ऋण एवं अनुदान पर बकरी इकाई:- योजना का उद्देश्य देशी बकरियों में नस्ल सुधार, हितग्राहियों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाना है। योजना सभी वर्ग के लिये है। अनुदान सामान्य वर्ग के लिये 40 प्रतिशत, अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लिए 60 प्रतिशत है। शेष राशि बैंक ऋण से दी जायेगी। इकाई लागत 77456 रूपये है। योजना में 10 बकरी एवं एक बकरा प्रदाय किया जाता है।
आचार्य विद्यासागर योजना:- योजना सभी वर्ग के लिए है। अनुदान राशि समान्य के लिए 25 प्रतिशत व अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लिए 33 प्रतिशत है। शेष राशि बैंक ऋण द्वारा दी जाना है। योजना में देशी गाय, संकर गाय एवं ग्रेडेड मुर्रा भैंस प्रदाय की जाती है। जिसमें इकाई लागत क्रमश 2.43 लाख, 2.82 लाख एवं 4.25 लाख है।
इनाफ योजना:- योजना संभाग के सभी जिलों में लागू है। योजना अंतर्गत जिले में उपलब्ध प्रजनन योग्य गाय व भैसों की पहचान किया जातना है। योजना भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित है।
पशु संजीवनी 1962:- योजना का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक ग्राम के प्रत्येक पशुपालक तक काल सेंटर के माध्यम से घर पहुंच पशु चिकित्सा सुविधा एवं अन्य विभागीय सेवायें प्रदान करना है। संभाग के जिला बडा़वानी, धार, अलीराजपुर जिले का चयन किया गया है।
/सिंह/विजय
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