Friday, 27 April 2018

मानव अधिकारों की धुरी है सूचना का अधिकार- श्री आत्मदीप
इंदौर 27 अप्रैल 2018
       सूचना का अधिकार मानव के अन्य अधिकारों की मूल धुरी है। सबसे पहले संयुक्त राष्ट्र संघ के घोषणा पत्र में कहा गया था कि सभी देशों की सरकारें जवाबदेही के लिए सूचना का अधिकार आम जनता को दें। राज्य सूचना आयोग के आयुक्त आत्मदीप ने आज इंदौर में एक निजी शिक्षण संस्थान में विद्यार्थियों और युवाओं को संबोधित करते हुए उनसे आग्रह किया कि वह सूचना के अधिकार को समझें और शासन-प्रशासन में जवाबदेही और पारदर्शिता के लिए इसका सदुपयोग करें।
      श्री आत्मदीप ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि 1948 में संयुक्त राष्ट्र संघ के घोषणा पत्र में सभी देशों की सरकारों से जवाबदेही के लिए सूचना का अधिकार देने की अपेक्षा की गई थी। 1949 में स्वीडन में सबसे पहले यह अधिकार लागू हुआ और वहां इसका परिणाम भी देखने को मिलता है। स्वीडन, फिनलैंड, नार्वे जैसों में भ्रष्टाचार का लेवल जीरो है और इसका श्रेय आरटीआई को ही दिया जाता है। वहां पर सुशासन की स्थापना में इस अधिकार की प्रमुख भूमिका है। श्री आत्मदीप ने कहा कि जिस प्रकार सांसद को संसद में और विधायक को विधानसभा में प्रश्न पूछ कर जानकारी प्राप्त करने का अधिकार है, वही अधिकार आम आदमी को आरटीआई के तहत दिया गया है। आम जनता को यह हक है कि सरकार का फंड कहां पर व्यय हो रहा है, इसको वह जाने, ताकि इसका सदुपयोग सुनिश्चित हो सके। जनोन्मुखी शासन के लिए आरटीआई सरकारों को बाध्य करता है। इस कानून के आने के बाद न्यायिक क्षेत्र में जवाबदेही भी सुनिश्चित हुई है। उन्होंने आग्रह किया कि नई पीढ़ी इस एक्ट का जानें, समझे और सदुपयोग करें। कार्यक्रम में डॉ. जी.एन. धारवेकर ने श्री आत्मदीप का स्वागत किया और भूमिका प्रस्तुत की। श्री आत्मदीप ने इस अवसर पर विद्यार्थियों के पूछे गए सवालों का भी जवाब दिया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. हर्षा जैन ने किया और आभार प्रो. आशीष गुप्ता ने माना।

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