जिला
स्तर पर अंतर्विभागीय समन्वय हेतु कार्यशाला संपन्न
इंदौर 15 मार्च, 2018
जिला एडस रोकथाम एवं नियंत्रण
इकाई इंदौर द्वारा कलेक्टर कार्यालय के सभाकक्ष क्रमांक 210 में जिला स्तर पर
अंतर्विभागीय समन्वय के संबंध में कार्यशाला सम्पन्न हुई। इस अवसर पर एचआईव्ही/एडस
के संबंध में जनजागरूकता पर आधारित लघु फिल्म का भी प्रदर्शन किया गया। कार्यशाला
में वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. रचना दुबे ने विस्तार से प्रजेंटेशन प्रस्तुत किया तथा
विभागों से एचआईव्ही/एडस नियंत्रण कार्यक्रम में सहयोग से संबंधित अपेक्षाएं भी
व्यक्त की। कार्यशाला कलेक्टर श्री निशांत बरवडे की अध्यक्षता, एडीएम श्रीमती
रूचिका चौहान, एडीएम श्री कैलाश वानखेड़े, एडीएम श्री अजय शर्मा, मुख्य चिकित्सा
एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नायक की विशेष उपस्थिति में आयोजित की गयी।
कार्यशाला में वरिष्ठ
चिकित्सक डॉ. रचना दुबे ने बताया कि एडस की बीमारी एक एचआईव्ही (ह्युमन इम्युनो
डिफिसिएनसी) वायरस द्वारा होती है। यह वायरस व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता
समाप्त कर देता है तथा इसके कारण व्यक्ति को कई बीमारियां एक साथ हो जाती हैं।
उन्होंने बताया कि विश्व में एचआईव्ही/एडस ग्रस्त व्यक्तियों में भारत तीसरा बड़ा
देश है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश देश के मध्य में स्थित है और यहां से देश के
कई बड़े राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरते हैं,जिससे बड़ी संख्या में लोगों का आवागमन होता
है। ग्रसित व्यक्तियों के आने से संक्रमण के फैलने की संभावना बढ़ जाती है।
उन्होंने बताया कि एचआईव्ही/एडस चार माध्यमों अर्थात असुरक्षित यौन संबंध से,
संक्रमित सुईयों का उपयोग, गर्भवती माता से बच्चे में संक्रमण तथा संक्रमित खून चढ़ाने
से फैलता है। उन्होंने कहा कि जागरूकता व सावधानियां बरतने से एचआईव्ही/एडस के
संक्रमण से बचा जा सकता है। उन्होंने एचआईव्ही/एडस रोग के लक्षण, जाँच, बीमारी से निपटने हेतु
चुनौतियों आदि के संबंध में विस्तार से जानकारी दी।
कार्यशाला में डॉ. रचना दुबे
ने कहा कि जन जागरूकता हेतु सभी विभागों के समन्वित प्रयास किया जाना जरूरी हैं।
जागरूकता बढ़ने से बीमारी से बचा जा सकता हैं। उनहोने कार्यशाला में विभिन्न
विभागों से सहयोग हेतु अपेक्षाएं भी व्यक्त की और बताया गया कि विभागीय प्रशिक्षण
कार्यक्रमों में एचआईव्ही/एडस विषय का समावेश किया जाये,जिनमें विभागीय अधिकारियों
और कर्मचारियों को एचआईव्ही/एडस के बारे में संवेदनशील किया जाये। एचआईव्ही/एडस
रोकथाम संदेशों को विभागीय प्रचार-प्रसार सामग्रियों में प्रिंट किया जाये वहीं
शिक्षण संस्थानों रेड रिबन क्लब की स्थापना की जाये। स्वैच्छिक रूप से रक्तदान
शिविरों का आयोजन किया जाये। सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को एचआईव्ही/एडस संक्रमित
व्यक्तियों के हित में संचालित करने का भी सुझाव दिया गया।
क्रमांक 140/363/भदौरिया/जी
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