Sunday, 19 February 2017

सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु संसाधनों और क्षेत्रीय सहयोग के सुदृढ़ीकरण के संबंध में दक्षिण एशियाई देशों के अध्यक्षों का
शिखर सम्मेलन
 इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत
18-19 फरवरी, 2017

इंदौर घोषणा

हम अफगानिस्तान, बंगलादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल और श्रीलंका की राष्ट्रीय संसदों के अध्यक्ष 18-19 फरवरी, 2017 को इंदौर में सतत् विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को प्राप्त करने के संबंध में दक्षिण एशियाई देशों के अध्यक्षों के शिखर सम्मेलन में "सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु संसाधनों और क्षेत्रीय सहयोग के सुदृढ़ीकरण " विषयवस्तु पर चर्चा करने के पश्चातः
यह बात मानते हुए कि सतत विकास लक्ष्य प्राप्त करने की दिशा में प्रयासों के रूप में अपने हितों के अभिसरण और अपने लोगों की साझी नियति के आलोक में बैठक बहुत समीचीन थी,
यह बात नोट करते हुए कि दक्षिण एशियाई क्षेत्र जहाँ बीस प्रतिशत से अधिक मानव जाति का वास है, वहाँ गरीबी उन्मूलन, लिंग असमानता, अपर्याप्त क्षेत्रीय संबद्धता तथा जलवायु परिवर्तन तथा आपदा प्रबंधन की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है,
गरीबी उन्मूलन हेतु सतत् विकास लक्ष्यों के आदेशों तथा सतत् विकास हेतु महत्वपूर्ण घटक के रूप में लिंग समानता पर बल देते हुए तथा जलवायु परिवर्तन एवं प्राकृतिक आपदाओं की चुनौतियों से निपटने की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए,
 पर्यावरण संरक्षण के साथ विकास से सुसंगतता तथा साझा परंतु विभेदीकृत दायित्वों के सिद्धांत की केन्द्रीयता की पहचान करने की आवश्यकता पर बल देते हुए,
महिलाओं के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण में परिवर्तन करने हेतु समुचित नीतियों और विधानों को सुदृढ़ करने और सतत् विकास हेतु महत्वपूर्ण घटकों के रूप में उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने की आवश्यकता पर बल देते हुए,
व्यापार, परिवहन, पर्यटन, प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने तथा आपदा प्रशमन के लिए अंतर-क्षेत्रीय संपर्क की आवश्यकता पर बल देते हुए,
     सतत् विकास लक्ष्यों के क्रियान्वयन हेतु संसाधन जुटाने की आवश्यकता समझते हुए,
दक्षिण एशिया में सतत् विकास लक्ष्य कार्रवाई संबंधी 2016 की ढ़ाका घोषणा के अनुसरण में संसदीय सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल देते हुए,
एतद् द्वाराः
दक्षिण एशियाई क्षेत्र के सांसदों को अपने संबंधित देशों में अपनायी जा रही श्रेष्ठ परंपराओं को साझा करने, उनसे सीखने और लाभान्वित होने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देते हुए,
संसदों से आग्रह करते हैं कि वे सतत् विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए निजी क्षेत्र, सिविल सोसाइटी संगठनों और अन्य हितधारकों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए समर्थकारी परिस्थितियों का निर्माण करें,
संसदों का आह्वान करते हैं कि वे महिला-पुरूष समानता हासिल करने एवं महिलाओं से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देने के मद्देनज़र विशेषकर जमीनी स्तर पर महिला-पुरूष संवेदनशील चयनित निकायों का सृजन करें,
संसदों को प्रोत्साहित करते हैं कि वे महिलाओं के प्रति भेदभाव, हिंसा, यौन उत्पीड़न, अत्याचार एवं मानव दुर्व्यवहार से उनके संरक्षण के लिए वैधानिक उपाय करें,
समान अवसर उपलब्ध कराने और स्वास्थ्य देख-रेख, पोषण, शिक्षा और कौशल विकास उपलब्ध कराने के आवश्यकता पर बल दें,
संसदों से आग्रह करते हैं कि अतिरिक्त संसाधनों को गतिशील करने के लिए सभी हितधारकों के बीच कार्रवाई रणनीतियों और सहयोग को बढ़ावा दें ताकि सतत् विकास लक्ष्यों के अधीन लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से हासिल किया जा सके,
पुनः बल देते हैं कि सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को हासिल करना जलवायु परिवर्तन के खतरों से निपटने और आपदा जोखिम को कम करने जिसके लिए क्षेत्रीय के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय सहयोग अपेक्षित है को सशक्त करने से निकट तौर पर जुड़े हैं,

इस बात पर बल देते हैं कि पेरिस समझौते को जलवायु परिवर्तन संबंधी संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन के सिद्धांतों विशेषकर समानता और साझा परंतु विभेदकारी जवाबदेहियों और सापेक्ष सामर्थ्यों के सिद्धांतों द्वारा निदेशित होना जारी रहना चाहिए,
सहमत होते हैं कि सुसंगत मुद्दों पर विचार करने और सहयोग बढ़ाने के लिए मंच के अन्तर्गत संयुक्त संसदीय समूहों की स्थापना पर विचार करें,
आह्वान करते हैं कि जलवायु परिवर्तन एवं संबंधित आपदाओं की चुनौती का सामना करने के लिए क्षेत्रीय अनुक्रिया सशक्त करने हेतु दक्षिण एशियाई देशों में वृहत और तत्काल सहयोग किया जाए,
अंतर संसदीय संघ का आह्वान करते हैं कि सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए बातचीत और सहयोग को सुगम बनाएं ,
सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए ज्ञान, सूचना, शोध सहायता और सामर्थ्य निर्माण कार्यक्रमों को साझा करने को सुकर बनाते हैं,
सतत् विकास लक्ष्यों पर विमर्श करने के लिए एक सत्र में एक दिन आवंटित करने के लिए दक्षिण एशिया क्षेत्र की संसदों का आह्वान करते हैं
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