Tuesday, 17 April 2018

सफलता की कहानी
सुभाष ने बागवानी के जरिये बनाया खेती को लाभ का धंधा
सुभाष ने दी किसानों को मिश्रित खेती की सलाह
इंदौर 17 अप्रैल 2018
     इंदौर जिले के तहसील साँवेर ग्राम बसान्द्रा निवासी सुभाषचन्द्र राठौर वर्षो से परंपरागत खेती करते आ रहे थे। परंपरागत खेती से उन्हें बहुत कम लाभ हो रहा था। एक दिन उनकी मुलाकात उद्यान विकास अधिकारी विकासखण्ड साँवेर से हुई। उद्यान विकास अधिकारी ने उन्हें अमरूद की खेती करने की सलाह दी और उसे समझाया कि अमरूद की खेती से उसे कम से कम एक लाख रूपये सलाना अतिरिक्त आय होगी। सुभाष ने अमरूद की खेती करने की ठान ली। उसने डेढ़ हेक्टेयर खेत में अमरूद के 15 हजार पौधे लागये।  उसने आधुनिक तकनीक अपनाते हुये ट्रैक्टर से जुताई की और ड्रिप से सिंचाई की। उसके खेत में अमरूद के सभी पौधे आज भी जीवित हैं। उसके खेत में हर साल लगभग 300 क्विंटल अमरूद पैदा होता है। 5 रूपये प्रति किलो की दर से बेचने पर सारा खर्च काट कर उसे लगभग एक लाख रूपये प्रति वर्ष आय हो रही है।  इन बगीचों के रख-रखाव पर लगभग 50 हजार रूपये सालाना खर्च करना पड़ते हैं।
     चर्चा के दौरान प्रगतिशील किसान श्री सुभाषचन्द्र राठौर ने बताया कि उसने अपने खेत पर डेढ़ हेक्टेयर में इलाहाबादी सफेदा अमरूद का रोपण किया है। अमरूद के साथ मिश्रित खेती करते हुए मटर और बैगन भी लगाया है। मटर और बैगन से लगभग 50 हजार रूपये की आय हो जाती है। मटर और बैगन से सालाना लगभग 20 हजार रूपये शुद्ध लाभ प्राप्त हो जाता है। उसने अन्य किसानों को की मिश्रित खेती करने की सलाह दी है, जिससे खेती को लाभ का धन्धा बनाया जा सके।

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