समाचार
वृक्षारोपण से जैव विविधता लेती है
मूर्तरूप
…………………….
स्वच्छ भारत अभियान - हर घर में इज्जत घर
जरूरी
…………………….
प्रधानमंत्री आवास योजना - हर गरीब के सिर पर
छत आवश्यक
…………………….
संभागायुक्त ने ग्रामीण विकास कार्यक्रमों की समीक्षा की
इंदौर 15 मार्च 2018
कमिश्नर श्री संजय
दुबे की अध्यक्षता में गत दिवस कमिश्नर कार्यालय सभाकक्ष में इंदौर संभाग
के वन मण्डलाधिकारियों और जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों की बैठक
आयोजित की गई। इस अवसर पर कमिश्नर श्री दुबे ने कहा कि इंदौर संभाग में व्यापक
पैमाने पर आगामी जुलाई माह में पौधारोपण करने के लिए आज से ही तैयारी करना जरूरी
हैं, तभी लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा। इस वर्ष जुलाई माह में विशेष मुहिम चलाकर एक
करोड़ से अधिक पौधे लगाये जाये। यह पौधे शासकीय भूमि, निजी भूमि, खेत की मेड़, सड़क के किनारे और नहर के किनारे लगाये
जाये। उन्होने कहा कि पौधों को बड़ा करने के लिए पौधा 3 फिट से अधिक बड़ा होना चाहिए। पौध रक्षक
की नियुक्त होना चाहिए और सिचांई के साधन होना चाहिए तभी पौधे जीवित रहेगें।
उन्होने
कहा कि बड़े पौधे लगाने पर उनकी जीवित रहने की संभावनाएं ज्यादा रहती हैं। गर्मियों
में पहले से ही गड्डा खोद देने से उसके अनावश्यक कीटाणु मर जाते हैं। जंगली व
विदेशी पौध लगाने की बजाय छायादार और फलदार पौधे लगाना जरूरी हैं। आम, नीम, महुआ, जामुन और चिरौंजी के पौधे लगाये जाय। और
उनकी देखभाल के लिए पौध रक्षक की नियुक्ति की जाये। मनरेगा योजना से गड्डे खोदे जा
सकते हैं और पौध रक्षक की नियुक्ति की जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि धार और इंदौर
जिले में 30-30 लाख पौधे लगाये जाये। पीपल, बरगद तथा
गूलर जैसे धार्मिक वृक्ष भी लगाये जाये। अगर ठीक ढंग से वायर फेंसिंग कर दी जाये
तो जंगल अपने आप उग आयेगा। पौध रक्षक का काम निकाई, गुड़ाई, खाद और सिंचाई की व्यवस्था करना हैं।
पौधों के मर जाने पर उनकी जगह दूसरे पौधे लगाये जाय। जुलाई माह के बाद अगर पौधे
लगाये गये तो उनका जीवित रहना मुश्किल हैं।
उन्होने कहा कि
बिना पौध रक्षक में पौधे जीवित नहीं रह सकते। जिलों में पौध रक्षक के अभाव में
अधिकांश पौधे मर जाते हैं। धार, झाबुआ, अलीराजपुर में जैव विविधता के लिए संघन वनीकरण जरूरी हैं।
पौधे ऐसे लगाये जाये जिनसे फूल-फल और लकड़ी काम आ सके और विविध प्रकार के पक्षियों
का आश्रय बन सके।
संभाग को खुले में शौच से मुक्ति जरूरी
कमिश्नर श्री दुबे ने कहा कि इंदौर संभाग को किसी भी स्थिति में आगामी 31 मई 2018 से पूर्व खुले में शौच से मुक्ति जरूरी
हैं। इंदौर जैसी व्यवस्था हर जिले में लागू की जाये। अन्यथा संविदा के आधार पर काम
कर रहे कर्मचारियों को सेवा से पृथक कर दिया जायेगा। काम ही उनकी नौकरी का मूल
आधार है। बनाये गये शौचालयों का उपयोग भी जरूरी हैं। खुले में शौच से मुक्ति के
लिए जनता का मानसिक रूप से तैयार करना जरूरी हैं। यह काम सरपंच, सचिव, सहायक विकास विस्तार अधिकारी, रोजगार सहायक, सहायक परियोजना अधिकारी और परियोजना
अधिकारी टीम भावना से मिलजुल कर करें। 31 मई तक विकास खण्ड शौच से मुक्त न होने पर संबंधित जनपद के
मुख्य कार्यपालन अधिकारी के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्यवाही की जायेगी। धार, झाबुआ, अलीराजपुर, खण्डवा और खरगोन की स्थिति बहुत चिंताजनक
हैं। किसी भी योजना की सफलता के लिए जनता का सहयोग जरूरी हैं। इन जिलो का प्रदेश
और राष्ट्रीय स्तर की टीम मई माह में निरीक्षण करेगी।
सभी गरीबों को प्रधानमंत्री आवास मिलना जरूरी
कमिश्नर श्री दुबे ने प्रधानमंत्री आवास योजना
की समीक्षा करते हुए कहा कि इंदौर जिले को छोड़कर संभाग के सभी जिलों की स्थिति
चिंताजनक हैं। धार,
झाबुआ, अलीराजपुर, खण्डवा, खरगोन, बडवानी, बुरहानपुर में अभीतक 60 प्रतिशत लक्ष्य भी हासिल नहीं हो पाया
हैं। काम न करने वाले हितग्राहियों से प्रथम किस्त की राशि वापस जमा कराई जाये।
प्रधानमंत्री आवास के हितग्राहियों को पानी, बिजली, सड़क, गैस कनेश्क्शन, शौचालय आदि की सुविधा भी यथासंभव मुहिया कराई जाये। 30 अप्रैल तक शत-प्रतिशत लक्ष्य पूरा न
होने पर जिला पंचायत के सहायक परियोजना अधिकारी या परियोजना अधिकारी को सेवा से
पृथक कर दिया जायेगा। इंदौर जिले ने प्रधानमंत्री आवास योजना में अभीतक 95 प्रतिशत
लक्ष्य हासिल कर लिया हैं।
बैठक में इंदौर
के मुख्य वन संरक्षक श्री पुरूषोत्तम धीमान, संयुक्त आयुक्त श्रीमती चेतना फौजदार, जिला पंचायत के सहायक परियोजना अधिकारी, परियोजना अधिकारी और उद्यानिकी विभाग के
अधिकारी मौजूद थे।
क्रमांक
139/362 /सिंह/जी
No comments:
Post a Comment