Wednesday, 11 January 2017

कलेक्टर श्री नरहरि ने रूपांकन संस्था में बच्चों और युवाओं से अनुभव साझा किये

संघर्ष और मेहनत से प्राप्त सफलता ही स्थाई होती है

इंदौर 11 जनवरी, 2017
    कलेक्टर श्री पी.नरहरि ने आज रूपांकन संस्था में पहुंचे और यहां पर बच्चों युवाओं और संस्था के सदस्यों के साथ अपने जीवन और वर्तमान तक के संघर्ष की कहानी को बताया। कलेक्टर ने बताया कि उन्हें आईएएस (कलेक्टर) बनने की ललक उस समय जागी, जब वे तत्कालिक आंध्रप्रदेश के करीम नगर (तेलंगाना) के स्कूल में पढ़ते थे और वहां के कलेक्टर द्वारा प्रौढ़ा शिक्षा के लिये अक्षरा अभियान प्रारंभ किया गया था। तब उनके स्कूल द्वारा पड़ोस की एक बस्ती को गोद लिया गया, जिससे वहां के अनपढ़ व्यक्तियों को अक्षर ज्ञान कराया गया। उस कार्य में स्कूल के सभी विद्यार्थियों के साथ-साथ मैं स्वयं भी पढ़ाने के लिये गया तब मुझे ऐसा एहसास हुआ कि कलेक्टर कितना अच्छा कार्य कर सकता है और समाज के लिये कितना सोचता है, तभी मन में विचार आया कि मुझे कलेक्टर बनना है और इसे मैंने अपनी जिद बना लिया।
    स्कूल शिक्षा के बाद इंजीनियरिंग शिक्षा के लिये जब मेरा चयन हुआ तो मैं हैदराबाद पढ़ने के लिये गया। घर की आर्थिक स्थिति इन सबके लिये तैयार नहीं थी। मेकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान हैदराबाद में रहते हुये स्वयं के खर्च के लिये बच्चों को ट¬ूशन देना प्रारंभ किया। उस समय मेरे खुद के पढ़ने के लिये किताबों पर खर्च करना भी संभव नहीं था। मेकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान 4 साल बिना किताब खरीदे मैंने पढ़ाई की और पढ़ने के लिये हैदराबाद की सभी लायब्रोरी में गया और वहां कि किताबों का अध्ययन किया।  लायब्रोरी में जब तक लायब्रोरियन द्वारा लायब्रोरी बंद करने के लिये बोला जाता था, तभी में लायब्रोरी से बाहर आता था। अभावों एवं संघर्षों के साथ मेकेनिकल इंजीनियरिंग में मैंने टॉप किया। इसी दौरान मेरे द्वारा बच्चों को पढ़ाने का कार्य निरंतर जारी रहा,जिससे मेरी खुद की अंतरिक क्षमतायें एवं आत्मविश्वास जागृत हुआ और जब इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद एक साथ 7 सर्विसों के लिये मेरा चयन हुआ, किंतु मेरी जिद आईएएस बनने की थी।
    श्री नरहरि ने कहा कि इसके लिये मेरे द्वारा शासकीय कोचिंग में ही अध्ययन किया गया। साथ-साथ छोटे भाई-बहनों को उच्च शिक्षा के लिये हैदराबाद ले आया और उनका खर्च भी अपनी ट¬ूशन के दौरान प्राप्त पैसे से किया। सिविल सर्विस की परीक्षा में पहले प्रयास में इंजीनियरिंग सेवा में चयन हुआ और दूसरे प्रयास में आईएएस में मेरा चयन हो गया। चयन के बाद मुझे मध्यप्रदेश राज्य कैडर मिला। हिन्दी मेरी मातृभाषा न होने के कारण बोलने में समस्यायें हुई , कई लोगों द्वारा मेरी हिन्दी का मजाक उड़ाया गया, किंतु उस माजक को मैंने चुनौती के रूप में स्वीकार कर हिन्दी सीखी और आज हिन्दी में आपसे वार्तालाप कर रहा हूं। तात्पर्य यह है कि आप अपनी कमजोरियों को पहचाने। लोगों के द्वारा सदैव आपका आकलन किया जाता रहेगा। इसमें हर समय 100 प्रतिशत खरे नहीं उतर सकते, किंतु जब कोई आपके बारे में कुछ सोचता है और आपको कमजोर कहता है तो आप अपनी कमजोरियों को पहचाने और उसको दूर करने के लिये निरंतर प्रयास करें। किसी भी सेवा में जाने के लिये व्यक्तित्व का विकास सर्वाधिक जरूरी है और मैंने यह अनुभव किया कि मेरे व्यक्तित्व का विकास बच्चों को ट¬ूशन और लगातार संघर्षों के दौरान हुआ, जिसमें आज इस पद पर कार्यरत हूं और लोगों की सेवा के लिये निरंतर प्रयासरत भी हूं।
    श्री पी.नरहरि ने रूपांकन में उपस्थित सभी बच्चों को कहा कि कभी भी अभावों से मत डरो। जिन्दगी में हर समय किसी न किसी चीज कमी बनी रहती है। इनको कभी अपने सपनों पर हावी मत होने दो। इतिहास से लेकर वर्तमान समय तक के प्रसिद्ध सफल और सामाजिक लोगों की जीवनियों को पढ़ने पर आपके लगेगा कि उनके द्वारा किया गया संघर्ष ही उनकी सफलता का मूल कारण है। समाज का हर व्यक्ति, चाहे वह किसी भी तबके का हो, किसी भी धर्म का हो, सबके लिये समान अवसर उपलब्ध हैं। जरूरत इस बात की है कि व्यक्ति अपनी सोच बदले और जीवन के लक्ष्यों को निर्धारित कर उसको प्राप्त करने के लिये निरंतर प्रयासशील रहे। रूपांकन संस्थान ने इस छोटे से सेमीनार का आयोजन किया था। यह संस्था विगत 15 वर्षों से अधिक वर्षों से कार्यरत है। इसके द्वारा स्थानीय स्तर पर बच्चों को पढ़ने के लिये लायब्रोरी बनायी गयी है। साथ ही संस्था के सदस्यों द्वारा स्वपोषित व्यवस्थाओं से संस्था का संचालन किया जाताहै। इस संस्था में आसपास के बच्चे आकर पढ़ाई करते हैं। इसके साथ-साथ सांस्कृतिक गतिविधियों में जिन परिवारों के पास अलग से कोई व्यवस्थायें नहीं होती हैं तो मेहमानों के आने पर इस संस्था द्वारा सोने की व्यवस्था भी की जाती है। यह संस्था महिलाओं के स्वास्थ्य परीक्षण, उनके व्यक्तित्व के विकास के  कार्यक्रम के साथ-साथ प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रम को भी संचालित करती है।
राठौर/कपूर

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