Saturday, 28 January 2017

लोक सूचना अधिकारी सूचना देने के लिये जवाबदार



सूचना का अधिकार अधिनियम के अन्तर्गत किसी को भी 
सूचना प्राप्त करने से रोका नहीं जा सकता - मुख्य सूचना आयुक्त श्री खान 
इंदौर, 28 जनवरी,2017
सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 के अन्तर्गत किसी भी व्यक्ति को कोई भी लोक सूचना अधिकारी किसी भी प्रकार की सूचना माँगने पर उसको देने के लिये जवाबदार होता है और सूचना के अधिकार के अन्तर्गत माँगी गई सूचना उपलब्ध कराता है। सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 में देश की सुरक्षा, लोकहित और कुछ व्यक्तिगत जानकारी को छोड़कर शासकीय विभाग और शासन से अनुदान प्राप्त संस्थाएं सूचना देने के लिये बाध्य हैं। उक्त बात मुख्य सूचना आयुक्त श्री के.डी. खान ने इन्दौर कलेक्ट्रेट में पहली लोक अदालत का शुभारंभ करते हुए कही। मुख्य सूचना आयुक्त ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम लोकतंत्र को मजबूत करने का सबसे बड़ा अस्त्र साबित हो रहा है। इसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति जिसको लगता है कि उसके अधिकारों का हनन या अतिक्रमण किया गया है या शासकीय सेवा में रहते हुए किसी अधिकारी द्वारा भ्रष्टाचार या गलत कार्यवाही की गई है तो उसकी सूचना प्राप्त कर सकता है। 
इन्दौर में इस प्रकार की यह पहली लोक अदालत है। इस लोक अदालत का शुभारंभ मुख्य सूचना आयुक्त श्री के.डी. खान के साथ सूचना आयुक्त श्री आत्मदीप, श्री सुखराज सिंह, श्री हीरालाल त्रिवेदी, संभागायुक्त श्री संजय दुबे, पुलिस महानिरीक्षक श्री अजय शर्मा तथा कलेक्टर श्री पी. नरहरि ने महात्मा गाँधी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलन कर किया। 
इस अधिनियम के माध्यम से सूचना प्राप्त करने वाले व्यक्ति को समयसीमा में सूचना प्रदान की जाना चाहिये। अधिकारी भी यह सुनिश्चित करें कि सूचना के अधिकार अधिनियम अन्तर्गत आवेदन देने वाले व्यक्ति से चर्चा करें और उसकी आवश्यकता के अनुसार उसे सूचना प्रदान करें। आवेदन प्राप्त होने के साथ ही सूचना प्रदान करने की कार्यवाही भी प्रारंभ हो जाना चाहिये, इसके लिये समयसीमा का ध्यान रखा जाना चाहिये। श्री खान ने कहा कि लोक सूचना अधिकारी आरटीआई में सूचना मांगने वाले से चर्चा करें और उसकी आवश्यकतानुसार उसे समस्त जानकारी व फोटोकापी आदि के व्यय की जानकारी भी तुरंत उपलब्ध करा दें, जिससे पारदर्शिता भी आयेगी और सूचना प्राप्त करने वाला संतुष्ट भी होगा। 
मुख्य सूचना आयुक्त श्री के.डी. खान ने कहा कि किसी भी आरटीआई के अन्तर्गत प्राप्त होने वाले आवेदन पर सूचना उपलब्ध कराने का कार्य लोक सूचना अधिकारी का होता है। यदि वरिष्ठ अधिकारी द्वारा सूचना देने से मना किया जाता है तो उसे नोटशीट पर लेकर उल्लेख किया जाये। जिससे सूचना प्राप्त करने वाले व्यक्ति को समयसीमा के बाद सूचना प्राप्त होने पर संबंधित अधिकारी के विरूद्ध भी कार्यवाही सुनिश्चित हो सके। श्री खान ने कहा कि सूचना के अधिकार अधिनियम के अन्तर्गत प्रकरणों को निपटाने के लिये लोक अदालत के साथ-साथ सूचना के अधिकार अधिनियम अन्तर्गत कैम्प, वीडियो कान्फ्रेसिंग के माध्यम से भी प्रकरणों का निराकरण किया जा रहा है। 
कार्यक्रम में सूचना आयुक्त श्री सुखराज सिंह ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम लोकतंत्र के लिये एक अच्छा हथियार है। इस अधिनियम के द्वारा कोई भी व्यक्ति किसी भी विभाग से सूचना प्राप्त कर सकता है। शासकीय अधिकारियों के द्वारा यदि कोई गलत काम किया जा रहा है तो सूचना प्राप्त कर उसके विरूद्ध कार्यवाही व आम जनता को बता सकता है। इसका सही रूप से उपयोग करने पर समाज व प्रदेश के लिये बेहतर परिणाम प्राप्त हो रहे हैं। 
सूचना आयुक्त श्री आत्मदीप ने अपने उदबोधन में कहा कि शासन और शासकीय अनुदान से चलने वाले संस्थान इस अधिनियम के माध्यम से जनता के प्रति जवाबदेह बने हुए हैं। इस कानून के माध्यम से प्रत्येक व्यक्ति अपने हितों की रक्षा कर सकता है और विभाग और शासकीय संस्थानों में हो रही मनमानी से स्वयं को सुरक्षित भी रख सकता है। इस अधिनियम का मूल उद्देश्य सर्वजन हिताय और सर्वजन सुखाय है। 
सूचना आयुक्त श्री हीरालाल त्रिवेदी ने कहा कि मध्यप्रदेश सूचना आयोग 2014 से लगातार नये आयाम स्थापित कर रहा है। इन्दौर संभाग में इसके पूर्व तीन हजार से अधिक प्रकरण लंबित थे और 2014 के बाद दो हजार आठ सौ प्रकरण आये और आयोग के द्वारा पांच हजार आठ सौ प्रकरणों में से चार हजार दो सौ से अधिक प्रकरण निराकृत किये जा चुके हैं। इन्दौर संभाग की पहली लोक अदालत में से 1500 प्रकरण में से 910 प्रकरण लोक अदालत में रखे गये हैं, जिनका आज निराकरण किया जायेगा। इन्दौर संभाग के 170 अधिकारियों पर अभी तक 23 लाख रूपये से अधिक का जुर्माना किया गया है और तीन लाख रूपये हितग्राहियों को भी दिलाया गया है। श्री त्रिवेदी ने सुनवाई के दौरान सभी लोक सूचना अधिकारियों को यह निर्देश भी दिये कि उनके द्वारा किये जा रहे कार्यों को वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराया जाये, जिससे सूचना प्राप्त करने वाले व्यक्ति को आरटीआई आवेदन लगाने के पूर्व ही बता दिया जाये कि यह सूचना इस वेबसाइट पर उपलब्ध है जहां से उसे प्राप्त कर सकते हैं। इससे सूचना के अधिकार अधिनियम अन्तर्गत आने वाले आवेदनों में कमी आयेगी और कोई भी व्यक्ति उस वेबसाइट के माध्यम से जानकारी प्राप्त कर सकेगा।  
कार्यक्रम के शुभारंभ में संभागायुक्त श्री संजय दुबे ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम का कुछ व्यक्तियों द्वारा किसी व्यक्ति या किसी विशेष विभाग के लिये लगातार उपयोग किया जाता है और बिना किसी उद्देश्य के लगातार आरटीआई के अन्तर्गत आवेदन लगाकर अधिकारियों को परेशान किया जाता है। इसको भी आयोग को संज्ञान में लेना चाहिये। वैसे आरटीआई गलत काम को रोकने का एक सबसे बेहतर हथियार है और प्रशासन में अधिकारियों के लिये एक ऐसी ढाल के रूप में भी काम करता है जिसमें कोई भी अधिकारी किसी भी गलत काम के लिये किसी भी दबाव में आये बिना मना कर सकता है। इसके साथ ही आरटीआई आवेदन आने के पूर्व ही अधिकारी यदि समस्त सूचनाएं पहले से ही उपलब्ध करा देगा और किये गये कार्यों की सूची और व्यय तथा लिये गये निर्णयों को यदि वेबसाइट या अन्य माध्यमों से प्रदर्शित करता है तो इससे और बेहतर परिणाम प्राप्त होंगे और परेशानी से बचा जा सकेगा। 
कार्यक्रम में कलेक्टर श्री पी. नरहरि ने सभी अतिथियों का पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया और अपने उदबोधन में कहा कि इसके पूर्व भी उनके द्वारा इस प्रकार की लोक अदालत में हिस्सा लिया गया है जब वे कलेक्टर ग्वालियर थे। उस समय भी सूचना आयोग द्वारा लोक अदालत आयोजित की गई थी जिसके बेहतर परिणाम आये थे। इन्दौर में भी पहली लोक अदालत में अधिकारियों और सूचना प्राप्त करने वालों के बीच बेहतर तालमेल से सूचनाएं आदान-प्रदान होगी और प्रशासन में पारदर्शित बढ़ेगी। 
295 प्रकरण निराकृत
सूचना आयुक्तों की लोक अदालत में आज कुल 295 प्रकरण निराकृत किये गये। श्री के.डी. खान की खण्डपीठ में 43, श्री सुखराज सिंह की खण्डपीठ में 39, श्री आत्मदीप की खण्डपीठ में 138 और श्री हीरालाल त्रिवेदी की खण्डपीठ में 75 अपीलीय प्रकरण निराकृत किये गये। 
प्रदेश में सर्वाधिक 295 प्रकरण इंदौर की लोक अदालत में निराकृत
बताया गया कि सूचना के अधिकार अधिनियम के अन्तर्गत अब तक प्रदेश में आयोजित लोक अदालतों में सर्वाधिक प्रकरण आज इंदौर में सम्पन्न हुई लोक अदालत में निराकृत किये गये। इससे पूर्व सतना में आयोजित लोक अदालत में 202 अपीलीय प्रकरणों का निराकरण किया गया था। राज्य सूचना आयोग के आयुक्तों ने इंदौर में सम्पन्न हुई लोक अदालत में की गई व्यवस्थाओं की सराहना की और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।                                                              
क्रमांक 207/207/17/राठौर/वटके  

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