Tuesday, 22 May 2018

कहानी सच्ची है
महिला एवं बाल विकास के सहयोग से कृष्णा को मिला दादा का घर
इंदौर 22 मई 2018
      महिला एवं बाल विकास विभाग राज्य शासन के निर्देशानुसार महिला एवं बच्चों के कल्याण के लिये कृतसंकल्पित हैं। इस सिलसिले में इंदौर संभाग में विशेष प्रयास किये जा रहे है। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संभाग में समय-समय पर अभिनव प्रयोग किये जा रहे है।
      श्रीमती राखी पिता जगदीश प्रजापत परदेशीपुरा इंदौर की रहने वाली, उसका विवाह सन 2012 में उज्जैन निवासी अजय प्रजापत के साथ हुआ। विवाह के एक वर्ष पश्चात राखी की डिलेव्हरी इंदौर स्थित मायके में हुई एवं उसने एक पुत्र को जन्म दिया, जिसका नाम कृष्णा रखा। ससुराल वाले बहुत खुश थे।
       श्रीमती राखी के बेटे कृष्णा का होंठ जन्म से ही कटा हुआ था तथा वह ठीक से माँ का दूध नहीं पी पा रहा था। ससुराल वाले जब पोते को देखने आये तो पोते का कटा होंठ देखकर गुस्सा हो गये कि हमारे खानदान में आज तक ऐसा बच्चा नहीं हुआ है। मायके वाले ने या बहू ने स्वयं गर्भावस्था के दौरान लापवाही बरती होगी तथा कहने लगे की ऐसे बच्चे को हम घर ले जायेंगे, तो असाप-पास वाले एवं रिश्तेदार क्या कहेंगे। इम इसकों लेकर नहीं जायेंगे।
      एकीकृत बाल विकास परियोजना इंदौर शहरी क्रमांक -04 की परदेशीपुरा स्थित आंगनवाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती मीना पिलोदिया को जब इस बात का पता चला तो वह तत्काल उनके घर गई एवं राखी एवं उसके माता-पिता को समाझाईश दी कि घबराने की कोई बात नहीं है, महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा कटे-फटे होंठ वाले बच्चों के नि:शुल्क ऑपरेशन अशासकीय संस्था "स्माईल ट्रेन" के माध्यम से कराया जाता है। ऑपरेशन के बाद कृष्णा बिल्कुल सामान्य बच्चें की तरह दिखेगा।
      आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने उक्त बच्चेके संबंध में परियोजना अधिकारी श्री राजेन्द्र मण्डलोई के माध्यम से महिला एवं बाल विकास विभाग इंदौर संभाग के संभागीय संयुक्त संचालक श्री राजेश मेहरा को जानकारी दी। श्री मेहरा द्वारा "स्माईल" ट्रेन" कार्यक्रम अंतर्गत डॉ. जयदीप सिंह चौहान से चर्चा कर कृष्‍णा को हॉस्पीटल में भर्ती कराया। ऑपेरशन से कृष्‍णा के होंठ सामान्य हो चुके थे।
      बालक कृष्णा के ऑपरेशन की सूचना उज्जैन स्थित राखी के ससुराल वालों को दी गई। उसके ससुराल वाले पोते कृष्णा को देखने आये तो उनकों विश्वास ही नहीं हुआ कि बच्चे के होंठ पूरी तरह ठीक होकर सामान्य हो गये है। बालक को देखकर यह लग ही नहीं रहा कि इसका होंठ कटा हुआ है। ससुराल वाले बहुत खुश हुए। बालक कृष्णा के जन्म का उत्सव पूरे धूमधाम से मनाया गया, जिसमें आस-पास तथा सारे रिश्तेदार सम्मिलित हुए। ससुराल वाले बहू राखी एवं पोते को खुशी-खुशी अपने अपने साथ उज्जैन ले गये। आज बालक कृष्णा अपने दादा-दादाी एवं बहू अपने पति अजय एवं सुसुराल में बहुत खुश है। राखी जब भी अपने मायके परदेशीपुरा आती है, तो आंगनवाड़ी केन्द्र में आकर महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा दिये गये सहयोग के प्रति आभार व्यक्त करती है।

क्रमांक 239/1284/सिंह/विजय

No comments:

Post a Comment