Saturday, 4 March 2017

मध्यप्रदेश में प्रतिवर्ष साढ़े 7 लाख युवाओं को दिया जायेगा कौशल उन्नयन का प्रशिक्षण
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ऑटोमोबाइल, फर्नीचर तथा केपिटल गुड्स के क्षेत्र में प्रशिक्षण देने के लिये 
निजी क्षेत्र की 26 कम्पनियों के साथ किया गया एमओयू
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एक दिवसीय सेक्टोरल वर्कशॉप सम्पन्न
इंदौर 4 मार्च, 2017
मध्यप्रदेश में युवाओं को प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिये राज्य शासन द्वारा कारगर प्रयास किये जा रहे हैं। इसके तहत मध्यप्रदेश में प्रतिवर्ष साढ़े 7 लाख युवाओं को कौशल उन्नयन का प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिये राज्य शासन द्वारा शीघ्र ही दो नई योजनायें प्रारंभ की जायेगी। युवाओं को ऑटोमोबाइल, फर्नीचर तथा केपिटल गुड्स के क्षेत्र में प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार से जोड़ने के लिये निजी क्षेत्र की प्रतिष्ठित 26 कम्पनियों के साथ आज इंदौर में समझौता निष्पादन-पत्र (एमओयू) हस्ताक्षरित किये गये। इन कम्पनियों द्वारा विभिन्न औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के साथ मिलकर युवाओं को रोजगार दिया जायेगा।
इन समझौता पत्रों का निष्पादन आज इंदौर के ब्रिालियेंट कन्वेंशन सेंटर में सम्पन्न हुयी एक दिवसीय सेक्टोरल कार्यशाला में किया गया। इस अवसर पर निजी क्षेत्र की ऑटोमोबइल, फर्नीचर तथा केपिटल गुड्स के क्षेत्र की विभिन्न निजी कम्पनियों के प्रतिनिधि मौजूद थे। कार्यशाला में इन कम्पनियों के प्रतिनिधियों से विस्तार से चर्चा की गयी। उन्हें राज्य शासन द्वारा कौशल उन्नयन के क्षेत्र में चलाये जा रहे कार्यक्रमों के बारे में विस्तार से बताया गया। कार्यशाला में उनसे आग्रह किया गया कि वे अपनी-अपनी कम्पनियों में आवश्यकताओं का आकलन कर उन आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये युवाओं को प्रशिक्षित करें और उन्हें रोजगार उपलब्ध करायें। कार्यशाला में बताया गया कि मध्यप्रदेश में कौशल उन्नयन के क्षेत्र में राज्य शासन द्वारा लगातार प्रयास किये गये हैं। प्रदेश में मध्यप्रदेश राज्य कौशल विकास मिशन का गठन किया गया है। इस मिशन के अंतर्गत निजी क्षेत्र की कम्पनियों के सहयोग से युवाओं को प्रशिक्षित करने के कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं। राज्य शासन द्वारा जल्द ही दो नई और योजनायें शुरू की जायेंगी। इन योजनाओं के माध्यम से भी युवाओं को कौशल उन्नयन का प्रशिक्षण दिया जायेगा। बताया गया कि राज्य शासन का प्रयास है कि परम्परागत रूप से कार्य करने वाले व्यक्तियों को भी कौशल उन्नयन का प्रशिक्षण देकर उन्हें संगठित किया जाये और उनकी आमदनी में बढोत्तरी की जाये। परम्परागत रूप से कार्य करने वाले व्यक्तियों के पास कुशलता तो होती है, किंतु  उनके पास प्रतिष्ठित संस्थान से प्रमाण-पत्र नहीं होने से अपेक्षाकृत आमदनी अधिक नहीं मिल पाती है।  प्रतिष्ठित संस्थान के प्रमाण-पत्र होने से कुशल कारीगरों के जीवन में नया बदलाव दिखायी देगा।
कार्यशाला में मध्यप्रदेश राज्य कौशल विकास मिशन के डायरेक्टर श्री संजीव सिंह भी विशेष रूप से मौजूद थे। कार्यशाला में एनएसडीसी के मैनेजर श्री अर्णव दत्ता, केपिटल गुड्स के हेड ऑफ क्वालिटी एण्ड स्टैण्डर्स श्री निभय श्रीवास्तव, ऑटोमोबाइल सेक्टर की श्रीमती अलका पाण्डे, फर्नीचर सेक्टर की श्रीमती नितेश वेर्नाली बसु, ओला कम्पनी के श्री दीपक आदि ने सम्बोधित किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में मध्यप्रदेश राज्य कौशल विकास मिशन के एडिशनल सीईओ श्री जी.एन.अग्रवाल ने स्वागत भाषण दिया। कार्यक्रम के अंत में संयुक्त संचालक कौशल विकास श्री आर.डी.विश्वकर्मा ने आभार माना। कार्यशाला में विभिन्न सत्रों के दौरान कौशल विकास क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने के संबंध में चर्चा की गयी और कार्यक्रम में उपस्थित औद्योगिक तथा प्रशिक्षण कम्पनियों के प्रतिनिधियों तथा उपस्थितजनों की जिज्ञासाओं का भी समाधान किया गया।

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