Saturday, 25 February 2017

युवाओं को आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण देना जरूरी -- श्री सिंह
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युवाओं के कौशल विकास पर केन्द्रित कार्यशाला सम्पन्न
इंदौर 25 फरवरी, 2017
राज्य शासन के निर्देशानुसार कौशल विकास संचालनालय भोपाल के तत्वावधान में आज ब्रिालियेंटर कन्वेंशन सेंटर में कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य युवकों को वस्त्र उद्योग, सूचना प्रौद्योगिकी और खुदरा व्यापार (रिटेल) के क्षेत्र में कौशल विकास हेतु प्रेरित करना है। इस अवसर पर कार्यशाला को सम्बोधित करते हुये मध्यप्रदेश राज्य कौशल विकास मिशन के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री संजीव सिंह ने कहा कि युवाओं में अत्याधुनिक तकनीक के साथ कौशल विकास का सघन प्रशिक्षण दिया जाना जरूरी है। परम्परागत प्रशिक्षण के अलावा उन्हें आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण भी दिया जाये। राज्य शासन की मंशा है कि प्रदेश के अधिक से अधिक  युवाओं को शासकीय/अशासकीय क्षेत्र में रोजगार मिले। उन्होंने कहा कि वस्त्र उद्योग, सूचना प्रौद्योगिकी, निर्माण कार्य और खुदरा व्यापार के क्षेत्र में रोजगार की व्यापक संभावनायें हैं। इस क्षेत्र में रोजगार के लिये तकनीकी ज्ञान और अनुभव जरूरी है और उद्योगपतियों और तकनीकी विशेषज्ञों के माध्यम से ही युवाओं को तकनीकी कौशल प्रदान किया जा सकता है। राज्य शासन की कौशल विकास योजना के तहत प्रदेश में बड़े पैमाने पर बेरोजगारों को तकनीकी प्रशिक्षण और शिक्षा दी जा रही है। इन्हें उच्च गुणवत्तायुक्त प्रशिक्षण की जरूरत है। राज्य शासन के कौशल विकास मिशन के तहत एशियन डेवपलमेंट बैंक से 1500 करोड़ रूपये ऋण लेकर नये कौशल प्रशिक्षण केन्द्र स्थापित किये जायेंगे तथा पुराने औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों का उन्नयन किया जायेगा।
श्री सिंह ने कहा कि राज्य शासन द्वारा निर्माण, सेवा और व्यवसाय के लिये मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत 10 लाख रूपये, निर्माण और सेवा क्षेत्र के लिये मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत एक करोड़ रूपये, केवल निर्माण क्षेत्र के लिये प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत 25 लाख रूपये और सेवा क्षेत्र के लिये 10 लाख रूपये तथा प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत निर्माण, सेवा और व्यावसाय के लिये 10 लाख रूपये ऋण दिया जा रहा है। इन योजनाओं के तहत पिछले दो साल में 25 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार मिल चुका है।
इस अवसर पर कार्यशाला को सम्बोधित करते हुये श्री मयंक भटनागर ने कहा कि भारत सरकार और मध्यप्रदेश सरकार दोनों कौशल के विकास के लिये कृत संकल्पित हैं। भारत सरकार के उद्योग मंत्रालय के पास कौशल विकास के लिये मध्यप्रदेश शासन ने प्रस्ताव सबसे पहले तैयार करके भेजा है। मध्यप्रदेश सरकार कौशल विकास केन्द्रों की स्थापना कर उन्हें रोजगारोन्मुखी बनाना चाहती है। पिछले 5 वर्षों में मध्यप्रदेश शासन ने 78 हजार से अधिक युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया, जिसमें से 75 प्रतिशत युवाओं को कैम्पस सेलेक्शन में ही रोजगार मिल गया। राज्य शासन उद्यमियों और उद्योगपतियों के सहयोग से कौशल विकास केन्द्र संचालित करना चाहती है। उन्होंने कहा कि आधुनिक युग कौशल विकास का युग है। जहां एक ओर भारत में सर्वाधिक बेरोजगार ह,ैं वहीं दूसरी ओर केन्द्र और राज्य शासन इन्हें तकनीकी प्रशिक्षण देकर सक्षम और आत्मनिर्भर बनाना चाहता है। तकनीक के क्षेत्र में रोजगार की सर्वाधिक संभावनायें हैं। यह तकनीकी अभ्युदय का युग है। हम रोबोट टेक्नालॉजी और थ्री-डी पेंटिंग के युग में जी रहे हैं। यह युग एप्लिकेशन, ऑप्रेशन, ऑपशन और अचीवमेंट का जमाना है।                   
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुये विषय विशेषज्ञ श्री अनूप पूर्वट ने कहा कि भारत में खुदरा व्यावसाय के क्षेत्र में रोजगार की व्यापक संभावनायें हैं। इस दिशा में राज्य और केन्द्र सरकार को विशेष प्रयास करना चाहिये। भारत सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में कौशल विकास के लिये राष्ट्रीय कौशल विकास निगम की स्थापना की है। इस अवसर पर इलेक्ट्रॉनिक्स के विशेषज्ञ श्री सलीम अहमद ने कहा कि भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग का सालाना व्यापार 10 हजार करोड़ रूपये का है। इस उद्योग में अभी तक ढाई लाख से अधिक कर्मचारी काम कर रहे हैं। तकनीकी रूप से सक्षम युवाओं के लिये इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में व्यापक संभावनायें हैं। भारत सरकार द्वारा इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में प्रशिक्षण के लिये एक लाख से अधिक प्रशिक्षित युवक तैयार किये हैं। पूरे देश में तीन हजार से अधिक प्रशिक्षण केन्द्र काम कर रहे हैं।
इस अवसर पर कौशल विशेषज्ञ श्री आनंद कुमार सिंह ने कहा कि राज्य शासन द्वारा वर्ष 2013 में राज्य कौशल विकास मिशन की शुरूआत की गयी। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य एक कठिन और चुनौतीपूर्ण काम है।  निर्माण क्षेत्र में सड़क,भवन, पुल, रेल के क्षेत्र में करोड़ों लोग कार्यरत हैं। देश में निर्माण कार्य के क्षेत्र में हर वर्ष 63 हजार युवकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कृषि, वस्त्रोद्योग के बाद निर्माण क्षेत्र (कान्ट्रक्शन) में सर्वाधिक रोजगार की संभावनायें हैं। 
इस अवसर पर श्रीमती स्मृति द्विवेदी ने कहा कि कृषि के बाद देश में वस्त्रोद्योग के क्षेत्र में सर्वाधिक रोजगार उपलब्ध है। तकनीकी प्रशिक्षण, कौशल विकास और आधुनिक तकनीक के  जरिये इस क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाया जा सकता है। पिछले 2 वर्ष में वस्त्रोद्योग के क्षेत्र में एक लाख 29 हजार युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम में आईआईटी उत्तीर्ण देवकृष्ण, राजेश, श्रीमती अनिता श्रीवास और सुश्री पूनम श्रोत्रिय ने आईटीआई और तकनीकी प्रशिक्षण उत्तीर्ण करने के बाद अपनी उपलब्धियां गिनाई। श्रीमती अनिता श्रीवास ने बताया कि उन्होंने 20 साल पहले इंदौर आईआईटी से डिग्री लेने के बाद वस्त्रोद्योग के क्षेत्र में इंदौर, पुणे और मुम्बई में जगह-जगह फैशन डिजाइनिंग पर वर्कशॉप किया है और व्यावसायिक काम भी करके बताया। उन्होंने कहा कि देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में भी तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम का संचालन श्री मनीष चौहान ओर आभार प्रदर्शन श्री जी.एन.अग्रवाल ने किया। कार्यशाला में एपेरेल ट्रेनिंग कम्पनी, अनिता श्रीवास क्रियेट डिजाइनर, सुरविन एण्ड एतरे, आइसेक्ट, प्रतिभा सिंटेक्स, ऑटोसिज आदि कम्पनियों द्वारा आकर्षक प्रदर्शनी लगायी गयी।

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