Friday, 3 March 2017


अनुसूचित जनजाति आयोग की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने मध्यप्रदेश शासन की
 वनाधिकार पट्टा योजना की भूरि-भूरि प्रशंसा की
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विस्थापित आदिवासियों को जमीन के बदले जमीन दी जाये -- राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुश्री उइके
इंदौर 3 मार्च, 2017
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की उपाध्यक्ष सुश्री अनुसुइया उइके की अध्यक्षता में आज कमिश्नर कार्यालय सभाकक्ष में आदिवासियों की समस्याओं के संबंध में बैठक आयोजित की गयी। बैठक में सुश्री उइके ने अधिकारियों से कहा कि वे आदिवासियों के कल्याण के लिये स्वस्फूर्त चेतना से काम करें। उन्होंने कहा कि विस्थापित आदिवासियों को पूरे देश में जमीन के बदले जमीन दी जानी चाहिये। जमीन ही आदिवासियों की पहचान है। उनकी सभ्यता, संस्कृति, खान-पान और तीज-त्यौहार सब जमीन से जुड़े हुये हैं। आदिवासियों को धन से ज्यादा जमीन से लगाव है, वे एकांकी जीवन की बजाय सामूहिक जीवन जीना पसंद करते हैं। सभी जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को इस बात का ध्यान रखना चाहिये। सुश्री उइके ने मध्यप्रदेश शासन की आदिवासियों के लिये चलायी जा रही वन अधिकार पट्टे योजना की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इससे आदिवासियों को रोजी रोटी के साधन मिलेंगे। उन्होंने कहा कि वनाधिकार पट्टे के मामले में मध्यप्रदेश एक आदर्श राज्य है, अन्य राज्य भी इसका अनुकरण करें। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का दायित्व है कि आदिवासियों को उनके पट्टों पर अतिक्रमण हटाकर कब्जा दिलाये।
सुश्री उइके ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 308 के तहत राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग का गठन किया गया है। इस आयोग का काम पूरे देश में आदिवासियों के हितों का संरक्षण करना है तथा उनके कल्याण के लिये केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा बनाये गये कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन करवाना है। अनुसूचित जनजाति आयोग,राज्य और केन्द्र सरकार का मूल उद्देश्य आदिवासियों का जीवन स्तर सुधारना है। हमारा यह प्रयास होना चाहिये कि आदिवासियों की बस्तियों में बिजली, सड़क और पेयजल के साथ-साथ शिक्षा और स्वास्थ्य की भी व्यवस्था होना चाहिये। उन्हें विस्थापित करते समय भी इस बात का ध्यान रखना चाहिये कि उन्हें नई जगह स्वाभाविक, समाजिक और पारिवारिक माहौल मिले। विस्थापितों को जमीन देते समय उनके वयस्क पुत्रों को भी अलग से जमीन दी जाये।
उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश शासन द्वारा 168 योजनायें आदिवासियों के कल्याण के लिये चलायी जा रही हैं, जिससे उनके जीवन में निश्चित रूप से सुधार परिलक्षित हुआ है। उन्होंने बड़वानी, अलीराजपुर और धार के सरदार सरोवर परियोजना के तहत विस्थापित आदिवासियों को नये स्थान पर दी सुविधाओं की स्थिति पर संतोष व्यक्त किया।
बैठक में नर्मदा घाटी विकास परियोजना की संचालक श्रीमती रेणु पंत, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की डायरेक्टर श्रीमती कलावती देवी बसौड़, कलेक्टर बड़वानी श्री तेजस्वी नायक, संयुक्त आयुक्त श्रीमती सपना शिवाले आदि मौजूद थे।
सिंह/कपूर

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