कहानी सच्ची है -
रोटावेटर की कहानी
सीताराम की जुबानी
रोटावेटर से हुयी
फसल उत्पादन में वृद्धि
इंदौर, 27
अप्रैल 2018
प्रगतिशील
किसान सीताराम पिता रामसिंह चौहान इन्दौर जिला मुख्यालय से 15 किमी दूरी पर एक
सुन्दर उपवन से ग्राम मिर्जापुर के निवासी हैं। सीताराम ने बताया कि उसकी जीविका
का साधन कृषि है। वह कृषि विभाग के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से सम्पर्क में
रहता है, जो उसकी खेती संबंधी समस्याओं का निदान करते रहते हैं। उनकी प्रेरणा से
उसने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन वर्ष 2013-14 में रोटावेटर यंत्र 30 हजार रूपये
अनुदान पर प्राप्त किया।
चर्चा
के दौरान उसने बताया कि इससे पहले उसे रबी एवं खरीफ दोनों सीजन में खेत को बोवनी
के लिये तैयार करने में काफी मशक्कत करना पड़ती थी, जिससे समय एवं मेहनत ज्यादा
लगती थी। पहले वह फसलों में अवशेष ठूंठ आदि को हल के माध्यम से उखाड़कर बीनकर खेत
से बाहर कर जला देता था। अब रोटावेटर के माध्यम से फसल के अवशेष ठूंठ बारीक होकर
मिट्टी में मिल जाते हैं। फिर जीवाश्म खाद में परिवर्तित हो जाते हैं। इसके साथ ही
4 से 5 इंच की गहरी जुताई भी हो जाती है, जो किसी भी फसल की बोवनी के लिये उपयुक्त
गहराई होती है। इससे वह खेत में सुरक्षित नमी का भी उपयोग कर सकता है। जीवाष्म खाद
एवं नमी संरक्षण के कारण टिकाऊ कृषि यंत्र के विकास में यह महत्वपूर्ण साबित हुआ
है। इससे उसकी फसलों पर उत्पादन में आशातीत लाभ हुआ है। यह यंत्र उसके लिये वरदान
साबित हुआ है। उसकी खेती के उपयोग के पश्चात वह इस यंत्र को वह दूसरे किसान भाइयों
के खेतों पर किराये पर चलाता है, जिससे उसे आर्थिक लाभ भी मिल रहा है।
प्रगतिशील किसान श्री चौहान का मानना है कि
आधुनिक कृषि पद्धति में रोटावेटर जैसे उन्नत यंत्रों का बढ़ावा समय एवं धन की बचत
के साथ उत्पादकता बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभा रहा है। उसने इसके उपयोग से 10 से
15 प्रतिशत फसल उत्पादन में वृद्धि प्राप्त की है। उन्होंने बताया कि वह कृषि
विभाग का आभारी है कि उसे रोटावेटर जैसे आधुनिक यंत्र अनुदान पर देकर उसकी आर्थिक
स्थिति में सुधार किया।
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