Thursday, 15 March 2018


सफलता की कहानी

अंगदान के क्षेत्र में इन्दौर का देश में तीसरा स्थान

इंदौर, 15 मार्च, 2018 

मध्यप्रदेश में अग्ंदान के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान बनाने वाले संभागायुक्त श्री संजय दुबे को राष्ट्रीय अंगदान संगठन द्वारा दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने गत 29 नवम्बर, 2016 को सम्मानित किया। भारत सरकार द्वारा अंगदान के क्षेत्र में विशिष्ट कार्य के लिये ""बेस्ट परफार्मिंग स्टेट'' का पुरस्कार दिया है, जिसका तात्पर्य कम समय में तेजी से विकास से है।   सातवें अंगदान दिवस पर दिल्ली के कांस्टीटयुशन क्लब में आयोजित कार्यक्रम में संभागायुक्त श्री संजय दुबे को अंगदान के लिये उत्कृष्ट कार्य करने के लिये विशेष रूप से सम्मानित किया गया है। श्री संजय दुबे के नेतृत्व में इन्दौर में 29 माह में 31 बार अंगदान किया गया है आरै 85 अंगदान को नोटा के माध्यम से जरूरतमंद व्यक्ति को ब्रोनडेड व्यक्ति के अंग उसके परिवार की सहमति से दान किये गये हैं।  

मध्यप्रदेश में अंगदान की यह व्यवस्था अपनाने वाला एकमात्र शहर इन्दौर है, जहाँ श्री संजय दुबे के नेतृत्व में इस महानतम कार्य का बीड़ा उठाया गया आरै शहर में आज से 29 माह पूर्व प्रथम बार ग्रीन कोरिडोर बनाया गया, जिसमें ब्रोन डेड व्यक्ति के उपयोगी जरूरतमंद अंगों को बीमार व्यक्तियों को सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया गया है। संभागायुक्त श्री संजय दुबे के लिये अंगदान सपनों का विषय रहा है। स्वयं के प्रयासों से इन्दौर में नोटा के माध्यम से स्वीकृत डाक्टरों की टीम बनाई जो ब्रोन डेड हुये व्यक्ति का परीक्षण करती है आरै अपनी रिपोर्ट देती है। उसके बाद उनके परिवार से सम्बन्धियों के माध्यम से चर्चा कर उनसे सहमति प्राप्त की जाती है। अनुमति प्राप्त होने के बाद नोटा को इस सम्बन्ध में सूचना दी जाती है।

नेशनल आर्गेनाईजेशन ट्रांसप्लांट एसोसिएशन (नोटा)  है, वहाँ आर्गेनाइजेशन रजिस्टर्ड जरूरतमंद व्यक्ति की सूची में प्राथमिकता के आधार पर उस व्यक्ति को ब्लड ग्रुप अन्य बातें मिलान होने पर ऑर्गन डोनेशन (अंगदान) के बारे में सूचित किया जाता है।   इन सब बातों को पूर्ण करने पर ब्रोन डेड व्यक्ति का पूर्ण परीक्षण किया जाता है और स्वस्थ अंगो को सुरक्षित रखने के लिये डॉक्टरों की टीम लगातार परीक्षण करती रहती है। जहाँ और जिस शहर में अंग भेजे जाना होते हैं, वहाँ से डॉक्टरों की टीम अंग लेने के लिये आती है। अंगदान में सबसे उपयोगी समय का प्रबंधन होता है। समयबद्धता के साथ 2 घण्टे में प्रत्यारोपित होने वाले अंगों को पहुंचाना होता है। शहर में ग्रीन कोरिडोर बनाकर आरै दूसरे प्रदेशों में भेजने के लिये एयर ट्रैफिक कन्ट्रोल से सम्पर्क कर भेजा जाता है।                मध्यप्रदेश का एक मात्र शहर है, जो अंगदान के लिये लगातार 31 बार यह कार्य कर चकुा है। 31 बार ग्रीन कोरिडोर बनाकर 85 अंगों को भेजा गया है आरै सफलतापूर्वक अंग प्रतिस्थापित किये गये हैं। संभागायुक्त श्री दुबे ने कहा है कि इन्दौर की जनता का मुख्य योगदान है, जिसमें दान की प्रवृत्ति आरै सहयोग से यह भागीरथी प्रयत्न पूर्ण हो रहा है। अंगदान के क्षेत्र में इंदौर सोसायटी फॉर आर्गन डोनेशन का देश में अंगदान के क्षेत्र में तीसरा स्थान है। प्रथम स्थान चेन्नई, दूसरा स्थान मुंबई और तीसरा स्थान इंदौर का है। इंदौर में प्रतिवर्ष लगभग 20 ब्रोन डेड बॉडी डोनेट हो रही है, जिसका उपयोग केवल अंगदान में बल्कि मध्यप्रदेश में मेडिकल कॉलेजों में मेडिकल विद्यार्थियों के अध्ययन में काम में लिया जा रहा है। इंदौर जिले में इंदौर सोसायटी फॉर आर्गन डोनेशन, दधीचि संगठन, मुस्कान ग्रुप आरै एम.के.आई इंटरनेशनल के सहयोग से इंदौर जिले में पिछले 29 महीने में 31 ग्रीन कोरिडोर बनाकर ब्रोन डेड व्यक्तियों के 85 अंग प्रत्यारोपित करने हेतु दिल्ली आरै मुंबई भेजे गये। 

अंगदान हेतु इंदौर को सोटो का मुख्यालय बनाने की तैयारी

आर्गन डोनेशन के लिए इंदौर को स्टेट ऑर्गन ऐण्ड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गेनाईजेशन (सोटो) का मुख्यालय बनाने पर  केन्द्र सरकार ने हरी झंडी दे दी है। राजधानी भोपाल के एम्स में इसे स्थापित करने की कवायद चल रही थी, लेकिन अब सोटो का मुख्यालय महात्मा गाँधी स्मृति मेडिकल कॉलेज को बनाए जाने की तैयारी की जा रही है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जे.पी. नड्डा और केन्द्रीय स्वास्थ्य सचिव ने इसके लिए अश्वासन दिया है।   फिलहाल अंगदान के लिए नेशनल आर्गन ऐण्ड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गेनाईजेशन (नोटो) से अनुमति की सारी प्रक्रिया पूरी करनी होती है। इसके लिए मध्यप्रदेश में सोटो की स्थापना नहीं हो पाई है। दरअसल, दिल्ली में ऑर्गन डोनेशन का पुरस्कार लेने पहुंचे कमिश्नर संजय दुबे ने केन्द्रीय मंत्री आरै स्वास्थ्य सचिव से मिलकर सोटो का मुख्यालय इंदौर में बनाने का अनुरोध किया। उन्होंने केन्द्र के सामने प्रस्ताव रखा कि वास्तव में आर्गन डोनेशन को लकेर मध्यप्रदेश में केवल इंदौर में ही काम हो रहा है। ऐसे में यदि इंदौर में सोटो को स्थापित किया जाएगा तो उससे अंगदान करने वालों और जरूरतमंदों को काफी सहूलियत होगी।

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इस प्रस्ताव पर आश्वासन दिया है। दरअसल सोटो की स्थापना के लिए इंदौर ऑर्गन डोनेशन सोसायटी काफी प्रयास कर रही थी। यदि सोटो की स्थापना होगी तो इंदौर ऑर्गन डोनेशन सोसायटी को अंगदान की अनुमति के लिए नोटो के बजाय सोटो की अनुमति से ही काम चल जाएगा।   ये होगा फायदा - सोटो के पास ब्रेनडेड और रिसीवर का डाटाबेस तैयार हो जाएगा। उन सारे अस्पतालों की सूची उपलब्ध होगी, जो आर्गन डोनेशन के लिए रजिस्टर्ड हैं। 24 घंटे कॉल सेंटर चालू रहेगा, जिस पर ऑर्गन डोनेशन से संबंधित सूचनाओं का आदान-प्रदान होता रहेगा। आर्गन डोनेशन सोसायटी को अतिरिक्त स्टाफ मिल जाएगा, जिससे काम करने में सुविधा होगी। इसे कहते हैं हिम्मते मर्द, मददे खुदा। ठीक ही कहा गया है कि झुक सकता है आसमां, तबियत से पत्थर उछालो यारों। महाकवि गोपालदास "नीरज' ने ठीक ही कहा है - "

"है जगा इंसान तो मौसम बदलकर ही रहेगा, जल गया दीपक ता अंधेरा ढलकर ही रहेगा।।

क्यों कितनी बड़ी हो, क्यों कितनी कठिन हो,  हर नदी की राह से चट्टान को हटना पड़ा है।।''



(डॉ. बृजनाथ सिंह )

सहायक जनसम्पर्क अधिकारी

संभागीय जनसम्पर्क कार्यालय, इंदौर

मो. नं. 9425781736

email : proindore09@gmail.com



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